मतदाता सूची से मृत लोगों के नाम हटाना जरूरी: रामदास आठवले, ममता बनर्जी को संविधान-विरोधी बयानों से बचने की नसीहत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मतदाता सूची की शुद्धता, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार है, परंतु मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में बने रहना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए हानिकारक है।
मतदाता सूची की शुद्धता पर मंत्री का रुख
आठवले ने कहा कि अनेक बार किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज रहता है, जबकि कुछ मामलों में जीवित और पात्र मतदाताओं के नाम सूची से गायब पाए जाते हैं। उन्होंने कहा, 'मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना अनिवार्य है — मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाने चाहिए और जीवित तथा पात्र नागरिकों के नाम सुनिश्चित किए जाने चाहिए।'
गौरतलब है कि मतदाता सूची में अनियमितताओं का मुद्दा देशभर में विभिन्न विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले बार-बार उठता रहा है। चुनाव आयोग की ओर से समय-समय पर विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान भी चलाए जाते हैं, फिर भी यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है।
ममता बनर्जी को आठवले की दो-टूक नसीहत
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया के विरुद्ध बयान देने से बचना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि जब ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री थीं, तब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों को राज्य में प्रवेश करने से रोकने की कथित कोशिश की गई थी।
आठवले ने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता का समर्थन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ है और ममता बनर्जी के बयानों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं को कानून और संविधान के दायरे में रहकर काम करना चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उठे सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर आठवले ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति और राजनीतिक दल को अपना पक्ष रखने का अधिकार है। यदि किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं, तो संबंधित मामलों की जांच की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार यह देखेगी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है। उनके अनुसार, किसी भी मामले में तथ्यों और संवैधानिक प्रक्रिया के आधार पर ही आगे बढ़ना उचित है।
राजनीतिक विवाद और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता
यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को लेकर बहस तेज हुई है। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर राजनीतिक टिप्पणियाँ चुनावी प्रक्रिया में जनविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।
आठवले ने इस पर स्पष्ट किया कि इन मुद्दों पर अनावश्यक राजनीतिक विवाद उचित नहीं है और सभी प्रक्रियाएं संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत ही आगे बढ़नी चाहिए। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े आरोपों की जांच किस दिशा में ले जाती है।