10 अगस्त 2026
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 'कागभुसुंडि' गायब होने पर अखिलेश यादव बोले — एफआईआर बिना एसआईटी 'बिना तीर की कमान'

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 'कागभुसुंडि' गायब होने पर अखिलेश यादव बोले — एफआईआर बिना एसआईटी 'बिना तीर की कमान'

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में अखिलेश यादव ने 'कागभुसुंडि' गायब होने का नया मुद्दा उठाया और एफआईआर के बिना एसआईटी को 'बिना तीर की कमान' करार दिया। उन्होंने नेपाल सीमा बंद करने की भी मांग की ताकि आरोपी फरार न हो सकें।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 24 जून को एक्स पर लिखा कि एफआईआर के बिना एसआईटी 'बिना तीर की कमान' है।
दान में दी गई 'कागभुसुंडि' के गायब होने की खबर को उन्होंने 'निंदनीय' बताया।
सपा प्रमुख ने नेपाल और अन्य सीमाएँ बंद करने की मांग की ताकि आरोपी फरार न हों।
राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी बनाई थी — विजय विश्वास पंत , किरन एस और नीलरतन शामिल।
एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है; सरकार ने कहा — जांच अभी जारी है, अंतिम निर्णय बाकी।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार, 24 जून को अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के विवाद में एक नया आयाम जोड़ते हुए 'कागभुसुंडि' के गायब होने का मामला उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि बिना एफआईआर के गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) 'बिना तीर की कमान' के समान है — यानी इसका कोई कानूनी दंत नहीं है।

मुख्य आरोप और 'कागभुसुंडि' प्रकरण

अखिलेश यादव ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि दान में दिए गए 'कागभुसुंडि' के गायब हो जाने की खबर 'निंदनीय' है। 'कागभुसुंडि' एक धार्मिक-सांस्कृतिक वस्तु है जिसे श्रद्धालुओं ने मंदिर को भेंट किया था। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि हर दिन चढ़ावे, चंदे और दान से जुड़ी कथित चोरी के नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिससे सनातनी श्रद्धालुओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब खुलासे अभी हो ही रहे हैं, तो एसआईटी की जांच क्या हासिल कर लेगी — खासतौर पर तब जब यह जांच से ज्यादा 'ढांकने' या 'बांटने' के लिए बनी प्रतीत होती है।

नेपाल सीमा बंद करने की मांग

अखिलेश यादव ने यह भी मांग की कि नेपाल और अन्य सीमाओं को बंद कर दिया जाए, ताकि इस मामले के कथित आरोपी फरार न हो सकें। यह बयान राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जांच की गंभीरता और सरकार की मंशा पर सीधा सवाल उठाता है।

एसआईटी का गठन और अब तक की जांच

राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस और विशेष सचिव वित्त नीलरतन को शामिल किया गया।

जांच दल ने अयोध्या में विभिन्न पक्षों से पूछताछ की और संबंधित दस्तावेजों व वित्तीय अभिलेखों की गहन पड़ताल की। एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया अभी जारी है।

सरकार का रुख

राज्य सरकार ने कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर आगे भी तथ्यों की पड़ताल और संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी। अंतिम निर्णय जांच के सभी पहलुओं के परीक्षण के बाद लिया जाएगा। सरकार ने अब तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है — यही वह बिंदु है जिसे विपक्ष सबसे बड़ी कमजोरी बता रहा है।

आगे क्या होगा

यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में तेजी से केंद्रीय मुद्दा बनता जा रहा है। गौरतलब है कि राम मंदिर से जुड़े किसी भी विवाद का राजनीतिक और धार्मिक दोनों आयामों पर व्यापक असर होता है। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उस पर सरकार की कार्रवाई से तय होगा कि विपक्ष के आरोपों का क्या असर पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि बिना संज्ञेय अपराध दर्ज हुए गिरफ्तारी या चार्जशीट संभव नहीं। यह विपक्ष को एक ठोस प्रक्रियागत आधार देता है जो भावनात्मक आरोपों से कहीं अधिक टिकाऊ है। दूसरी ओर, सरकार के लिए यह दोधारी तलवार है — एफआईआर दर्ज करने से मंदिर प्रशासन पर सीधा आपराधिक दाग लगेगा, न दर्ज करने से विपक्ष का 'ढांकने' का आरोप मजबूत होगा। 'कागभुसुंडि' जैसी धार्मिक वस्तु के गायब होने का मुद्दा इस विवाद को आस्था और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों के स्तर पर एक साथ संवेदनशील बना देता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे, चंदे और दान राशि में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की, जिसने प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।
'कागभुसुंडि' क्या है और यह विवाद में क्यों आई?
'कागभुसुंडि' एक धार्मिक-सांस्कृतिक वस्तु है जिसे श्रद्धालुओं ने राम मंदिर को दान में दिया था। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि यह वस्तु गायब हो गई है, जिसे उन्होंने 'निंदनीय' बताया।
अखिलेश यादव ने एसआईटी को 'बिना तीर की कमान' क्यों कहा?
अखिलेश यादव का तर्क है कि बिना एफआईआर दर्ज किए गठित एसआईटी के पास कानूनी शक्ति नहीं है — वह न गिरफ्तारी कर सकती है, न चार्जशीट दाखिल कर सकती है। इसीलिए उन्होंने इसे 'बिना तीर की कमान' करार दिया।
राम मंदिर चढ़ावा एसआईटी में कौन शामिल हैं?
एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस और विशेष सचिव वित्त नीलरतन शामिल हैं। दल ने अयोध्या में पूछताछ और वित्तीय अभिलेखों की जांच के बाद प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सरकार ने कहा है कि जांच प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय सभी पहलुओं की जांच के बाद लिया जाएगा। एफआईआर दर्ज होगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है — और यही विपक्ष के हमले का केंद्रीय बिंदु बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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