राम मंदिर निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा: '15 अगस्त तक पूरा होगा निर्माण, ट्रस्ट का निर्णय सर्वोच्च'
सारांश
मुख्य बातें
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने 12 जुलाई को अयोध्या में मंदिर निर्माण की प्रगति पर अहम जानकारी साझा की और स्पष्ट किया कि 15 अगस्त तक समस्त निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने का अनुमान है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मंदिर प्रबंधन में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सर्वोच्चता अखंड है और उसका प्रत्येक निर्णय अंतिम माना जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
मिश्रा ने कहा कि मंदिर में श्रद्धालु ही केंद्र बिंदु हैं और व्यवस्था का प्रत्येक पहलू उनकी सुविधा को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि शनिवार और रविवार को भीड़ उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाती है। मिश्रा ने कहा, 'राम मंदिर हमारे विश्वास का एक केंद्र है।'
ट्रस्ट की सर्वोच्चता पर जोर
प्रशासनिक ढाँचे पर बोलते हुए मिश्रा ने स्पष्ट किया कि जनरल सेक्रेटरी को सीईओ से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए और व्यवस्था के पदानुक्रम को कोई भी बाधित नहीं कर रहा है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, 'ट्रस्ट ही अंतिम है और ट्रस्ट का निर्णय अंतिम है।' उनके अनुसार व्यवस्था में एक और कड़ी जोड़ी जा रही है, जो प्रबंधन को और सुदृढ़ करेगी।
चढ़ावा विवाद पर प्रतिक्रिया
हाल ही में सामने आए चढ़ावा विवाद पर मिश्रा ने कहा कि जिस प्रकार आम लोगों को इस मामले से पीड़ा हुई, उसी प्रकार उन्हें भी पीड़ा हुई। उन्होंने दान की विस्तृत जानकारी होने से इनकार किया और कहा कि उन्होंने केवल सामान्य जानकारी ली तथा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से सीधी बातचीत की। गौरतलब है कि यह विवाद मंदिर प्रबंधन के लिए एक संवेदनशील विषय बना हुआ है।
श्रद्धालुओं की आस्था अटूट
मिश्रा ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि श्रद्धालुओं के मन में मंदिर की व्यवस्था को लेकर कोई अविश्वास नहीं है। उनके अनुसार दर्शनार्थियों का एकमात्र लक्ष्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के दर्शन करना है और इस आस्था में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में भगवान राम की भक्ति ही सर्वोपरि है और इसी भावना से मंदिर का प्रबंधन हो रहा है।
आगे क्या
मिश्रा के अनुसार 15 अगस्त 2026 तक राम मंदिर का समस्त निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने का अनुमान है। सीईओ के पदभार संभालने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है। ट्रस्ट के नेतृत्व में मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं के लिए और अधिक सुगम बनाने की दिशा में कार्य जारी रहेगा।