भाजपा का आरोप: राहुल गांधी और इंडी गठबंधन फॉर्म 7 विवाद पर देश को गुमराह कर रहे हैं
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और 'इंडिया' ब्लॉक के सांसदों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध जारी विरोध-प्रदर्शन पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पलटवार किया है। 7 अक्टूबर 2026 को पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी पर फॉर्म 7 और मतदाता सूची विवाद को लेकर देश को भ्रमित करने का आरोप लगाया। भाजपा के अनुसार विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।
तेलंगाना और विजयवाड़ा से भाजपा नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र राव ने कहा, 'राहुल गांधी वोटरों के हटाए जाने का दावा करके पूरे देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। फॉर्म 7 वोटरों के नाम हटाने के लिए एक आवेदन है, लेकिन राहुल गांधी और इंडी गठबंधन भी देश के लोगों को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं कि माइनॉरिटी वोट हटाए जा रहे हैं। यह सच नहीं है।'
विजयवाड़ा में भाजपा की नेशनल काउंसिल की सदस्य यामिनी शर्मा ने राहुल गांधी पर चुनाव आयोग और भारतीय लोकतंत्र पर 'गैर-जिम्मेदाराना हमले' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी किस हैसियत से प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग को धमकी दे रहे हैं? हम इन लोगों के लिए जवाबदेह नहीं हैं, हम जनता के प्रति जवाबदेह हैं।'
बिहार और उत्तर प्रदेश के नेताओं ने भी साधा निशाना
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने एसआईआर विवाद के संदर्भ में कहा, 'राहुल गांधी को पहले यह तय करना चाहिए कि वे लोकतंत्र में विश्वास करते हैं या धमकी की राजनीति में।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चुनाव आयोग के आधिकारिक बयान के अनुसार विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने निर्धारित समय से पहले मुलाकात का समय नहीं माँगा था।
उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कांग्रेस के नेता 'असलियत से पूरी तरह कट चुके हैं।' उन्होंने कहा, 'जब वे चुनाव जीतते हैं तो चुनाव आयोग अच्छा होता है, लेकिन जब वे हारते हैं, तो चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हैं।'
जेडीयू और भाजपा प्रवक्ता की राय
जनता दल (यूनाइटेड) के महासचिव श्याम रजक ने कहा कि किसी से मिलने या मुद्दा उठाने के लिए तय प्रक्रियाएँ होती हैं और उनका पालन न करने का अर्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था में अविश्वास है। उन्होंने कहा, 'वे कोई राजा नहीं हैं जो जब चाहें आदेश जारी कर दें।'
भाजपा प्रवक्ता समता ने कांग्रेस और भारत राष्ट्र समिति (BRS) पर मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग या फॉर्म 7 के विरुद्ध कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और फॉर्म 7 के माध्यम से नाम हटाए जाने की शिकायतों से जुड़ा है। इंडी गठबंधन का आरोप है कि अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं को असंगत रूप से निशाना बनाया जा रहा है — एक आरोप जिसे भाजपा नेता सिरे से खारिज करते हैं। गौरतलब है कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है और इस तरह के विरोध-प्रदर्शन सत्तापक्ष व विपक्ष दोनों के बीच संस्थागत विश्वास के व्यापक प्रश्न को उठाते हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक रूप से और गहरा होने की संभावना है।