राजस्थान: कुम्हार को फिर से मिला 9 करोड़ का आयकर नोटिस, परिवार में हड़कंप

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राजस्थान: कुम्हार को फिर से मिला 9 करोड़ का आयकर नोटिस, परिवार में हड़कंप

सारांश

राजस्थान के एक कुम्हार को आयकर विभाग ने दोबारा 9 करोड़ रुपए का नोटिस भेजा है, जिससे उसके परिवार में चिंता और तनाव का माहौल है। विष्णु कुमार प्रजापत की स्थिति गंभीर है, और उन्हें राहत की कोई उम्मीद नहीं दिख रही।

Key Takeaways

  • आयकर विभाग द्वारा भेजे गए नोटिस से कुम्हार का परिवार चिंतित है।
  • विष्णु कुमार ने अपनी आय केवल 95,000 रुपए बताई है।
  • आधार और पैन के दस्तावेजों का दुरुपयोग संभव है।
  • पुलिस ने मामले में अंतिम रिपोर्ट बिना उचित कार्रवाई के दाखिल की।
  • कुम्हार की स्थिति दर्शाती है कि सरकारी तंत्र में सुधार की ज़रूरत है।

जयपुर, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पिछले वर्ष आयकर विभाग द्वारा 9 करोड़ रुपए का विशाल टैक्स नोटिस प्राप्त करने वाले एक सड़क किनारे कुम्हार की स्थिति फिर से अत्यंत चिंताजनक हो गई है, क्योंकि विभाग ने अब फिर से उनसे लगभग 9 करोड़ रुपए के टैक्स की मांग वाला नोटिस भेजा है, जिससे उनका परिवार गहरे सदमे में है।

मिट्टी के बर्तन बनाकर और बेचकर सीमित आय अर्जित करने वाले विष्णु कुमार प्रजापत ने साझा किया कि 18 मार्च के नोटिस में उन्हें एक महीने के भीतर 8,98,79,260 रुपए जमा करने का आदेश दिया गया है।

इस नोटिस के आने के बाद से वह और उनका परिवार गहरे तनाव में हैं और उन्हें नींद नहीं आ रही है।

विष्णु कुमार प्रजापत का कहना है कि इस गंभीर गलती को सुधारने के लिए कई सरकारी कार्यालयों में जाने के बावजूद आयकर विभाग के अधिकारियों से उन्हें अब तक कोई राहत नहीं मिली है।

प्रजापत के मुताबिक, उन्हें पहले 11 मार्च, 2025 को बूंदी स्थित आयकर विभाग से एक चौंकाने वाला नोटिस प्राप्त हुआ था। नोटिस में यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान सुरेंद्र सिंह बाबेल नामक व्यक्ति के साथ 10.61 करोड़ रुपए का लेन-देन किया है।

हालांकि, प्रजापत ने ऐसे किसी व्यक्ति या लेन-देन के बारे में किसी भी जानकारी से इनकार किया है।

आयकर और जीएसटी पोर्टल पर रिकॉर्ड की जांच करने पर उन्होंने पाया कि 19 मार्च, 2020 को मुंबई के गिरगांव में भूमिका ट्रेडिंग नामक एक फर्म उनके दस्तावेजों का उपयोग करके पंजीकृत की गई थी। विष्णु को संदेह है कि अज्ञात व्यक्तियों ने उनके आधार, पैन और अन्य दस्तावेजों का दुरुपयोग करते हुए फर्म को पंजीकृत किया और उनकी जानकारी के बिना वित्तीय लेन-देन किए।

रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि फर्म ने एक अन्य कंपनी के साथ 2.83 करोड़ रुपए का लेन-देन किया, जिससे उनका कोई संबंध नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, ये लेन-देन 19 मार्च, 2020 और 1 फरवरी, 2021 के बीच हुए थे, जबकि प्रजापत का कहना है कि उन्हें ऐसी किसी भी गतिविधि की कोई जानकारी नहीं थी।

विभाग ने उन्हें नोटिस का उत्तर देने के लिए 31 मार्च, 2025 तक का समय दिया था। प्रजापत ने बताया कि उन्होंने पहली बार अपना आयकर रिटर्न दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने मात्र 95,000 रुपए की वार्षिक आय घोषित की है।

16 अप्रैल, 2025 को प्रजापत ने गेंडोली पुलिस स्टेशन में एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके पैन कार्ड नंबर का उपयोग करके व्यावसायिक लेन-देन किए जा रहे थे और उनके नाम पर कर नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि, पुलिस ने कथित तौर पर पीड़ित को धोखाधड़ी की सूचना दिए बिना मामले में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) दाखिल कर दी।

बुधवार को दु:खी विष्णु कुमार प्रजापत ने पुलिस अधीक्षक को मामले की जानकारी दी, जिन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी।

बूंदी के पुलिस अधीक्षक अवनीश शर्मा ने कहा कि पीड़ित ने पहले एफआईआर दर्ज कराई थी। इस संबंध में पूछताछ की जा चुकी है। अब जांच पुलिस उपाधीक्षक स्तर पर की जाएगी।

Point of View

यह दर्शाता है कि कैसे आम नागरिकों को सरकारी तंत्र द्वारा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
NationPress
27/03/2026

Frequently Asked Questions

विष्णु कुमार प्रजापत को आयकर विभाग से कब नोटिस मिला?
उन्हें पहली बार 11 मार्च, 2025 को नोटिस मिला था।
नोटिस में क्या आरोप लगाया गया था?
नोटिस में आरोप था कि उन्होंने सुरेंद्र सिंह बाबेल के साथ 10.61 करोड़ का लेन-देन किया है।
विष्णु ने कितनी वार्षिक आय घोषित की है?
उन्होंने मात्र 95,000 रुपए की वार्षिक आय घोषित की है।
प्रजापत ने पुलिस में कब शिकायत की?
उन्होंने 16 अप्रैल, 2025 को गेंडोली पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले में क्या किया?
पुलिस ने मामले में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) दाखिल कर दी, बिना पीड़ित को धोखाधड़ी की सूचना दिए।
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