रेटिनोब्लास्टोमा इलाज में भारत का मॉडल वैश्विक मिसाल: नीति आयोग के एम. श्रीनिवास

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रेटिनोब्लास्टोमा इलाज में भारत का मॉडल वैश्विक मिसाल: नीति आयोग के एम. श्रीनिवास

सारांश

भारत ने रेटिनोब्लास्टोमा — बचपन के नेत्र कैंसर — के इलाज तक लगभग सार्वभौमिक पहुँच हासिल कर एक वैश्विक मिसाल कायम की है। 90 से अधिक उपचार केंद्रों के नेटवर्क और बहु-हितधारक सहयोग के बल पर, भारत अब इस दुर्लभ बीमारी में दुनिया को राह दिखा रहा है।

मुख्य बातें

नीति आयोग के सदस्य एम.
श्रीनिवास ने 16 मई 2026 को भारत के रेटिनोब्लास्टोमा इलाज मॉडल को वैश्विक स्तर पर अनुकरणीय बताया।
भारत में प्रतिवर्ष 1,500–2,000 रेटिनोब्लास्टोमा के नए मामले सामने आते हैं — विश्व में सर्वाधिक।
फाइट रेटिनोब्लास्टोमा इंडिया ने पिछले एक दशक में 90 से अधिक उपचार केंद्रों का नेटवर्क तैयार किया।
विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय रेटिनोब्लास्टोमा कार्यक्रम शुरू करने और तृतीयक केंद्रों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया।
चिकित्सकों ने NHA से महंगे उपचारों की पैकेज दरें बढ़ाने और कीमोथेरेपी दवाओं पर जीएसटी छूट की माँग की।
लक्ष्य: 80–90% उत्तरजीविता दर और 100% वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) एम. श्रीनिवास ने 16 मई 2026 को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित राष्ट्रीय रेटिनोब्लास्टोमा सम्मेलन में कहा कि भारत ने बचपन के नेत्र कैंसर — रेटिनोब्लास्टोमा — के इलाज तक लगभग सार्वभौमिक पहुँच हासिल कर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिसे दुनिया अपना सकती है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए सभी हितधारकों को बधाई दी और इसे सीमित संसाधनों में भी सहयोगात्मक स्वास्थ्य प्रणाली की सफलता का प्रमाण बताया।

सम्मेलन में क्या हुआ

मुख्य अतिथि के रूप में अपने वीडियो संदेश में श्रीनिवास ने फाइट रेटिनोब्लास्टोमा इंडिया को 'रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा के लिए हितधारकों के सहयोग का एक उल्लेखनीय मॉडल' बताया। उन्होंने कहा कि भारत यह साबित कर रहा है कि सहयोगात्मक और रोगी-केंद्रित प्रणालियाँ सीमित संसाधनों वाले परिवेश में भी बचपन के कैंसर के इलाज को संभव बना सकती हैं।

भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के निदेशक डॉ. पंकज अरोरा ने कहा कि रेटिनोब्लास्टोमा के इलाज तक पहुँच में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने अगले लक्ष्य के रूप में हर बच्चे और परिवार के लिए शत-प्रतिशत वित्तीय सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर उत्तरजीविता परिणामों को बेहतर बनाने की बात कही।

विशेषज्ञों की राय और सुझाव

आईसीएमआर की केंद्रीय मानव अनुसंधान नीति समिति की सदस्य, कैनकिड्स की संस्थापक और चाइल्डहुड कैंसर इंटरनेशनल की डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की प्रतिनिधि पूनम बागई ने कहा, 'रेटिनोब्लास्टोमा ने हमें दिखाया है कि जब चिकित्सक, जीवित बचे लोग, माता-पिता, शोधकर्ता, सरकार, अस्पताल और नागरिक समाज बच्चे और परिवार को केंद्र में रखकर मिलकर काम करते हैं तो क्या संभव है। भारत रेटिनोब्लास्टोमा से लड़ रहा है — और हम जीत रहे हैं।'

उन्होंने 80–90 प्रतिशत उत्तरजीविता दर और 100 प्रतिशत वित्तीय सुरक्षा के उद्देश्य से राष्ट्रीय रेटिनोब्लास्टोमा हेल्पडेस्क और विशेषज्ञ नेटवर्क के गठन के प्रस्ताव का समर्थन किया। हैदराबाद के著名 नेत्र ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. संतोष होनावर ने सुझाव दिया कि सरकार बेहतर परिणामों के लिए राष्ट्रीय रेटिनोब्लास्टोमा कार्यक्रम शुरू करने और तृतीयक उपचार केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर सकती है।

वित्तीय सुरक्षा और नीतिगत माँगें

सम्मेलन में उपस्थित चिकित्सकों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण से इंट्रा-आर्टेरियल कीमोथेरेपी, इंट्रा-विट्रियल कीमोथेरेपी और ब्रैकीथेरेपी जैसे महंगे उपचारों के लिए पैकेज दरों में वृद्धि की अपील की। कुछ वक्ताओं ने उच्च लागत वाले निदान और उपचार उपकरणों पर आयात शुल्क से छूट और वित्त मंत्रालय से कीमोथेरेपी दवाओं पर जीएसटी छूट देने का अनुरोध भी किया।

