18 अगस्त 2026
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पूर्वी रेलवे आरपीएफ का बड़ा अभियान: ट्रेनों पर पत्थरबाजी रोकने के लिए युवाओं को किया जागरूक

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पूर्वी रेलवे आरपीएफ का बड़ा अभियान: ट्रेनों पर पत्थरबाजी रोकने के लिए युवाओं को किया जागरूक

सारांश

80वें स्वतंत्रता दिवस पर पूर्वी रेलवे आरपीएफ ने बंगाल के चारों मंडलों में युवाओं को ट्रेन पर पत्थरबाजी, ट्रैक अतिक्रमण और सोशल मीडिया रील के लिए अवैध गतिविधियों के खतरों से आगाह किया। 2026 के पहले सात महीनों में ट्रैक पर सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं।

मुख्य बातें

पूर्वी रेलवे आरपीएफ ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा में जनजागरूकता अभियान चलाया।
चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने और सोशल मीडिया रील के लिए अवैध गतिविधियों के कानूनी परिणामों से युवाओं को अवगत कराया गया।
2026 के पहले सात महीनों में पूर्वी रेलवे क्षेत्र में ट्रैक पार करने के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है।
उपनगरीय ईएमयू लोकल ट्रेनों में दरवाजों के पास यात्रा करने वाले यात्री पत्थरबाजी से सबसे अधिक जोखिम में हैं।
संदिग्ध गतिविधि की सूचना हेल्पलाइन नंबर 139 पर देने की अपील की गई।

पूर्वी रेलवे के रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कोलकाता समेत पूरे पूर्वी रेलवे क्षेत्र में एक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया, जिसमें रेलवे स्टेशनों और पटरियों के आसपास रहने वाले युवाओं को अवैध गतिविधियों के खतरों और कानूनी परिणामों से अवगत कराया गया। यह अभियान विशेष रूप से चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए शुरू किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

यह जागरूकता कार्यक्रम पूर्वी रेलवे के सभी चार मंडलोंहावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा — में एक साथ आयोजित किए गए। आरपीएफ के सुरक्षा कर्मियों ने स्थानीय युवाओं और निवासियों से सीधे संवाद किया तथा उन्हें रेलवे से जुड़े विभिन्न अपराधों के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से समझाया।

पत्थरबाजी और सोशल मीडिया रील का खतरा

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'हाल के दिनों में कुछ युवाओं के सोशल मीडिया रील बनाने के लिए अवैध गतिविधियों में शामिल होने की खबरें सामने आई हैं। कुछ मामलों में उन्होंने चलती ट्रेनों पर पत्थर भी फेंके हैं। हमने लोगों को समझाया कि जिन ट्रेनों पर पत्थर फेंके जाते हैं, उनमें उनके रिश्तेदार और दोस्त भी यात्रा में शामिल हो सकते हैं। साथ ही उन्हें ऐसे कृत्यों के कानूनी परिणामों के बारे में भी बताया गया।' अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह खतरा विशेष रूप से उपनगरीय ईएमयू लोकल ट्रेनों में अधिक गंभीर है, जहाँ बड़ी संख्या में यात्री दरवाजों के निकट खड़े होकर सफर करते हैं।

आम जनता पर असर

अभियान के दौरान लोगों को मानव तस्करी, बिना कारण अलार्म चेन खींचने, रेलवे ट्रैक पर अतिक्रमण (ट्रेसपासिंग) और अन्य रेलवे अपराधों के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि अलार्म चेन का अनावश्यक उपयोग ट्रेनों में अनावश्यक विलंब का कारण बनता है, जिससे लाखों यात्री प्रभावित होते हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में पूर्वी रेलवे के क्षेत्राधिकार में ट्रैक पार करने के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है — यह आँकड़ा इस समस्या की गंभीरता को उजागर करता है।

सड़क वाहनों द्वारा अवैध ट्रैक क्रॉसिंग

अधिकारियों ने यह भी चेताया कि सड़क वाहनों द्वारा अवैध रूप से रेलवे ट्रैक पार करने से बड़े हादसे हो सकते हैं, रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुँच सकता है और रेल सेवाएं बाधित हो सकती हैं। ऐसी घटनाओं में दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

क्या होगा आगे

आरपीएफ ने नागरिकों से अपील की कि ट्रेनों या रेलवे ट्रैक के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल हेल्पलाइन नंबर 139 पर दें। यह अभियान स्वतंत्रता दिवस समारोह के तहत शुरू हुआ है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार जागरूकता प्रयास आगे भी जारी रहेंगे, ताकि रेलवे परिसरों को सुरक्षित बनाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अकेले पर्याप्त नहीं। असली सवाल यह है कि क्या आरपीएफ के पास इन घटनाओं की निगरानी और अभियोजन के लिए पर्याप्त तंत्र है, या यह अभियान केवल स्वतंत्रता दिवस की औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वी रेलवे आरपीएफ का जागरूकता अभियान क्या है?
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूर्वी रेलवे के रेलवे सुरक्षा बल ने हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा मंडलों में युवाओं को ट्रेन पर पत्थरबाजी, ट्रैक अतिक्रमण और अलार्म चेन के दुरुपयोग जैसी अवैध गतिविधियों के खतरों और कानूनी परिणामों से अवगत कराने के लिए यह अभियान चलाया।
ट्रेन पर पत्थर फेंकने के क्या कानूनी परिणाम हो सकते हैं?
चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकना रेलवे अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है, जिसमें जुर्माने के साथ-साथ कारावास भी हो सकता है। आरपीएफ अधिकारियों ने युवाओं को बताया कि इस तरह की हरकत से यात्रियों को गंभीर चोट लग सकती है और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुँच सकता है।
2026 में पूर्वी रेलवे क्षेत्र में ट्रैक पार करने से कितनी मौतें हुई हैं?
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में पूर्वी रेलवे के क्षेत्राधिकार में ट्रैक पार करने के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। यह आँकड़ा रेलवे ट्रैक पर अतिक्रमण की समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
रेलवे से जुड़ी संदिग्ध गतिविधि की सूचना कहाँ दें?
आरपीएफ ने नागरिकों से अपील की है कि ट्रेनों या रेलवे ट्रैक के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना हेल्पलाइन नंबर 139 पर तत्काल दें। यह नंबर 24 घंटे उपलब्ध है।
सोशल मीडिया रील के लिए रेलवे पर अवैध गतिविधियाँ क्यों बढ़ रही हैं?
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में कुछ युवा वायरल सोशल मीडिया रील बनाने के लिए चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने जैसी खतरनाक हरकतें कर रहे हैं। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए ही यह जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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