राजद नेतृत्व राजनीतिक-सामाजिक रूप से खत्म — पप्पू यादव का बांकीपुर नतीजे पर तीखा वार
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 5 अगस्त 2026 को बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजद का मौजूदा नेतृत्व राजनीतिक और सामाजिक — दोनों मोर्चों पर पूरी तरह विफल हो चुका है, और यही कारण रहा कि बांकीपुर की जनता को भाजपा के विकल्प के रूप में प्रशांत किशोर को चुनना पड़ा।
जीत की वजह: जेन-जी और विकल्पहीनता
पप्पू यादव ने कहा, "बिहार में विपक्ष का खत्म हो जाना और जेन-जी को लगातार गाली देना और पटना में पीटने जैसे घटनाक्रम इस जीत का कारण हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि युवा मतदाताओं के सामने यह सवाल था कि भाजपा को हराने के लिए वोट कहाँ दें, और राजद इस भूमिका को निभाने में नाकाम रहा।
सांसद ने स्पष्ट किया, "लोगों को विकल्प दिखा और दूसरा अन्य विकल्प नहीं होना भी इस जीत की वजह है।" उनके अनुसार यादव-मुस्लिम मतदाताओं का एकतरफा समर्थन प्रशांत किशोर को इसलिए नहीं मिला क्योंकि उनका कोई सामाजिक सरोकार है, बल्कि इसलिए मिला क्योंकि राजद ने उन्हें निराश किया।
राजद नेतृत्व पर सीधा प्रहार
पप्पू यादव ने कहा, "राजद के नेतृत्व की सोच बिल्कुल भी आम आदमी की तरह नहीं रही है। इसलिए जनता के पास बांकीपुर में ज़्यादा विकल्प नहीं थे।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और विपक्षी एकता पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
संसद प्रदर्शन और सनातन विवाद पर सफाई
संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन और सनातन धर्म के कथित अपमान के आरोपों पर पप्पू यादव ने कहा, "गोविंद गिरी ने किस हैसियत से साधु की वेशभूषा पहनी। हमने सिर्फ गोविंद गिरी का एक नाटक किया। रंग किसी जाति-धर्म का नहीं होता है। तिरंगा में केसरिया और हरे रंग हैं।"
उन्होंने राम मंदिर के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी पर भी निशाना साधा — "राम मंदिर के चढ़ावे में शुरू से ही चोरी चल रही थी। जमीन बेच दी गई। कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी पर कितने आरोप हैं। ऐसे व्यक्तियों ने मंदिर की आस्था के साथ खिलवाड़ किया।" गौरतलब है कि ये आरोप पप्पू यादव के व्यक्तिगत बयान हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
साधु-संतों पर टिप्पणी और शंकराचार्य का समर्थन
सांसद ने साधु-संतों के एक वर्ग पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "अपराधी कालनेमी संत गला काट रहे हैं और मार रहे हैं। हम शंकराचार्य के साथ हैं। सही साधुओं का सम्मान करते हैं। लेकिन लूटने और बलात्कार करने वाले साधुओं के साथ नहीं हैं।" उनके इस बयान ने राजनीतिक और धार्मिक दोनों मोर्चों पर हलचल मचा दी है।
बिहार की राजनीति में यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव में विपक्ष की एकजुटता और युवा मतदाताओं का रुझान निर्णायक भूमिका निभा सकता है।