इंद्रेश कुमार का राहुल गांधी पर पलटवार: 'सनातन और संघ की समझ नहीं, झूठ बोलना बंद करें'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिनमें संघ पर महिलाओं के साथ भेदभाव का आरोप लगाया गया था। इंद्रेश कुमार ने कहा कि राहुल गांधी को सनातन परंपरा और संघ की कार्यप्रणाली की पर्याप्त समझ नहीं है और उन्होंने राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से झूठ बोलना बंद करने की अपील की।
संघ और महिलाओं पर आरोपों का खंडन
इंद्रेश कुमार ने कहा कि RSS नारी और पुरुष को एक-दूसरे का पूरक मानता है, न कि प्रतिस्पर्धी। उन्होंने परिवारों में बेटी, बहन और माँ के रूप में महिलाओं के सम्मान की परंपरा का उल्लेख किया और नवरात्र के दौरान कन्या पूजन की रिवायत का हवाला दिया। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय' बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने संघ का कोई गहन अध्ययन किए बिना लगातार उसकी आलोचना जारी रखी है।
इंद्रेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ का दृष्टिकोण सभी धर्मों के प्रति सम्मान का है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पूजा-पद्धति का पालन करने का अधिकार है और किसी भी धर्म की निंदा या उसमें अनुचित हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।
सीजेपी विरोध प्रदर्शन पर सवाल
सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा बुद्धिजीवियों के साथ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर इंद्रेश कुमार ने कहा कि इन आंदोलनों के वित्त-पोषण के स्रोत पर गंभीर सवाल उठते हैं। उनके अनुसार, कथित तौर पर कुछ विदेशी ताकतें भारत में अराजकता पैदा करने के लिए कुछ समूहों का उपयोग कर रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस आंदोलन की माँगें लगातार बदलती रही हैं — शुरुआत नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दे से हुई, फिर वोट चोरी के आरोपों तक, फिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग तक और अंततः सत्ता परिवर्तन की माँग तक पहुँच गई। इंद्रेश कुमार ने कहा कि उद्देश्यों में बार-बार बदलाव से आंदोलन की दिशा और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता है।
बांग्लादेश और फ्रांस से तुलना पर प्रतिक्रिया
भारत की स्थिति की तुलना फ्रांस और बांग्लादेश से किए जाने पर इंद्रेश कुमार ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और सूफी समुदाय की स्थिति का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि क्या प्रदर्शनकारी भारत में भी ऐसी परिस्थितियाँ चाहते हैं। उनके अनुसार, भारत बुद्ध, महावीर, गुरु नानक, डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी, भगवान राम और भगवान कृष्ण की शांति और अहिंसा की परंपरा वाला देश है।
युवाओं और समाज पर दावे
इंद्रेश कुमार ने दावा किया कि देश के युवा इस तरह के आंदोलनों के साथ नहीं हैं। उन्होंने नवरात्र उत्सव, मंदिरों और गाँवों में आयोजित रामलीलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय समाज में राम और रामायण की परंपरा गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने विपक्ष पर हिंसा और अराजकता की भाषा अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि संविधान की किताब लेकर चलने वालों को अपने आचरण में भी संवैधानिक मूल्यों का पालन करना चाहिए।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब संघ-कांग्रेस के बीच वैचारिक टकराव तीखा होता दिख रहा है, और राहुल गांधी की ओर से RSS की कार्यप्रणाली को लेकर हमले नई तीव्रता के साथ सामने आए हैं। आगे यह देखना होगा कि कांग्रेस इन आरोपों का किस रूप में जवाब देती है।