29 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आरएसएस 100 साल से लाठी रखता आया है, व्यायाम के लिए है इस्तेमाल: चालवादी नारायणस्वामी का प्रियंक खरगे पर पलटवार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आरएसएस 100 साल से लाठी रखता आया है, व्यायाम के लिए है इस्तेमाल: चालवादी नारायणस्वामी का प्रियंक खरगे पर पलटवार

सारांश

कर्नाटक विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चालवादी नारायणस्वामी ने मैसूरु में गृह मंत्री प्रियंक खरगे की आरएसएस-लाठी टिप्पणी का तीखा जवाब दिया — कहा, 100 साल की परंपरा है, व्यायाम के लिए है। साथ ही दशहरा में 22 मंत्रियों की तैनाती और यतींद्र सिद्धारमैया की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

मुख्य बातें

चालवादी नारायणस्वामी ने 29 सितंबर को मैसूरु में कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक 100 वर्षों से लाठी रखते आए हैं और यह शारीरिक व्यायाम के लिए है।
यह बयान गृह मंत्री प्रियंक खरगे की उस टिप्पणी के जवाब में आया जिसमें उन्होंने आरएसएस की लाठी और हाफ पैंट का उल्लेख किया था।
नारायणस्वामी ने खरगे पर तंज कसते हुए कहा — 'दूसरों की हाफ पैंट देखने के बजाय अपनी हाफ पैंट देखें।' भाजपा नेता ने मैसूरु दशहरा समारोह में 22 मंत्रियों को शामिल किए जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए।
जिला प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया — पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र — की भूमिका और अधिकार पर भी आपत्ति जताई।

कर्नाटक विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता चालवादी नारायणस्वामी ने मंगलवार, 29 सितंबर को मैसूरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक पिछले 100 वर्षों से लाठी रखते आए हैं और आज भी रखते हैं — तथा इसका उद्देश्य शारीरिक व्यायाम और प्रशिक्षण है, न कि कोई अन्य कारण। यह बयान कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे की उस हालिया टिप्पणी के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने आरएसएस स्वयंसेवकों द्वारा लाठी रखने और हाफ पैंट पहनने का उल्लेख किया था।

नारायणस्वामी का आरएसएस की लाठी परंपरा पर बयान

नारायणस्वामी ने कहा, 'आरएसएस की स्थापना को 100 साल हो चुके हैं। उस समय भी लाठी थी और आज भी है। आरएसएस के स्वयंसेवक किसी और वजह से लाठी नहीं रखते। वे सुबह शारीरिक व्यायाम करते हैं और कई तरह की चीजें सीखते हैं।' उनका यह कथन संघ की शाखाओं में प्रचलित लाठी-प्रशिक्षण की उस परंपरा की ओर इशारा करता है, जो दशकों से संघ की दिनचर्या का हिस्सा रही है।

गौरतलब है कि आरएसएस की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी और इस वर्ष संगठन अपनी शताब्दी मना रहा है। लाठी-संचालन संघ की शाखाओं में शारीरिक विकास का एक पारंपरिक माध्यम रहा है।

प्रियंक खरगे पर तीखा तंज

BJP नेता ने गृह मंत्री प्रियंक खरगे पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लगातार नागपुर, आरएसएस, लाठी और हाफ पैंट की बात करते रहते हैं। नारायणस्वामी ने कहा, 'राज्य में एक और मंत्री हैं, गृह मंत्री। हाल के दिनों में वह घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं, लेकिन वह हमेशा नागपुर, आरएसएस, लाठी और हाफ पैंट की बात करते हैं। बस यही सब है।'

व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने आगे कहा, 'मैंने उनसे कहा है कि दूसरों की हाफ पैंट देखने के बजाय अपनी हाफ पैंट देखें। इसके बावजूद वह मान नहीं रहे हैं और हाफ पैंट में ही रुचि रखते हैं।' यह टिप्पणी कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार और BJP के बीच जारी राजनीतिक तकरार का ताज़ा अध्याय है।

मैसूरु दशहरा में 22 मंत्रियों की तैनाती पर सवाल

नारायणस्वामी ने ऐतिहासिक मैसूरु दशहरा समारोह की तैयारियों में राज्य सरकार द्वारा 22 मंत्रियों को शामिल किए जाने के फैसले पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मैसूरु जिले के प्रभारी मंत्री पहले से मौजूद हैं, तो इतनी बड़ी संख्या में मंत्रियों को जिम्मेदारी देने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

उन्होंने शहरी विकास मंत्री और मैसूरु के जिला प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, 'यतींद्र सिद्धारमैया के पास क्या अधिकार है? ऐसा लगता है कि उनके पास अपने घर के कामकाज को संभालने का भी समय नहीं है। दूसरे मंत्रियों को भी जिम्मेदारी दी गई है और यतींद्र उनसे छोटे हैं। उन्हें घर पर रहकर वहां की व्यवस्था देखनी चाहिए।'

राजनीतिक पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि यतींद्र सिद्धारमैया पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र हैं। परंपरागत रूप से मैसूरु दशहरा समारोह की संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रभारी मंत्री को ही सौंपी जाती रही है। इस बार 22 मंत्रियों को शामिल किए जाने के निर्णय को विपक्ष ने प्रशासनिक अव्यवस्था का संकेत बताया है।

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में BJP और कांग्रेस के बीच वैचारिक और प्रशासनिक मोर्चे पर तकरार तेज़ हो रही है। आने वाले दिनों में दशहरा समारोह की तैयारियों और आरएसएस-कांग्रेस विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज़ होने की संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चालवादी नारायणस्वामी ने आरएसएस की लाठी के बारे में क्या कहा?
नारायणस्वामी ने कहा कि आरएसएस की स्थापना को 100 साल हो चुके हैं और उस समय भी लाठी थी, आज भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वयंसेवक लाठी का उपयोग शारीरिक व्यायाम और प्रशिक्षण के लिए करते हैं, किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं।
प्रियंक खरगे ने आरएसएस पर क्या टिप्पणी की थी?
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने हाल ही में आरएसएस स्वयंसेवकों द्वारा लाठी रखने और हाफ पैंट पहनने का उल्लेख किया था। इसी टिप्पणी के जवाब में नारायणस्वामी ने मैसूरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
मैसूरु दशहरा में 22 मंत्रियों को क्यों शामिल किया गया और BJP को क्या आपत्ति है?
राज्य सरकार ने इस बार मैसूरु दशहरा की तैयारियों में 22 मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि परंपरागत रूप से यह काम अकेले जिला प्रभारी मंत्री का होता था। BJP नेता नारायणस्वामी ने इसे अनावश्यक बताते हुए सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मंत्रियों की ज़रूरत क्यों पड़ी।
यतींद्र सिद्धारमैया कौन हैं और नारायणस्वामी ने उन पर क्या आरोप लगाए?
यतींद्र सिद्धारमैया मैसूरु जिले के प्रभारी मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र हैं। नारायणस्वामी ने उनकी भूमिका और अधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।
आरएसएस की शताब्दी का क्या महत्व है?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में हुई थी और इस वर्ष संगठन अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। नारायणस्वामी ने इसी संदर्भ में कहा कि लाठी-परंपरा संगठन की शुरुआत से ही चली आ रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले