राजस्थान एसीबी ने असिस्टेंट इंजीनियर से 3.70 लाख रुपये की संदिग्ध राशि की बरामदगी की
सारांश
Key Takeaways
- राजस्थान एसीबी ने 3.70 लाख रुपये की संदिग्ध राशि बरामद की।
- यह कार्रवाई महेंद्र सिंह के खिलाफ की गई।
- जांच का उद्देश्य भ्रष्टाचार से संबंधित गतिविधियों को उजागर करना है।
- एसीबी ने आगे की जांच के लिए कदम उठाने की योजना बनाई है।
- सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
जयपुर, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने शनिवार को बारां जिले में एक असिस्टेंट इंजीनियर से 3.70 लाख रुपये की संदिग्ध नकद राशि जब्त की।
अधिकारियों के अनुसार, यह राशि अंता नगर पालिका में तैनात महेंद्र सिंह से एसीबी की करौली यूनिट द्वारा प्राप्त विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर की गई कार्रवाई में बरामद की गई।
यह विशेष ऑपरेशन एसीबी की करौली यूनिट ने ब्यूरो मुख्यालय से मिली सूचना के बाद शुरू किया था।
एसीबी के निदेशक जनरल गोविंद गुप्ता ने बताया कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली थी कि महेंद्र सिंह के पास बड़ी मात्रा में अवैध नकद है और वह शुक्रवार रात या शनिवार सुबह करौली जिले में अपने गृहनगर हिंडौन सिटी जाने वाला है।
इस सूचना के आधार पर, करौली एसीबी टीम ने उसे पकड़ने के लिए निगरानी की योजना बनाई। पुलिस उप महानिरीक्षक (एसीबी) डॉ. रामेश्वर सिंह की देखरेख में, पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश भारद्वाज के नेतृत्व में एक टीम ने हिंडौन सिटी में बयाना रोड पर आकस्मिक जांच की।
इस ऑपरेशन के दौरान, अधिकारियों ने महेंद्र सिंह के पास से 3.70 लाख रुपये की नकद राशि बरामद की। असिस्टेंट इंजीनियर इस बड़ी राशि के स्रोत के बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण या सहायक दस्तावेज नहीं प्रदान कर सका। एसीबी ने राशि को जब्त कर लिया और आरोपी अधिकारी से गहन पूछताछ आरंभ कर दी।
अधिकारियों ने बताया कि जांच का मुख्य उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि क्या यह राशि भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग या अवैध रिश्वत से संबंधित है। यह जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार की जा रही है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एसीबी) स्मिता श्रीवास्तव और एस. परिमला चल रही पूछताछ और कानूनी प्रक्रियाओं की देखरेख कर रही हैं।
एसीबी ने कहा है कि जांच के हिस्से के तहत और भी कदम उठाए जाएंगे, जिनमें वित्तीय रिकॉर्ड की जांच, हाल के लेन-देन का सत्यापन और आरोपी के सरकारी कार्यों की पड़ताल शामिल है।
एसीबी ने सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है और जोर देकर कहा है कि सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की आकस्मिक जांच नियमित रूप से की जाएंगी।