राजकोट में हाई अलर्ट: 26 अप्रैल स्थानीय निकाय चुनाव से पहले 2500+ जवान तैनात
सारांश
Key Takeaways
- 26 अप्रैल 2025 को राजकोट में स्थानीय निकाय चुनाव होंगे, जिसके लिए पुलिस ने हाई अलर्ट जारी किया है।
- 2,500 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात — जिनमें 958 पुलिसकर्मी, 165 एलआरडी जवान और 1,371 होमगार्ड्स शामिल हैं।
- आचार संहिता के दौरान 70 लाख रुपए से अधिक की शराब जब्त और 173 लोगों पर जुए के मामले में कार्रवाई।
- शहर में 8 चेकपोस्ट स्थापित, संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित फुट पेट्रोलिंग जारी।
- एसओजी द्वारा ड्रोन से हवाई निगरानी और साइबर टीम द्वारा सोशल मीडिया पर कड़ी नजर।
- डीसीपी जगदीश बांगरवा के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारी चौबीसों घंटे स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
राजकोट, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के राजकोट में 26 अप्रैल 2025 को होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव से पहले पुलिस प्रशासन ने पूरे शहर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए 2,500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है और संवेदनशील बूथों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा बल की व्यापक तैनाती
क्राइम ब्रांच के डीसीपी जगदीश बांगरवा ने शनिवार को प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि चुनाव की निगरानी के लिए पुलिस आयुक्त (सीपी), संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी), चार डीसीपी और एसीपी स्तर के वरिष्ठ अधिकारी चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
मैदान में 958 नियमित पुलिसकर्मी, 165 एलआरडी जवान और 1,371 होमगार्ड्स की तैनाती की गई है। इसके अतिरिक्त जीआरडी और एसआरपीएफ के जवान भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई
आचार संहिता लागू होने के बाद से पुलिस ने अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। अब तक 70 लाख रुपए से अधिक की अंग्रेजी और देशी शराब जब्त की जा चुकी है, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयासों को विफल करने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
इसके साथ ही जुए के खेल में संलिप्त 173 व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गई है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार का धन या प्रलोभन मतदाताओं को प्रभावित न कर सके।
चेकपोस्ट और पेट्रोलिंग व्यवस्था
शहर की सीमाओं पर 8 रणनीतिक स्थानों पर चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं जहां वाहनों की सघन जांच की जा रही है। संवेदनशील और अति संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की नियमित फुट पेट्रोलिंग जारी है ताकि नागरिकों में सुरक्षा का विश्वास बना रहे।
गौरतलब है कि राजकोट में अतीत में कुछ चुनावी हिंसा की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं, इसलिए इस बार प्रशासन ने पहले से ही एहतियाती उपाय कड़े कर दिए हैं।
ड्रोन निगरानी और साइबर मॉनिटरिंग
डीसीपी बांगरवा ने बताया कि जरूरत पड़ने पर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) द्वारा ड्रोन के माध्यम से हवाई निगरानी की जाएगी। यह तकनीकी उपाय भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों में विशेष रूप से उपयोगी होगा।
इसके अलावा साइबर टीम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी नजर रख रही है। किसी भी प्रकार की अफवाह, भड़काऊ सामग्री या भ्रामक जानकारी को तत्काल प्रभाव से रोकने के लिए यह टीम 24 घंटे सक्रिय है।
व्यापक प्रभाव और आगे की राह
स्थानीय निकाय चुनाव न केवल नगरपालिका प्रशासन की दिशा तय करते हैं बल्कि ये राज्य और राष्ट्रीय राजनीति का भी एक महत्वपूर्ण पैमाना होते हैं। गुजरात में भाजपा की मजबूत उपस्थिति के बीच विपक्षी दलों की चुनौती इन निकाय चुनावों में भी देखने को मिल रही है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए जाते हैं, लेकिन राजकोट में ड्रोन और साइबर निगरानी का एकीकृत उपयोग इसे एक आधुनिक चुनावी सुरक्षा मॉडल बनाता है।
26 अप्रैल को मतदान संपन्न होने के बाद मतगणना की तारीख और परिणाम राजकोट की स्थानीय राजनीति की दिशा तय करेंगे। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दिन भी सुरक्षा का यही स्तर बनाए रखा जाएगा।