पूर्वी रेलवे आरपीएफ का बड़ा अभियान: ट्रेनों पर पत्थरबाजी रोकने के लिए युवाओं को किया जागरूक
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वी रेलवे के रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कोलकाता समेत पूरे पूर्वी रेलवे क्षेत्र में एक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया, जिसमें रेलवे स्टेशनों और पटरियों के आसपास रहने वाले युवाओं को अवैध गतिविधियों के खतरों और कानूनी परिणामों से अवगत कराया गया। यह अभियान विशेष रूप से चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए शुरू किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
यह जागरूकता कार्यक्रम पूर्वी रेलवे के सभी चार मंडलों — हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा — में एक साथ आयोजित किए गए। आरपीएफ के सुरक्षा कर्मियों ने स्थानीय युवाओं और निवासियों से सीधे संवाद किया तथा उन्हें रेलवे से जुड़े विभिन्न अपराधों के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से समझाया।
पत्थरबाजी और सोशल मीडिया रील का खतरा
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'हाल के दिनों में कुछ युवाओं के सोशल मीडिया रील बनाने के लिए अवैध गतिविधियों में शामिल होने की खबरें सामने आई हैं। कुछ मामलों में उन्होंने चलती ट्रेनों पर पत्थर भी फेंके हैं। हमने लोगों को समझाया कि जिन ट्रेनों पर पत्थर फेंके जाते हैं, उनमें उनके रिश्तेदार और दोस्त भी यात्रा में शामिल हो सकते हैं। साथ ही उन्हें ऐसे कृत्यों के कानूनी परिणामों के बारे में भी बताया गया।' अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह खतरा विशेष रूप से उपनगरीय ईएमयू लोकल ट्रेनों में अधिक गंभीर है, जहाँ बड़ी संख्या में यात्री दरवाजों के निकट खड़े होकर सफर करते हैं।
आम जनता पर असर
अभियान के दौरान लोगों को मानव तस्करी, बिना कारण अलार्म चेन खींचने, रेलवे ट्रैक पर अतिक्रमण (ट्रेसपासिंग) और अन्य रेलवे अपराधों के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि अलार्म चेन का अनावश्यक उपयोग ट्रेनों में अनावश्यक विलंब का कारण बनता है, जिससे लाखों यात्री प्रभावित होते हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में पूर्वी रेलवे के क्षेत्राधिकार में ट्रैक पार करने के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है — यह आँकड़ा इस समस्या की गंभीरता को उजागर करता है।
सड़क वाहनों द्वारा अवैध ट्रैक क्रॉसिंग
अधिकारियों ने यह भी चेताया कि सड़क वाहनों द्वारा अवैध रूप से रेलवे ट्रैक पार करने से बड़े हादसे हो सकते हैं, रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुँच सकता है और रेल सेवाएं बाधित हो सकती हैं। ऐसी घटनाओं में दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
क्या होगा आगे
आरपीएफ ने नागरिकों से अपील की कि ट्रेनों या रेलवे ट्रैक के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल हेल्पलाइन नंबर 139 पर दें। यह अभियान स्वतंत्रता दिवस समारोह के तहत शुरू हुआ है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार जागरूकता प्रयास आगे भी जारी रहेंगे, ताकि रेलवे परिसरों को सुरक्षित बनाया जा सके।