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क्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को दो साल पूरे होने पर संजय कुमार ने कट्टरपंथियों और विरोधियों पर हमला किया?

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क्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को दो साल पूरे होने पर संजय कुमार ने कट्टरपंथियों और विरोधियों पर हमला किया?

सारांश

अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को दो साल पूरे होने पर कारसेवक संजय कुमार ने कट्टरपंथी और विरोधी मानसिकता पर प्रहार किया। उन्होंने इस दिन का महत्व और समस्याओं पर अपनी राय साझा की। जानें क्या कहा संजय ने?

मुख्य बातें

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का महत्व भारतीय संस्कृति में गहरा है।
संजय कुमार ने कट्टरपंथी मानसिकता की निंदा की।
रामलला को पुनः उनके स्थान पर लाना 500 वर्षों की मेहनत का परिणाम है।

जम्मू, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को दो साल पूरे हो चुके हैं। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद 22 जनवरी 2024 को पहली बार रामलला को उनका स्थान वापस मिला था।

इस विशेष दिन के लिए कई कारसेवकों ने अपने प्राणों की आहूति दी थी, और उन्हीं में से एक हैं संजय कुमार, जिन्होंने प्राण प्रतिष्ठा के 2 साल पूरे होने की खुशी में अपने आवास पर पूजा का आयोजन किया।

कारसेवक संजय कुमार ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से विवादित ढांचे, कट्टरपंथी और विरोधी मानसिकता वाले लोगों के बारे में खुलकर बात की।

'जब विवादित ढांचा गिरा था, तब आप कितने साल के थे और कैसा महसूस हुआ था?' के सवाल पर उन्होंने कहा, "1992 में जब विवादित ढांचा टूटा था, तब मैं 17 साल का था। मेरी आंखों के सामने विवादित ढांचा गिर गया और मैं खुद को खुशनसीब समझता हूं कि भगवान श्रीराम के इस कार्य में मैं बतौर कारसेवक शामिल था। यह मेरे लिए गर्व की बात है।"

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दो साल पूरे होने के बाद भारत में होने वाले बदलाव पर उन्होंने कहा, "आज का दिन सनातन और देश के लिए अद्भुत दिन है। आज के दिन ही दो साल पहले रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई। सनातन धर्म में इसे गौरव का दिन माना गया है, लेकिन आज भी कुछ लोगों की सनातन धर्म के प्रति जो मानसिकता है, वो ठीक नहीं है। सनातन धर्म विश्व का कल्याण चाहता है, लेकिन बाबर की मानसिकता आज भी कुछ लोगों के अंदर पनप रही है। बांग्लादेशी और रोहिंग्या की घुसपैठ देश के लिए खतरा बन सकती है। जैसे कि पश्चिम बंगाल के एक विधायक ने फिर से बाबरी मस्जिद का पत्थर रखा और बाबर की सोच को लोगों के दिमाग में भरने की कोशिश की।"

उन्होंने आगे कहा कि आपको मस्जिद बनानी है तो बनाओ, लेकिन उसे बाबरी मस्जिद से क्यों जोड़ना है? बाबर एक आक्रमणकारी था जिसने भारत में कई मंदिरों को तोड़ा, लेकिन उसी के नाम पर मस्जिद को दोबारा विस्थापित करने की मानसिकता सही नहीं है। जाति के नाम पर जहर फैलाने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इसके पीछे कुछ कट्टरपंथी और विरोधी मानसिकता वाले और घुसपैठिया लोग हैं जो भारत की शांति को भंग करना चाहते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय समाज में एकजुटता और देशभक्ति का प्रतीक भी है। हमें इस तथ्य को समझना होगा कि हर विचारधारा का सम्मान किया जाना चाहिए और हमें एक सकारात्मक संवाद की दिशा में बढ़ना चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का महत्व क्या है?
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा भारतीय संस्कृति और धार्मिकता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो 500 वर्षों के संघर्ष के बाद रामलला को उनका स्थान पुनः दिलाने का प्रतीक है।
संजय कुमार ने कट्टरपंथी मानसिकता के बारे में क्या कहा?
संजय कुमार ने कट्टरपंथी और विरोधी मानसिकता वाले लोगों की निंदा की और कहा कि यह मानसिकता भारत की शांति को भंग कर सकती है।
क्या राम मंदिर का निर्माण विवादित है?
राम मंदिर का निर्माण एक ऐतिहासिक और धार्मिक विवाद से जुड़ा हुआ है, लेकिन इसे भारतीय समाज के लिए गौरव का प्रतीक माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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