रांची: CIP छात्रावास में MPhil छात्र पर दुष्कर्म का आरोप, कांके पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की
सारांश
मुख्य बातें
रांची के कांके थाना क्षेत्र में स्थित केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP) में नैदानिक मनोविज्ञान की एक प्रशिक्षु छात्रा ने 5 अक्टूबर 2026 को दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता की शिकायत के आधार पर कांके थाना पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी की पहचान संस्थान के स्नातकोत्तर छात्रावास में रहने वाले MPhil छात्र सार्थक चौधरी के रूप में की गई है।
घटना का विवरण
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़िता CIP में नैदानिक मनोविज्ञान की प्रशिक्षु के तौर पर कार्यरत थीं और संस्थान के स्नातकोत्तर छात्रावास में रह रही थीं। आरोपी सार्थक चौधरी भी उसी छात्रावास के कमरा संख्या 54 में रहता था।
शिकायत के मुताबिक, 28 जून की रात करीब 10 बजे पीड़िता मनोवैज्ञानिक परीक्षण से जुड़े अभ्यास और पढ़ाई के सिलसिले में आरोपी के कमरे में गई थीं — जो छात्रावास के नियमों के तहत अनुमन्य था।
आरोपों का ब्योरा
पीड़िता का आरोप है कि कुछ देर पढ़ाई के बाद उन्हें अचानक चक्कर आने लगे, जिसके बाद आरोपी ने अपनी स्टील की बोतल से पानी पीने का बार-बार आग्रह किया। शिकायत में कहा गया है कि पहले हिचकिचाहट जताने के बाद पीड़िता ने आग्रह पर पानी पिया, जिसके बाद तबीयत और बिगड़ती चली गई।
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता को बिस्तर पर आराम करने की सलाह दी। पीड़िता का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया और कमरे से बाहर जाने की कोशिश की, तब आरोपी ने उनके साथ दुष्कर्म किया। यह आरोप अभी जांच के दायरे में है और पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलने पर कांके थाना पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस पीड़िता के बयान, घटनास्थल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। आरोपी छात्र से भी पूछताछ की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
संस्थान और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP), रांची देश के प्रतिष्ठित मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में से एक है, जहाँ देशभर से विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए आते हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर बहस तेज़ है।
आलोचकों का कहना है कि छात्रावासों में लैंगिक सुरक्षा प्रोटोकॉल और आंतरिक शिकायत समितियों (ICC) की सक्रियता सुनिश्चित करना संस्थानों की जिम्मेदारी है। संस्थान प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे की राह
जांच एजेंसियाँ मामले की पूरी जांच कर रही हैं। पुलिस के अनुसार, सभी साक्ष्य और बयानों की जांच के बाद कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण तय किए जाएँगे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए झारखंड सरकार और संस्थान प्रशासन पर भी निगाहें टिकी हैं।