रास लाफान गैस संयंत्र विस्फोट में 12 भारतीयों की मौत, विदेश मंत्रालय परिजनों के संपर्क में
सारांश
मुख्य बातें
कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित गैस संयंत्र में हुए भीषण विस्फोट में 12 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है। विदेश मंत्रालय ने 23 जून 2026 को पुष्टि की कि भारत सरकार मृतकों के परिजनों के संपर्क में है और पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने के लिए कतर के स्थानीय अधिकारियों से समन्वय किया जा रहा है। यह हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुई एक औद्योगिक दुर्घटना बताई जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "12 भारतीय नागरिकों की मौत बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इस हादसे में कई अन्य देशों के लोगों की भी मौत हुई, लेकिन रास लाफान में हुए धमाके में हमारे देश के 12 लोगों की जान चली गई। कई अन्य लोग घायल भी हुए हैं।"
जायसवाल ने आगे बताया कि इस दुर्घटना में अलग-अलग देशों के लगभग 66 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा, "हमें ठीक-ठीक नहीं पता कि उनमें से कितने भारतीय नागरिक हैं, लेकिन घायल हुए सभी लोग सुरक्षित हैं।"
विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "रास लाफान में हुए विस्फोट में भारतीय नागरिकों सहित कई लोगों की मौत और घायल होने की खबर से अत्यंत दुखी हूं।" यह बयान इस बात का संकेत है कि भारत सरकार इस मामले को उच्च प्राथमिकता पर ले रही है।
कतर एनर्जी और स्थानीय अधिकारियों का बयान
कतर एनर्जी के अनुसार, इस हादसे में कुल 13 लोगों की मौत हुई है, जिनमें भारतीय और पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं। घायलों में कतर, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, केन्या, घाना, तंजानिया, नाइजीरिया और नेपाल के नागरिक शामिल बताए गए हैं।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह घटना एक तकनीकी खराबी के कारण हुई औद्योगिक दुर्घटना थी। कतर के गृह मंत्रालय ने भी प्रारंभिक जांच के हवाले से कहा कि विस्फोट संचालन के दौरान तकनीकी गड़बड़ी से हुआ और यह भी पुष्टि की कि किसी भी प्रकार का गैस रिसाव नहीं हुआ जो आसपास के क्षेत्र के लिए खतरा बने।
राहत और बचाव कार्य
अधिकारियों के अनुसार, आपातकालीन सेवाओं ने घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। फिलहाल आगे की जांच जारी है। गौरतलब है कि रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी कतर का प्रमुख ऊर्जा और औद्योगिक केंद्र है, जहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय कार्यरत हैं।
आगे क्या होगा
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पार्थिव शरीर की पहचान और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया स्थानीय अधिकारियों के सहयोग से जारी है। मृतकों के परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया गया है। यह हादसा खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।