रेटिनोब्लास्टोमा: भारत की स्थिति

रेटिनोब्लास्टोमा एक दुर्लभ किंतु उपचार-योग्य नेत्र कैंसर है जो मुख्यतः छोटे बच्चों को प्रभावित करता है। दृष्टि बचाने के लिए शीघ्र निदान और समय पर उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1,500–2,000 नए मामले सामने आते हैं, जो इसे विश्व में सर्वाधिक प्रभावित देशों में से एक बनाता है।

पिछले एक दशक में कैनकिड्स द्वारा संचालित फाइट रेटिनोब्लास्टोमा इंडिया ने 90 से अधिक उपचार केंद्रों का सहयोगी नेटवर्क तैयार किया है। इस पहल के अंतर्गत बाल चिकित्सा ऑन्कोलॉजी और नेत्र ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञता को एकीकृत किया गया है, जिससे निदान, रेफरल, उपचार और देखभाल की निरंतरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब वैश्विक स्तर पर बचपन के कैंसर के लिए संसाधन-सीमित देशों में प्रभावी मॉडलों की माँग बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है — 1,500–2,000 वार्षिक मामलों में से कितने बच्चों को वास्तव में समय पर, गुणवत्तापूर्ण और वित्तीय बोझ-मुक्त इलाज मिल रहा है, इसका कोई सत्यापन-योग्य राष्ट्रीय डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। 90 उपचार केंद्रों का नेटवर्क प्रभावशाली है, किंतु ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पहुँच की खाई पर सम्मेलन में कोई ठोस आँकड़ा सामने नहीं आया। जब तक राष्ट्रीय रेटिनोब्लास्टोमा कार्यक्रम के साथ पारदर्शी निगरानी तंत्र नहीं बनता, 'वैश्विक मॉडल' का दावा प्रेरणादायक तो है, पर अधूरा है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेटिनोब्लास्टोमा क्या है और यह किसे प्रभावित करता है?
रेटिनोब्लास्टोमा एक दुर्लभ किंतु उपचार-योग्य नेत्र कैंसर है जो मुख्यतः छोटे बच्चों की आँख की रेटिना में विकसित होता है। शीघ्र निदान होने पर दृष्टि और जीवन दोनों बचाए जा सकते हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1,500–2,000 नए मामले सामने आते हैं।
भारत का रेटिनोब्लास्टोमा मॉडल वैश्विक स्तर पर क्यों अनुकरणीय माना जा रहा है?
नीति आयोग के सदस्य एम. श्रीनिवास के अनुसार, भारत ने सीमित संसाधनों में सहयोगात्मक, रोगी-केंद्रित प्रणाली के ज़रिये इलाज की लगभग सार्वभौमिक पहुँच हासिल की है। फाइट रेटिनोब्लास्टोमा इंडिया द्वारा निर्मित 90 से अधिक उपचार केंद्रों के नेटवर्क को इस सफलता का मुख्य आधार माना जाता है।
राष्ट्रीय रेटिनोब्लास्टोमा कार्यक्रम का प्रस्ताव क्या है?
हैदराबाद के डॉ. संतोष होनावर ने सुझाव दिया कि सरकार एक समर्पित राष्ट्रीय रेटिनोब्लास्टोमा कार्यक्रम शुरू करे और तृतीयक उपचार केंद्रों की संख्या बढ़ाए। इसके साथ राष्ट्रीय हेल्पडेस्क और विशेषज्ञ नेटवर्क के गठन का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिसका लक्ष्य 80–90% उत्तरजीविता दर और 100% वित्तीय सुरक्षा है।
सम्मेलन में चिकित्सकों ने सरकार से क्या माँगें रखीं?
चिकित्सकों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण से इंट्रा-आर्टेरियल कीमोथेरेपी, इंट्रा-विट्रियल कीमोथेरेपी और ब्रैकीथेरेपी की पैकेज दरें बढ़ाने की अपील की। इसके अलावा उच्च लागत वाले उपकरणों पर आयात शुल्क और कीमोथेरेपी दवाओं पर जीएसटी से छूट देने का अनुरोध भी किया गया।
फाइट रेटिनोब्लास्टोमा इंडिया ने पिछले एक दशक में क्या हासिल किया?
कैनकिड्स द्वारा संचालित इस राष्ट्रीय बहु-हितधारक मंच ने पिछले एक दशक में 90 से अधिक रेटिनोब्लास्टोमा उपचार केंद्रों का सहयोगी नेटवर्क तैयार किया है। इस पहल के तहत बाल चिकित्सा और नेत्र ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञता को एकीकृत किया गया, जिससे निदान, रेफरल और देखभाल की निरंतरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
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