5 अगस्त 2026
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राजद नेतृत्व राजनीतिक-सामाजिक रूप से खत्म — पप्पू यादव का बांकीपुर नतीजे पर तीखा वार

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राजद नेतृत्व राजनीतिक-सामाजिक रूप से खत्म — पप्पू यादव का बांकीपुर नतीजे पर तीखा वार

सारांश

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद पप्पू यादव ने राजद को कठघरे में खड़ा किया — उनके अनुसार यह जीत राजद की विफलता का नतीजा है, न प्रशांत किशोर की ताकत का। जेन-जी की नाराज़गी और विकल्पहीनता ने बांकीपुर का नतीजा तय किया।

मुख्य बातें

पप्पू यादव ने 5 अगस्त 2026 को राजद के मौजूदा नेतृत्व को राजनीतिक और सामाजिक रूप से 'पूरी तरह खत्म' करार दिया।
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत को उन्होंने राजद की विफलता और मतदाताओं की विकल्पहीनता का परिणाम बताया।
सांसद ने कहा कि जेन-जी को लगातार गाली देने और पटना में पीटने जैसी घटनाओं ने राजद की साख को नुकसान पहुँचाया।
राम मंदिर कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए — ये आरोप पप्पू यादव के व्यक्तिगत बयान हैं, स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं।
उन्होंने शंकराचार्य के साथ खड़े होने की बात कही और आपराधिक प्रवृत्ति के साधुओं का विरोध जताया।

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 5 अगस्त 2026 को बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजद का मौजूदा नेतृत्व राजनीतिक और सामाजिक — दोनों मोर्चों पर पूरी तरह विफल हो चुका है, और यही कारण रहा कि बांकीपुर की जनता को भाजपा के विकल्प के रूप में प्रशांत किशोर को चुनना पड़ा।

जीत की वजह: जेन-जी और विकल्पहीनता

पप्पू यादव ने कहा, "बिहार में विपक्ष का खत्म हो जाना और जेन-जी को लगातार गाली देना और पटना में पीटने जैसे घटनाक्रम इस जीत का कारण हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि युवा मतदाताओं के सामने यह सवाल था कि भाजपा को हराने के लिए वोट कहाँ दें, और राजद इस भूमिका को निभाने में नाकाम रहा।

सांसद ने स्पष्ट किया, "लोगों को विकल्प दिखा और दूसरा अन्य विकल्प नहीं होना भी इस जीत की वजह है।" उनके अनुसार यादव-मुस्लिम मतदाताओं का एकतरफा समर्थन प्रशांत किशोर को इसलिए नहीं मिला क्योंकि उनका कोई सामाजिक सरोकार है, बल्कि इसलिए मिला क्योंकि राजद ने उन्हें निराश किया।

राजद नेतृत्व पर सीधा प्रहार

पप्पू यादव ने कहा, "राजद के नेतृत्व की सोच बिल्कुल भी आम आदमी की तरह नहीं रही है। इसलिए जनता के पास बांकीपुर में ज़्यादा विकल्प नहीं थे।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और विपक्षी एकता पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।

संसद प्रदर्शन और सनातन विवाद पर सफाई

संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन और सनातन धर्म के कथित अपमान के आरोपों पर पप्पू यादव ने कहा, "गोविंद गिरी ने किस हैसियत से साधु की वेशभूषा पहनी। हमने सिर्फ गोविंद गिरी का एक नाटक किया। रंग किसी जाति-धर्म का नहीं होता है। तिरंगा में केसरिया और हरे रंग हैं।"

उन्होंने राम मंदिर के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी पर भी निशाना साधा — "राम मंदिर के चढ़ावे में शुरू से ही चोरी चल रही थी। जमीन बेच दी गई। कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी पर कितने आरोप हैं। ऐसे व्यक्तियों ने मंदिर की आस्था के साथ खिलवाड़ किया।" गौरतलब है कि ये आरोप पप्पू यादव के व्यक्तिगत बयान हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

साधु-संतों पर टिप्पणी और शंकराचार्य का समर्थन

सांसद ने साधु-संतों के एक वर्ग पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "अपराधी कालनेमी संत गला काट रहे हैं और मार रहे हैं। हम शंकराचार्य के साथ हैं। सही साधुओं का सम्मान करते हैं। लेकिन लूटने और बलात्कार करने वाले साधुओं के साथ नहीं हैं।" उनके इस बयान ने राजनीतिक और धार्मिक दोनों मोर्चों पर हलचल मचा दी है।

बिहार की राजनीति में यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव में विपक्ष की एकजुटता और युवा मतदाताओं का रुझान निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बिहार विपक्ष के भीतर गहराती दरार का संकेत है। राजद को 'खत्म' बताना और प्रशांत किशोर की जीत को विकल्पहीनता का नतीजा कहना — दोनों एक साथ सच हो सकते हैं, और यही इस बयान की राजनीतिक ताकत है। असली सवाल यह है कि क्या बिहार में कोई विश्वसनीय विपक्षी ध्रुव बन पाएगा जो जेन-जी और पारंपरिक यादव-मुस्लिम मतदाताओं को एक साथ साध सके। राम मंदिर और साधु-विवाद पर उनकी टिप्पणियाँ जहाँ एक ओर उन्हें सुर्खियों में रखती हैं, वहीं मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नज़रअंदाज़ कर देती है कि ये बयान बिहार चुनाव से पहले एक सुनियोजित पोजिशनिंग भी हो सकते हैं।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पप्पू यादव ने राजद के बारे में क्या कहा?
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने कहा कि राजद का वर्तमान नेतृत्व राजनीतिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह खत्म हो चुका है और उसकी सोच आम आदमी से कट गई है। उनके अनुसार यही कारण है कि बांकीपुर में जनता के पास भाजपा को हराने का कोई और विकल्प नहीं बचा था।
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के क्या कारण बताए गए?
पप्पू यादव के अनुसार, राजद द्वारा जेन-जी को गाली देना, पटना में युवाओं पर हमले जैसी घटनाएँ और विपक्ष की विश्वसनीयता का खत्म होना — ये सब मिलकर प्रशांत किशोर की जीत का कारण बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जीत प्रशांत किशोर की ताकत से नहीं, बल्कि राजद की विफलता से आई।
पप्पू यादव ने राम मंदिर और गोविंद गिरी पर क्या आरोप लगाए?
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे में शुरू से चोरी हो रही थी और जमीन बेची गई। उन्होंने कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी पर कई आरोपों का उल्लेख किया। ये आरोप पप्पू यादव के व्यक्तिगत बयान हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पप्पू यादव ने साधु-संतों पर क्या टिप्पणी की?
सांसद ने कहा कि वे शंकराचार्य और सही साधुओं के साथ हैं, लेकिन आपराधिक प्रवृत्ति के साधुओं का समर्थन नहीं करते। उन्होंने उन साधुओं का विरोध जताया जो लूट और बलात्कार जैसे अपराधों में संलिप्त हों।
बिहार की राजनीति पर इस बयान का क्या असर हो सकता है?
यह बयान आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी खेमे में बिखराव को उजागर करता है। राजद और पप्पू यादव के बीच की यह खाई भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकती है, जबकि प्रशांत किशोर की बढ़ती स्वीकार्यता बिहार में एक नई राजनीतिक धुरी बनने के संकेत दे रही है।
राष्ट्र प्रेस
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