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राम मंदिर निर्माण: सीईओ जीतेंद्र मिश्रा के सुझाव मान्य, 15 नवंबर तक पूरा होगा शेष कार्य

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राम मंदिर निर्माण: सीईओ जीतेंद्र मिश्रा के सुझाव मान्य, 15 नवंबर तक पूरा होगा शेष कार्य

सारांश

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण अंतिम चरण में — 150 में से 148 कार्य पूरे। समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने सीईओ जीतेंद्र मिश्रा के अग्रिम भुगतान उपयोग और ब्याज वापसी के सुझावों को मान्य किया। परकोटा समेत शेष कार्य 15 नवंबर तक पूरे होने की उम्मीद।

मुख्य बातें

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने सीईओ जीतेंद्र मिश्रा के सभी सुझावों को स्वीकार किया।
सीईओ ने सुझाव दिया कि निर्माण एजेंसियों को किए गए अग्रिम भुगतान का समय पर उपयोग हो और अनुपयोगी राशि पर अर्जित ब्याज राम मंदिर ट्रस्ट को लौटाया जाए।
परिसर के 150 में से 148 निर्माण कार्य पूरे होकर ट्रस्ट को सौंपे जा चुके हैं।
मंदिर की बाहरी परिधि संरचना परकोटा समेत शेष कार्य 15 नवंबर तक पूरे होने की उम्मीद।
निर्माण कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) रिकॉर्ड, रेखाचित्र और वित्तीय दस्तावेज़ों सहित परियोजनाएँ ट्रस्ट को सौंप रही है।
अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में 20 गैलरी होंगी; नृपेंद्र मिश्रा ने शनिवार को निरीक्षण किया।

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने 17 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जीतेंद्र मिश्रा द्वारा निर्माण समीक्षा बैठक में दिए गए सुझावों को पूरी तरह लागू किया जाएगा। विशेष रूप से निर्माण एजेंसियों को किए गए अग्रिम भुगतानों के समय पर उपयोग से संबंधित सिफारिशों पर तत्काल ध्यान दिया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अयोध्या में राम मंदिर परिसर के 150 में से 148 निर्माण कार्य पूरे होकर ट्रस्ट को सौंपे जा चुके हैं।

समीक्षा बैठक में क्या हुआ

पत्रकारों से बातचीत में नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि सीईओ जीतेंद्र मिश्रा इस विशेष निर्माण समीक्षा बैठक में उपस्थित थे और उन्हें चर्चा किए गए सभी निर्माण संबंधी विषयों की पूरी जानकारी दी गई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीईओ से इस विषय पर कोई अलग से बातचीत नहीं हुई थी — सभी सुझाव बैठक के भीतर ही सामने आए।

समिति अध्यक्ष ने कहा कि सीईओ के सुझावों पर बैठक में विधिवत विचार किया गया और उन्हें सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।

अग्रिम भुगतान और ब्याज वापसी का मुद्दा

राजकीय निर्माण निगम सहित अन्य एजेंसियों को किए गए अग्रिम भुगतानों का उल्लेख करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि सीईओ जीतेंद्र मिश्रा ने दो अहम सिफारिशें रखीं — पहली, अग्रिम राशि का समय पर उपयोग सुनिश्चित किया जाए; और दूसरी, यदि किसी एजेंसी ने धनराशि का पूर्ण उपयोग नहीं किया, तो उस अवधि में अर्जित ब्याज राम मंदिर ट्रस्ट को वापस किया जाए।

गौरतलब है कि बड़े बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में अग्रिम भुगतान का अनुपयोग एक सामान्य वित्तीय चुनौती रही है, और इस सुझाव को लागू करना ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

निर्माण की मौजूदा स्थिति

इससे पहले शुक्रवार को दिए गए एक अपडेट में नृपेंद्र मिश्रा ने बताया था कि मंदिर परिसर में कुल 150 निर्माण कार्यों में से 148 पूरे होकर ट्रस्ट को सौंपे जा चुके हैं। शेष कार्य — जिनमें मंदिर की बाहरी परिधि संरचना परकोटा प्रमुख है — 15 नवंबर तक पूर्ण होने की उम्मीद है।

