रास लफ्फान हादसा: सभी 12 भारतीय पीड़ितों के शव स्वदेश भेजे, राजदूत ने घायलों से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने 27 जून 2026 को पुष्टि की कि कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए भीषण औद्योगिक हादसे में जान गंवाने वाले सभी 12 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर भारत भेज दिए गए हैं। दूतावास के अधिकारियों ने अल खोर के अस्पताल में भर्ती घायल भारतीय कामगारों से भी मुलाकात की और उनकी चिकित्सा स्थिति का जायज़ा लिया।
शवों की वापसी की प्रक्रिया
भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी अपने आधिकारिक बयान में बताया कि 25 जून को पहले चार पार्थिव शरीर भारत रवाना किए गए, और 26 जून को शेष आठ शव स्वदेश भेजे गए। इस प्रकार कुल 12 मृतकों के पार्थिव शरीर उनके परिजनों तक पहुँचा दिए गए हैं।
दूतावास ने कहा, 'भारतीय दूतावास, दोहा कतर के अधिकारियों, भारतीय सामुदायिक संगठनों और भारत में सरकारी अधिकारियों को उनके त्वरित सहयोग के लिए धन्यवाद देता है।' शवों को स्वदेश भेजने की यह पूरी प्रक्रिया भारत और कतर सरकारों के संयुक्त प्रयासों से सम्पन्न हुई।
घायलों की स्थिति और दूतावास की निगरानी
दूतावास के अनुसार, राजदूत और वरिष्ठ अधिकारियों ने अल खोर के अस्पताल में भर्ती घायल भारतीय नागरिकों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। दूतावास ने बताया कि सभी घायलों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है और उनकी देखभाल के लिए कतर के अधिकारियों तथा नियोक्ता कंपनी के प्रतिनिधि सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।
हादसे की पृष्ठभूमि
कतर के गृह मंत्रालय के अनुसार, 21 जून 2026 की शाम रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी में स्थित बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में स्टार्ट-अप ऑपरेशन के दौरान तकनीकी खराबी के कारण विस्फोट हुआ और आग भड़क उठी। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हुई और 66 अन्य घायल हुए। कतर ऊर्जा मंत्रालय ने एक्स पर जारी बयान में इस घटना को 'ऑपरेशनल घटना' करार दिया।
गौरतलब है कि रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी कतर का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र है, जहाँ बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी कामगार कार्यरत हैं। यह हादसा खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा के सवाल को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।
प्रधानमंत्री मोदी और कतर अमीर के बीच संवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी के फोन कॉल और संवेदना के लिए आभार व्यक्त किया। मोदी ने कहा, 'मैं कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दुखद हादसे में भारतीय नागरिकों की मौत पर उनके फोन कॉल और संवेदना के लिए कतर के अमीर को धन्यवाद देता हूँ। हम दोनों उन परिवारों के दुख में शामिल हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है और घायलों के जल्दी ठीक होने की प्रार्थना करते हैं।'
प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत और कतर अपने नागरिकों की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करने तथा कठिन समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता पर कायम हैं।
आगे क्या होगा
सभी पार्थिव शरीरों की स्वदेश वापसी के बाद अब ध्यान घायल कामगारों के पुनर्वास और हादसे की जाँच पर केंद्रित हो गया है। भारतीय दूतावास घायलों की स्थिति पर निरंतर नज़र बनाए हुए है। खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय प्रवासी कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएँगे, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।