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रेटिनोब्लास्टोमा: बच्चों की आंखों में ये 2 संकेत दिखें तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास, WHO ने किया सचेत

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रेटिनोब्लास्टोमा: बच्चों की आंखों में ये 2 संकेत दिखें तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास, WHO ने किया सचेत

सारांश

WHO के पूर्वी भूमध्यसागरीय कार्यालय ने बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा के दो शुरुआती संकेतों — पुतली में सफेद चमक और आँख का एक दिशा में मुड़ना — को लेकर माता-पिता को आगाह किया है। तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों में पाए जाने वाले इस दुर्लभ आँख के कैंसर का समय पर उपचार होने पर ठीक होने की दर 95% से अधिक बताई गई है।

मुख्य बातें

WHO के पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रीय कार्यालय ने बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा (आँख का कैंसर) को लेकर माता-पिता को सचेत किया है।
पहला संकेत: आँख की पुतली में सफेद चमक (व्हाइट पुपिल रिफ्लेक्स) — फ्लैश या तेज़ रोशनी में लाल की जगह सफेद रंग दिखना।
दूसरा संकेत: स्ट्रैबिस्मस — आँख का बार-बार एक दिशा में मुड़ना, जिसे 'लेज़ी आई' समझने की गलती न करें।
यह बीमारी मुख्यतः 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों में पाई जाती है; कारण RB1 जीन में उत्परिवर्तन है।
समय पर पहचान और उपचार से कुछ देशों में ठीक होने की दर 95 प्रतिशत से अधिक बताई गई है।
संकेत दिखते ही नेत्र रोग विशेषज्ञ या बाल रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेने की सलाह दी गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रीय कार्यालय ने बच्चों में होने वाले आँख के कैंसर रेटिनोब्लास्टोमा को लेकर माता-पिता और देखभालकर्ताओं को सचेत किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी के दो प्रमुख शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान से उपचार की सफलता दर कुछ देशों में 95 प्रतिशत से अधिक तक पहुँच जाती है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब बाल-स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि बच्चों की आँखों से जुड़े असामान्य संकेतों को कभी भी 'सामान्य' मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

रेटिनोब्लास्टोमा क्या है

रेटिनोब्लास्टोमा आँख के पीछे मौजूद रेटिना में विकसित होने वाला एक दुर्लभ लेकिन गंभीर प्रकार का कैंसर है। यह बीमारी मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करती है और अधिकांश मामले तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों में देखे जाते हैं। यह कैंसर एक आँख में भी हो सकता है और दोनों आँखों में भी।

इसके विकास में RB1 जीन में होने वाला बदलाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ मामलों में यह आनुवंशिक (वंशानुगत) होता है, जबकि कई मामलों में यह उत्परिवर्तन अपने आप विकसित होता है।

दो प्रमुख चेतावनी संकेत जिन्हें न करें नज़रअंदाज़

पहला और सबसे महत्वपूर्ण संकेत है — आँख की पुतली में असामान्य सफेद चमक। सामान्यतः कैमरे की फ्लैश या तेज़ रोशनी में आँखों में लाल रंग की चमक दिखाई देती है। लेकिन यदि बच्चे की एक या दोनों आँखों की पुतली में लाल की जगह सफेद रंग की चमक बार-बार दिखाई दे, तो इसे सामान्य न मानें। यह लक्षण 'व्हाइट पुपिल रिफ्लेक्स' कहलाता है और तत्काल नेत्र जाँच की माँग करता है।

दूसरा संकेत है — आँख का एक दिशा में बार-बार मुड़ना, जिसे चिकित्सकीय भाषा में स्ट्रैबिस्मस कहते हैं। यदि बच्चा सामने देखते समय एक आँख को अंदर या बाहर की ओर घुमाता है, तो कई माता-पिता इसे 'लेज़ी आई' समझ लेते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ मामलों में यह रेटिनोब्लास्टोमा का संकेत भी हो सकता है, इसलिए इसे हल्के में लेना उचित नहीं।

