भीगे बादाम, अखरोट और किशमिश: सुबह के नाश्ते में मेवों का मिश्रण क्यों है फायदेमंद?
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा कर सुबह की डाइट में भीगे मेवों को शामिल करने की सलाह दी है। पोस्ट में बादाम, अखरोट और किशमिश जैसे मेवों से मिलने वाले पोषक तत्वों की जानकारी दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दिन की शुरुआत पौष्टिक खानपान से करने पर शरीर को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकते हैं।
भीगे मेवों का भारतीय परंपरा में स्थान
रात में मेवों को पानी में भिगोकर सुबह खाने की परंपरा भारतीय घरों में लंबे समय से प्रचलित रही है। माना जाता है कि भिगोने की प्रक्रिया से मेवों को पचाना आसान हो जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भिगोना संभव न हो, तो इन्हें सामान्य रूप से भी संतुलित मात्रा में खाया जा सकता है।
बादाम: विटामिन-ई और मैग्नीशियम का स्रोत
बादाम में विटामिन-ई, मैग्नीशियम, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं। विटामिन-ई शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट है, जबकि मैग्नीशियम शरीर की कई सामान्य जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। सुबह के नाश्ते में सीमित मात्रा में बादाम शामिल करना डाइट को पौष्टिक बनाने का एक सरल तरीका हो सकता है।
अखरोट: ओमेगा-3 और एंटीऑक्सीडेंट्स का भंडार
अखरोट को ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसे सीधे खाया जा सकता है या फिर ओट्स, दलिया, दही अथवा फलों के साथ भी मिलाया जा सकता है। गौरतलब है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड शाकाहारी आहार में कम मिलता है, जिससे अखरोट इसकी पूर्ति के लिए एक उपयोगी विकल्प माना जाता है।
किशमिश: मिठास के साथ पोषण, पर संयम ज़रूरी
किशमिश में पोटैशियम, आयरन और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि, इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में खाना बेहतर है। विशेष रूप से डायबिटीज या ब्लड शुगर से जुड़ी समस्या वाले लोगों को अपनी व्यक्तिगत डाइट के अनुसार मात्रा तय करनी चाहिए।
संतुलित डाइट ही है असली कुंजी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भीगे बादाम, अखरोट और किशमिश का मिश्रण सुबह के आहार में विविध पोषक तत्व जोड़ सकता है, लेकिन कोई एक खाद्य पदार्थ संपूर्ण पोषण का विकल्प नहीं है। स्वस्थ रहने के लिए मेवों के साथ-साथ फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, दालें और पर्याप्त पानी को भी रोज़मर्रा की डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब शहरी जीवनशैली में असंतुलित खानपान की समस्या बढ़ती जा रही है।