राम मंदिर चढ़ावा विवाद: नृपेंद्र मिश्रा बोले — 'यह कलंक है, व्यवस्था में सुधार होगा'
सारांश
मुख्य बातें
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने 11 जुलाई को अयोध्या में पत्रकारों से बातचीत में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद को पूरे मंदिर परिवार के लिए 'बेहद पीड़ादायक' और एक प्रकार का 'कलंक' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रबंधन व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
चढ़ावा विवाद पर मिश्रा का बयान
मिश्रा ने बताया कि इस मामले में उनकी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी से विस्तृत चर्चा हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'राम मंदिर में जो घटना हुई है, वह अपने आप में एक तरह का कलंक है। इस घटना से हम सभी को केवल दुख ही नहीं, बल्कि एक छोटापन भी महसूस हो रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरी तरह व्यवस्था का विषय है और उन्हें विश्वास है कि सुधारों के बाद भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी।
निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति
मिश्रा ने बताया कि उन्होंने एक दिन पूर्व निर्माण स्थल का स्वयं निरीक्षण किया। उनके अनुसार मंदिर का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब मुख्य रूप से दो बड़े कार्य शेष हैं। पहला, पुराने मंदिर व उससे जुड़े स्मारक का कार्य — जहाँ 24 घंटे जलने वाली अखंड ज्योति की व्यवस्था की जानी है। दूसरा, स्मारक से संबंधित कार्य, जिसे जुलाई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है।
प्रमुख निर्माण की समय-सीमा
मिश्रा ने स्पष्ट किया कि 30 जुलाई तक राम मंदिर के सभी प्रमुख निर्माण कार्य पूरे हो जाएंगे। इसके बाद लगभग 4 किलोमीटर लंबी बाउंड्री वॉल का निर्माण जारी रहेगा, जिसे 30 सितंबर तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। मंदिर परिसर के बाहर बनने वाले ऑडिटोरियम का काम नवंबर-दिसंबर तक पूरा होने की संभावना है।
राम कथा संग्रहालय और तकनीकी तैयारी
राम कथा संग्रहालय की स्टोरी लाइन तैयार हो चुकी है। आधुनिक तकनीक और वीडियो प्रस्तुति के स्वरूप पर अंतिम निर्णय आगामी शनिवार और रविवार को होने वाली बैठकों में लिया जाएगा। निर्माण समिति की बैठकों में एलएंडटी, टीसीई, राजकीय निर्माण निगम, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड तथा अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। विवादों या महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय के लिए एक न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित है, जो अपनी सिफारिशें ट्रस्ट को सौंपती है।
श्रद्धालुओं की आस्था पर मिश्रा का संदेश
मिश्रा ने कहा कि रामलला का यह मंदिर पूरी दुनिया में अद्वितीय है क्योंकि यह लंबे आंदोलन के बाद उस स्थान पर बना है जहाँ भगवान श्री राम विराजमान हुए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सनातन धर्म का हर व्यक्ति जीवन में कम से कम एक बार यहाँ दर्शन करने अवश्य आएगा और श्रद्धालुओं की संख्या कभी कम नहीं होगी। चढ़ावा विवाद के बावजूद मंदिर प्रबंधन सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकल्प दोहरा रहा है।