समय पर उपचार क्यों है ज़रूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रेटिनोब्लास्टोमा की शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर बच्चे के उपचार की संभावनाएँ बहुत बेहतर होती हैं। कुछ विकसित देशों में यह दर 95 प्रतिशत से अधिक बताई गई है। देरी से पहचान होने पर कैंसर फैलने का खतरा बढ़ जाता है, जो उपचार को अधिक जटिल और कम प्रभावी बना देता है। गौरतलब है कि समय पर हस्तक्षेप से न केवल बच्चे की जान बचाई जा सकती है, बल्कि दृष्टि को भी काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

माता-पिता क्या करें

बच्चे की आँखों में कोई भी असामान्य बदलाव दिखने पर घरेलू उपायों या 'देखते हैं' की प्रवृत्ति से बचें। नेत्र रोग विशेषज्ञ (ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट) या बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) से जल्द से जल्द परामर्श लें। WHO की चेतावनी यह भी रेखांकित करती है कि माता-पिता और देखभालकर्ताओं की सतर्कता ही इस बीमारी की सबसे पहली और सबसे प्रभावी रक्षापंक्ति है।

आगे क्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों की नियमित नेत्र जाँच को बाल-स्वास्थ्य दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए। WHO की यह सलाह भारत सहित उन देशों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है जहाँ बाल नेत्र-जाँच की सुविधाएँ अभी भी शहरों तक सीमित हैं। जागरूकता बढ़ने से इस दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी का समय पर निदान सुनिश्चित किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली चुनौती जागरूकता को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने में है — खासकर भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जहाँ बाल नेत्र-जाँच सुविधाएँ अभी भी दुर्लभ हैं। '95% ठीक होने की दर' का आँकड़ा विकसित देशों के संदर्भ में है; निम्न और मध्यम आय वाले देशों में यह दर काफी कम हो जाती है, मुख्यतः देरी से निदान के कारण। भारत में बाल-स्वास्थ्य कार्यक्रमों में नेत्र जाँच को अनिवार्य रूप से शामिल न किए जाने की खामी पर यह रिपोर्ट एक ज़रूरी सवाल खड़ा करती है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेटिनोब्लास्टोमा क्या होता है और यह किन बच्चों को होता है?
रेटिनोब्लास्टोमा आँख की रेटिना में विकसित होने वाला एक दुर्लभ लेकिन गंभीर कैंसर है, जो मुख्यतः 3 वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चों को प्रभावित करता है। यह एक या दोनों आँखों में हो सकता है और इसका संबंध RB1 जीन में उत्परिवर्तन से है।
रेटिनोब्लास्टोमा के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
दो प्रमुख शुरुआती संकेत हैं — पहला, आँख की पुतली में फ्लैश या तेज़ रोशनी में लाल की जगह सफेद चमक दिखना (व्हाइट पुपिल रिफ्लेक्स); दूसरा, आँख का बार-बार एक दिशा में मुड़ना (स्ट्रैबिस्मस)। WHO ने इन दोनों संकेतों को लेकर माता-पिता को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
क्या रेटिनोब्लास्टोमा का इलाज संभव है?
हाँ, समय पर पहचान और उपचार होने पर कुछ देशों में ठीक होने की दर 95 प्रतिशत से अधिक बताई गई है। इसीलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहद ज़रूरी है।
WHO ने इस बारे में क्यों और कब आगाह किया?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रीय कार्यालय ने रेटिनोब्लास्टोमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह चेतावनी जारी की है। संगठन का मानना है कि माता-पिता और देखभालकर्ताओं की सतर्कता ही इस बीमारी की सबसे पहली रक्षापंक्ति है।
माता-पिता को क्या करना चाहिए अगर ये लक्षण दिखें?
यदि बच्चे की आँखों में पुतली की सफेद चमक या आँख का टेढ़ापन दिखे, तो घरेलू उपायों या प्रतीक्षा किए बिना तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ (ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट) या बाल रोग विशेषज्ञ से जाँच कराएँ। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 3 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की नियमित नेत्र जाँच बाल-स्वास्थ्य दिनचर्या का हिस्सा होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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