निर्माण की ज़िम्मेदारी संभाल रही कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को प्रत्येक परियोजना के साथ संबंधित रिकॉर्ड, रेखाचित्र, डिज़ाइन और वित्तीय दस्तावेज़ ट्रस्ट को सौंपने हैं। ट्रस्ट के परियोजना इंजीनियर निरीक्षण के बाद ही किसी कार्य को औपचारिक रूप से स्वीकार करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय का निरीक्षण

शनिवार को नृपेंद्र मिश्रा ने अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय का निरीक्षण किया, जो राम मंदिर ट्रस्ट के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। इस संग्रहालय में भगवान राम के जीवन को दर्शाने वाली 20 गैलरी होंगी, जो इसे एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनाएंगी।

यह संग्रहालय अयोध्या को एक अंतरराष्ट्रीय तीर्थ और पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। परिसर में अभी भी बुनियादी ढाँचे, प्रकाश व्यवस्था और अंतिम सज्जा कार्य प्रगति पर हैं।

आगे क्या होगा

15 नवंबर 2024 की अंतिम तिथि के साथ, राम मंदिर परिसर का निर्माण अपने समापन चरण में है। परकोटा और शेष बुनियादी ढाँचे के पूरा होने के बाद ट्रस्ट परिसर के संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करेगा। वित्तीय अनुशासन और समय पर परियोजना हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए सीईओ के सुझावों का क्रियान्वयन इस अंतिम चरण की कुंजी माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन सिफारिशों का क्रियान्वयन कितनी तेज़ी से और पारदर्शी तरीके से होगा। बड़े धार्मिक-सार्वजनिक परियोजनाओं में वित्तीय जवाबदेही अक्सर घोषणाओं तक सीमित रह जाती है। परकोटा जैसे प्रमुख ढाँचे का अभी तक अधूरा रहना यह भी दर्शाता है कि समय-सीमाएँ बार-बार खिसकती रही हैं — 15 नवंबर की अंतिम तिथि इस कड़ी में कितनी निर्णायक साबित होगी, यह देखना बाकी है। राम कथा संग्रहालय की 20 गैलरी अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की महत्त्वाकांक्षा को दर्शाती हैं, परंतु इसके लिए संचालन और रखरखाव की दीर्घकालिक रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर सीईओ जीतेंद्र मिश्रा ने क्या सुझाव दिए?
सीईओ जीतेंद्र मिश्रा ने निर्माण समीक्षा बैठक में दो प्रमुख सुझाव दिए — निर्माण एजेंसियों को किए गए अग्रिम भुगतान का समय पर उपयोग सुनिश्चित किया जाए, और यदि राशि का पूर्ण उपयोग न हो तो उस पर अर्जित ब्याज राम मंदिर ट्रस्ट को वापस किया जाए। निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने इन सभी सुझावों को मान्य घोषित किया है।
राम मंदिर परिसर का निर्माण कब तक पूरा होगा?
राम मंदिर परिसर के 150 में से 148 निर्माण कार्य पहले ही पूरे होकर ट्रस्ट को सौंपे जा चुके हैं। शेष कार्य, जिनमें परकोटा (बाहरी परिधि संरचना) प्रमुख है, 15 नवंबर 2024 तक पूरे होने की उम्मीद है।
लार्सन एंड टुब्रो की राम मंदिर निर्माण में क्या भूमिका है?
लार्सन एंड टुब्रो (L&T) राम मंदिर के निर्माण कार्य की प्रमुख ज़िम्मेदार कंपनी है। वह प्रत्येक पूर्ण परियोजना के साथ संबंधित रिकॉर्ड, रेखाचित्र, डिज़ाइन और वित्तीय दस्तावेज़ ट्रस्ट को सौंपती है, जिसे ट्रस्ट के परियोजना इंजीनियर निरीक्षण के बाद स्वीकार करते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में क्या होगा?
राम मंदिर ट्रस्ट के अंतर्गत विकसित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में भगवान राम के जीवन को दर्शाने वाली 20 गैलरी होंगी। निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने शनिवार को इसका निरीक्षण किया।
राम मंदिर परकोटा क्या है और यह अभी तक क्यों अधूरा है?
परकोटा राम मंदिर परिसर की बाहरी परिधि संरचना (चारदीवारी) है, जो परिसर का एक प्रमुख स्थापत्य तत्व है। यह 150 निर्माण कार्यों में से उन दो शेष कार्यों में से एक है जिन्हें अभी ट्रस्ट को सौंपा जाना बाकी है और इसे 15 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है।
राष्ट्र प्रेस
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