आरएसएस 100 साल से लाठी रखता आया है, व्यायाम के लिए है इस्तेमाल: चालवादी नारायणस्वामी का प्रियंक खरगे पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता चालवादी नारायणस्वामी ने मंगलवार, 29 सितंबर को मैसूरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक पिछले 100 वर्षों से लाठी रखते आए हैं और आज भी रखते हैं — तथा इसका उद्देश्य शारीरिक व्यायाम और प्रशिक्षण है, न कि कोई अन्य कारण। यह बयान कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे की उस हालिया टिप्पणी के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने आरएसएस स्वयंसेवकों द्वारा लाठी रखने और हाफ पैंट पहनने का उल्लेख किया था।
नारायणस्वामी का आरएसएस की लाठी परंपरा पर बयान
नारायणस्वामी ने कहा, 'आरएसएस की स्थापना को 100 साल हो चुके हैं। उस समय भी लाठी थी और आज भी है। आरएसएस के स्वयंसेवक किसी और वजह से लाठी नहीं रखते। वे सुबह शारीरिक व्यायाम करते हैं और कई तरह की चीजें सीखते हैं।' उनका यह कथन संघ की शाखाओं में प्रचलित लाठी-प्रशिक्षण की उस परंपरा की ओर इशारा करता है, जो दशकों से संघ की दिनचर्या का हिस्सा रही है।
गौरतलब है कि आरएसएस की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी और इस वर्ष संगठन अपनी शताब्दी मना रहा है। लाठी-संचालन संघ की शाखाओं में शारीरिक विकास का एक पारंपरिक माध्यम रहा है।
प्रियंक खरगे पर तीखा तंज
BJP नेता ने गृह मंत्री प्रियंक खरगे पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लगातार नागपुर, आरएसएस, लाठी और हाफ पैंट की बात करते रहते हैं। नारायणस्वामी ने कहा, 'राज्य में एक और मंत्री हैं, गृह मंत्री। हाल के दिनों में वह घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं, लेकिन वह हमेशा नागपुर, आरएसएस, लाठी और हाफ पैंट की बात करते हैं। बस यही सब है।'
व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने आगे कहा, 'मैंने उनसे कहा है कि दूसरों की हाफ पैंट देखने के बजाय अपनी हाफ पैंट देखें। इसके बावजूद वह मान नहीं रहे हैं और हाफ पैंट में ही रुचि रखते हैं।' यह टिप्पणी कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार और BJP के बीच जारी राजनीतिक तकरार का ताज़ा अध्याय है।
मैसूरु दशहरा में 22 मंत्रियों की तैनाती पर सवाल
नारायणस्वामी ने ऐतिहासिक मैसूरु दशहरा समारोह की तैयारियों में राज्य सरकार द्वारा 22 मंत्रियों को शामिल किए जाने के फैसले पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मैसूरु जिले के प्रभारी मंत्री पहले से मौजूद हैं, तो इतनी बड़ी संख्या में मंत्रियों को जिम्मेदारी देने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
उन्होंने शहरी विकास मंत्री और मैसूरु के जिला प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, 'यतींद्र सिद्धारमैया के पास क्या अधिकार है? ऐसा लगता है कि उनके पास अपने घर के कामकाज को संभालने का भी समय नहीं है। दूसरे मंत्रियों को भी जिम्मेदारी दी गई है और यतींद्र उनसे छोटे हैं। उन्हें घर पर रहकर वहां की व्यवस्था देखनी चाहिए।'
राजनीतिक पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि यतींद्र सिद्धारमैया पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र हैं। परंपरागत रूप से मैसूरु दशहरा समारोह की संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रभारी मंत्री को ही सौंपी जाती रही है। इस बार 22 मंत्रियों को शामिल किए जाने के निर्णय को विपक्ष ने प्रशासनिक अव्यवस्था का संकेत बताया है।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में BJP और कांग्रेस के बीच वैचारिक और प्रशासनिक मोर्चे पर तकरार तेज़ हो रही है। आने वाले दिनों में दशहरा समारोह की तैयारियों और आरएसएस-कांग्रेस विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज़ होने की संभावना है।