30 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राहुल गांधी के 'दो कप' बयान पर सियासी घमासान, भाजपा का आरोप — जातीय नफरत फैलाने की कोशिश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राहुल गांधी के 'दो कप' बयान पर सियासी घमासान, भाजपा का आरोप — जातीय नफरत फैलाने की कोशिश

सारांश

राहुल गांधी का 'दो कप' बयान — दलितों के साथ चाय की दुकानों पर भेदभाव का प्रतीक — अब एक राष्ट्रीय सियासी जंग बन चुका है। भाजपा ने इसे नफरत की राजनीति बताया, कांग्रेस ने इसे सामाजिक सच्चाई। बिहार से दिल्ली तक नेताओं के बयानों ने जाति विमर्श को एक बार फिर केंद्र में ला दिया।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि चाय की दुकानों पर दलितों के लिए अलग कप रखे जाते हैं जिन्हें उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है।
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने पटना में राहुल गांधी पर मुद्दाविहीन राजनीति का आरोप लगाया।
भाजपा प्रवक्ता यासिर जिलानी ने कहा कि सड़क किनारे की दुकानों पर ऐसा कोई भेदभाव नहीं होता।
बिहार मंत्री अशोक कुमार चौधरी ने कांग्रेस के दशकों के शासनकाल को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया।
कांग्रेस नेता उदित राज ने बयान का समर्थन करते हुए जातिगत भेदभाव को वास्तविक सामाजिक समस्या बताया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 'दो कप' वाले बयान ने 30 अगस्त को देशभर में सियासी तूफान खड़ा कर दिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन पर झूठ बोलकर जातीय विद्वेष फैलाने का आरोप लगाया, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने उनके बयान को सामाजिक यथार्थ का आईना बताते हुए पूरा समर्थन दिया।

क्या था 'दो कप' वाला बयान

राहुल गांधी ने एक शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि चाय की दुकानों पर दो अलग-अलग कप रखे जाते हैं — एक दलित समुदाय के लिए, जिसे उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है, और दूसरा सवर्ण समाज के लिए, जिसे दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। उनके इस बयान ने जाति-आधारित भेदभाव की बहस को एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

पटना में भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, 'राहुल गांधी के पास कोई मुद्दा नहीं है। वे जो भी मुद्दा उठाते हैं, उसी पर उन्हें मुंह की खानी पड़ती है। उन्होंने वंदे मातरम का मुद्दा उठाया और उस पर भी उन्हें मुंह की खानी पड़ी।'

दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता यासिर जिलानी ने कहा, 'राहुल गांधी लगातार झूठ बोल रहे हैं। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद ऐसा लगता है कि उन्हें कोई जादुई नुस्खा मिल गया है, लेकिन यह उनकी गलतफहमी है। किसी सड़क किनारे की रेहड़ी या चाय की दुकान पर इस तरीके का भेदभाव नहीं हो रहा है।' उन्होंने आगे कहा, 'राहुल गांधी, आप नफरत क्यों फैला रहे हैं? इससे आपके वोट बढ़ेंगे नहीं, बल्कि घटेंगे ही।'

मुंबई में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन ए. सिन्हा ने कहा, 'राहुल गांधी का जीवन में बस एक ही मकसद है — झूठ बोलकर लोगों को गुमराह करना।' उन्होंने 'झूठ की गूंज' नामक पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राहुल गांधी के हर दावे की पड़ताल करती है और छात्रों के सामने सही तथ्य रखती है।

बिहार सरकार का पलटवार

बिहार सरकार के मंत्री अशोक कुमार चौधरी ने भी इस बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'इसके लिए कौन जिम्मेदार है? इतने सालों तक किसने शासन किया? 10 साल की सरकार या 50 साल की सरकार? उन्हें खुद से यह सवाल पूछना चाहिए।' यह टिप्पणी कांग्रेस के दशकों लंबे शासनकाल पर सीधा निशाना मानी जा रही है।

कांग्रेस का बचाव

कांग्रेस नेता उदित राज ने राहुल गांधी के बयान को सामाजिक सच्चाई करार दिया। उन्होंने कहा, 'अगर चमार, वाल्मीकि, खटीक या धनुक समुदाय का कोई व्यक्ति चाय की दुकान खोलता है, तो क्या वे उन दुकानों को चला पाएंगे? क्या वे रेस्तरां चला पाएंगे? जो लोग कहते हैं कि जातिगत भेदभाव नहीं है, उनके सामने सच्चाई आ जाएगी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'हिंदू धर्म की सच्चाई भी सामने आएगी।'

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब देश में जाति जनगणना और दलित अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस पहले से तेज है। गौरतलब है कि 'दो कप' जैसे प्रतीकात्मक बयान अक्सर ज़मीनी अनुभवों को सार्वजनिक विमर्श में लाने का काम करते हैं, लेकिन राजनीतिक ध्रुवीकरण भी बढ़ाते हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद और राज्य विधानसभाओं में भी गूंजने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इस बात पर है कि जाति-आधारित भेदभाव को सार्वजनिक विमर्श में कैसे जगह मिले। भाजपा का 'नफरत फैलाने' वाला तर्क और कांग्रेस का 'सामाजिक सच्चाई' वाला बचाव — दोनों ही असल सवाल से ध्यान भटकाते हैं कि क्या ऐसे भेदभाव के खिलाफ कोई ठोस नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि जाति जनगणना की माँग और दलित अधिकारों पर बहस पहले से चल रही है — इस बयान ने उस आग में घी का काम किया। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि दोनों पक्ष इस मुद्दे को नीति नहीं, चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी का 'दो कप' वाला बयान क्या था?
राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि चाय की दुकानों पर दलितों को अलग कप दिया जाता है जिसे उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है, जबकि सवर्ण समाज का कप दोबारा इस्तेमाल होता है। यह बयान जाति-आधारित भेदभाव को उजागर करने के लिए दिया गया था।
भाजपा ने राहुल गांधी के बयान पर क्या कहा?
भाजपा ने इस बयान को झूठ और नफरत फैलाने की कोशिश बताया। पार्टी के कई नेताओं — रविशंकर प्रसाद, यासिर जिलानी और तुहिन ए. सिन्हा — ने कहा कि राहुल गांधी समाज को बाँटने की राजनीति कर रहे हैं और ऐसा कोई भेदभाव ज़मीन पर नहीं होता।
कांग्रेस ने राहुल गांधी के बयान का बचाव कैसे किया?
कांग्रेस नेता उदित राज ने बयान का समर्थन करते हुए कहा कि दलित समुदाय के लोगों को व्यवसाय चलाने में आज भी जातिगत बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जो लोग भेदभाव से इनकार करते हैं, उनके सामने सच्चाई आ जाएगी।
बिहार सरकार ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
बिहार सरकार के मंत्री अशोक कुमार चौधरी ने राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस के दशकों लंबे शासनकाल को इस सामाजिक स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को पहले यह सवाल खुद से पूछना चाहिए।
इस विवाद का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
यह विवाद जाति जनगणना और दलित अधिकारों पर पहले से चल रही बहस को और तेज कर सकता है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्ष इस मुद्दे को नीतिगत सुधार की बजाय चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 घंटे पहले
  3. कल
  4. 4 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 1 साल पहले