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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने झारखंड की कलावती-दिलीप को दी यादगार दीपावली, नौ साल पुराना रिश्ता जीवंत

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने झारखंड की कलावती-दिलीप को दी यादगार दीपावली, नौ साल पुराना रिश्ता जीवंत

सारांश

नौ साल पहले एक राज्यपाल की एक छोटी-सी पहल ने जो रिश्ता बनाया था, वह आज राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा। द्रौपदी मुर्मु ने झारखंड की कलावती और दिलीप मुंडा को दीपावली पर बुलाकर साबित किया कि सर्वोच्च पद भी इंसानी गर्माहट को नहीं बुझा सकता।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दीपावली से पहले कलावती मुंडा और बेटे दिलीप मुंडा को राष्ट्रपति भवन में विशेष रूप से आमंत्रित किया।
दोनों झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा से हैं; उनके साथ प्रखंड विकास पदाधिकारी डांगुर कोड़ाह भी गए।
यह रिश्ता 2017 में शुरू हुआ जब मुर्मु झारखंड की राज्यपाल थीं और उन्होंने दिलीप की शिक्षा व परवरिश की जिम्मेदारी उठाई थी।
राष्ट्रपति भवन की ओर से माँ-बेटे को कपड़े और आर्थिक सहायता उपहार में दी गई।
कलावती बोलने और सुनने में असमर्थ हैं और पहले गंभीर हिंसा तथा आर्थिक संकट से गुज़री थीं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस दीपावली से पहले झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा की कलावती मुंडा और उनके बेटे दिलीप मुंडा को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में विशेष रूप से आमंत्रित किया — एक ऐसे रिश्ते की नई कड़ी, जो करीब नौ साल पहले एक राज्यपाल की मानवीय पहल से शुरू हुआ था। इस मुलाकात ने मां-बेटे के लिए दीपावली को एक अविस्मरणीय अनुभव में बदल दिया।

नौ साल पुराने रिश्ते की पृष्ठभूमि

वर्ष 2017 में द्रौपदी मुर्मु झारखंड की राज्यपाल थीं। उस दौरान कलावती मुंडा अत्यंत कठिन परिस्थितियों से गुज़र रही थीं। वह बोलने और सुनने में असमर्थ हैं, और एक गंभीर हिंसा की घटना ने उनके जीवन को और मुश्किल बना दिया था। आर्थिक तंगी के बीच अपने बेटे दिलीप की परवरिश उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी।

जब यह पीड़ा तत्कालीन राज्यपाल मुर्मु तक पहुंची, तो उन्होंने मां-बेटे को राजभवन बुलाया और दिलीप की शिक्षा तथा परवरिश की जिम्मेदारी उठाई। इस पहल ने एक असहाय माँ को सहारा दिया और एक बच्चे के बेहतर भविष्य की उम्मीद जगाई।

राष्ट्रपति भवन में आत्मीय स्वागत

गुड़ाबांदा के प्रखंड विकास पदाधिकारी डांगुर कोड़ाह माँ-बेटे को लेकर नई दिल्ली पहुंचे। राष्ट्रपति भवन में उनका आत्मीय स्वागत किया गया, परिसर का भ्रमण कराया गया और राष्ट्रपति मुर्मु ने स्वयं उनसे मुलाकात कर हालचाल पूछा। राष्ट्रपति भवन की ओर से दोनों को दीपावली के उपहार के रूप में कपड़े और आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

इसके बाद सरकारी वाहन से उन्हें दिल्ली के प्रमुख स्थानों का भ्रमण भी कराया गया। एक छोटे से गाँव से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के आवास तक का यह सफ़र मां-बेटे के लिए किसी सपने के सच होने जैसा रहा।

रिश्ते की गर्माहट अब भी बरकरार

द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्रपति बनने के बाद भी कलावती और दिलीप के साथ उनका जुड़ाव टूटा नहीं। यह आमंत्रण उसी निरंतरता की गवाही देता है। गौरतलब है कि यह संबंध किसी औपचारिक नीति का हिस्सा नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत मानवीय पहल का परिणाम है जो राजनीतिक पद बदलने के बावजूद जीवित रही।

कलावती और दिलीप के लिए इस दीपावली का सबसे बड़ा उपहार कपड़े और आर्थिक सहायता से कहीं बढ़कर वह अपनापन था, जिसने नौ वर्षों की दूरी के बाद भी उन्हें भुलाया नहीं।

आम जनता पर संदेश

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब संवेदनशील नेतृत्व और जमीनी जुड़ाव की चर्चा अक्सर प्रतीकात्मक रह जाती है। राष्ट्रपति का यह कदम दर्शाता है कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहते हुए भी व्यक्तिगत मानवीय संबंध निभाए जा सकते हैं। झारखंड के आदिवासी समुदाय से आने वाले इस परिवार की यह कहानी व्यापक सामाजिक संवेदना का प्रतीक बनी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्यक्ति से जुड़ती है। लेकिन यह कहानी एक असुविधाजनक सवाल भी उठाती है: झारखंड के आदिवासी बहुल जिलों में कलावती जैसी कितनी महिलाएं हैं जिनतक कोई 'राज्यपाल की नज़र' कभी नहीं पहुंची? एकल मानवीय पहल की सराहना जरूरी है, लेकिन यह व्यवस्थागत कमियों का विकल्प नहीं बन सकती। असली परीक्षा यह है कि क्या ऐसी संवेदनशीलता को नीतिगत ढाँचे में ढाला जाएगा।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और कलावती मुंडा के बीच रिश्ता कैसे बना?
यह रिश्ता 2017 में बना जब द्रौपदी मुर्मु झारखंड की राज्यपाल थीं। उन्होंने आर्थिक तंगी और हिंसा से पीड़ित कलावती मुंडा को राजभवन बुलाया और उनके बेटे दिलीप की शिक्षा व परवरिश की जिम्मेदारी उठाई।
कलावती और दिलीप मुंडा को राष्ट्रपति भवन में क्या मिला?
राष्ट्रपति भवन की ओर से उन्हें दीपावली के उपहार के रूप में कपड़े और आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं उनसे मुलाकात की और सरकारी वाहन से दिल्ली के प्रमुख स्थानों का भ्रमण भी कराया गया।
कलावती मुंडा कौन हैं और वे कहाँ से हैं?
कलावती मुंडा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा की रहने वाली हैं। वह बोलने और सुनने में असमर्थ हैं और पूर्व में गंभीर हिंसा तथा आर्थिक संकट से गुज़री हैं।
इस बार माँ-बेटे को दिल्ली कौन लेकर गया?
गुड़ाबांदा के प्रखंड विकास पदाधिकारी डांगुर कोड़ाह माँ-बेटे को लेकर नई दिल्ली पहुंचे और राष्ट्रपति भवन में उनके साथ रहे।
क्या राष्ट्रपति बनने के बाद भी मुर्मु का यह रिश्ता बना रहा?
हाँ, द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्रपति बनने के बाद भी कलावती और दिलीप के साथ उनका जुड़ाव बना हुआ है। दीपावली से पहले राष्ट्रपति भवन से मिला यह विशेष आमंत्रण उसी निरंतर रिश्ते की नई कड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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