राहुल गांधी कांग्रेस के लिए 'रेड फ्लैग': पीयूष गोयल का तीखा हमला, चुनाव आयोग विवाद पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और ललन सिंह (राजीव रंजन सिंह) ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। गोयल ने राहुल गांधी को कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा 'रेड फ्लैग' करार दिया और दावा किया कि पार्टी के भीतर ही कई वरिष्ठ नेता उनके नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है।
कांग्रेस नेताओं के बयानों का हवाला
गोयल ने तर्क दिया कि कांग्रेस के भीतर ही आंतरिक विरोधाभास स्पष्ट है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के कई नेता राहुल गांधी के खिलाफ अपनी बात रख रहे हैं। शशि थरूर ने खुद कहा कि एसआईआर के कारण केरल में कांग्रेस चुनाव जीती है। रमेश चेन्नीथला ने भी यही कहा। केरल के मुख्यमंत्री ने भी एसआईआर की तारीफ की है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की भूमिका की सराहना की थी। गोयल के अनुसार, इन्हीं नेताओं की पार्टी अब 'बेबुनियाद और झूठे वोट चोरी के दावे' कर रही है।
चुनाव आयोग और कांग्रेस का ट्रैक रिकॉर्ड
गोयल ने कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयोग के अधिकारियों को पुरस्कृत करने के कथित उदाहरण गिनाए। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को 1999 में लालकृष्ण आडवाणी के सामने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने का मौका दिया गया। उन्होंने एमएस गिल का उदाहरण भी दिया — जो 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे, सेवानिवृत्ति के तीन वर्ष बाद कांग्रेस में शामिल हुए, 2004 में राज्यसभा पहुँचे और 2008 में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बने।
गोयल ने केरल का भी उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि टीकाराम मीणा केरल के मुख्य चुनाव अधिकारी थे और एक वर्ष बाद उन्हें कांग्रेस की राजस्थान घोषणापत्र टीम में शामिल कर लिया गया। इसी प्रकार, मई 2026 में रतन यू. केलकर केरल के मुख्य चुनाव अधिकारी थे और चुनाव के तुरंत बाद वर्तमान मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने उन्हें अपना मुख्य सचिव घोषित कर दिया।
एनडीए सरकार का पक्ष
गोयल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने चुनाव आयोग को पूर्ण स्वायत्तता दी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को राजनीतिक लाभ देने का कोई प्रयास नहीं किया गया और उन्हें ईमानदारी से काम करने दिया गया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2023 में मोदी सरकार ने कानूनी प्रावधान किया, जिसके तहत नेता प्रतिपक्ष को भी चुनाव आयुक्त चयन समिति का सदस्य बनाया गया — ताकि प्रधानमंत्री के साथ-साथ विपक्ष भी यह तय कर सके कि कौन मुख्य चुनाव आयुक्त बनेगा।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय में हुई जब विपक्ष चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर आक्रामक है। सत्तारूढ़ दल का यह पलटवार दर्शाता है कि आगामी चुनावी मौसम में 'चुनाव आयोग की निष्पक्षता' एक केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा बन सकती है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देती है और क्या राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर की बेचैनी सार्वजनिक रूप से और उभरती है।