18 अक्टूबर 2026
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आरएसएस का सामाजिक कार्य युवाओं के लिए सबसे प्रेरणादायी: फ्रैंकफर्ट के डिप्टी हेड राहुल कुमार

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आरएसएस का सामाजिक कार्य युवाओं के लिए सबसे प्रेरणादायी: फ्रैंकफर्ट के डिप्टी हेड राहुल कुमार

सारांश

फ्रैंकफर्ट के डिप्टी हेड और भारतीय मूल के पहले एशियाई सिटी पार्लियामेंट सदस्य राहुल कुमार ने आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर कहा — संगठन का सामाजिक कार्य और युवा-केंद्रित गतिविधियाँ यूरोप में रहने वाले प्रवासी भारतीय बच्चों को उनकी जड़ों से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।

मुख्य बातें

फ्रैंकफर्ट के डिप्टी हेड राहुल कुमार ने 18 अक्टूबर 2026 को आरएसएस के सामाजिक कार्यों को युवाओं के लिए 'सबसे प्रभावशाली' बताया।
राहुल कुमार भारतीय मूल के पहले एशियाई फ्रैंकफर्ट सिटी पार्लियामेंट सदस्य हैं और हाल ही में डिप्टी हेड नामित हुए हैं।
उन्होंने आरएसएस को तीन शब्दों में परिभाषित किया: 'राइट, सेवा और सत्संग।' एचएसएस (HSS) जर्मनी और यूरोप में प्रवासी भारतीय युवाओं को सांस्कृतिक गतिविधियों के ज़रिए भारतीय मूल्यों से जोड़ रहा है।
भारत-जर्मनी संबंधों पर उन्होंने कहा कि हेसेन राज्य और भारतीय राज्यों के बीच राज्य-स्तरीय समझौते हुए हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष पर प्रकाशित पुस्तक 'हंड्रेड ईयर्स यंग: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' की चर्चा के बीच जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर के डिप्टी हेड और भारतीय मूल के पहले एशियाई सिटी पार्लियामेंट सदस्य राहुल कुमार ने 18 अक्टूबर 2026 को आरएसएस के सामाजिक कार्यों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि संगठन की युवा-केंद्रित गतिविधियाँ उन्हें बचपन से प्रभावित करती रही हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब आरएसएस अपने 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश-विदेश में व्यापक चर्चाओं के केंद्र में है।

युवाओं और सामाजिक कार्य पर राहुल कुमार का मत

पुस्तक के संदर्भ में जब राहुल कुमार से आरएसएस के साथ अपने अनुभव पर पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'आरएसएस का सामाजिक कार्य सबसे प्रभावशाली चीज है, जो खासकर युवाओं के लिए है।' उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि जर्मनी और यूरोप में हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS) इसी भूमिका को निभाता है, जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और युवा परियोजनाओं के माध्यम से प्रवासी भारतीय पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ा जाता है।

राहुल कुमार ने बताया कि बचपन से ही उन्होंने और उनके बड़े भाई ने एचएसएस की गतिविधियों को प्रेरणादायी पाया। उनके अनुसार, 'आरएसएस को जानने के लिए लोगों से सीधे जुड़ना ज़रूरी है — जैसे पानी की गर्माहट महसूस करने के लिए पानी में उतरना पड़ता है।' उन्होंने आरएसएस को तीन शब्दों में परिभाषित किया: 'राइट, सेवा और सत्संग।'

पुस्तक और प्रवासी भारतीयों के लिए प्रेरणा

राहुल कुमार ने 'हंड्रेड ईयर्स यंग' पुस्तक को विदेश में रह रहे भारतीय मूल के युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरक बताया। उन्होंने कहा कि यह जानकर युवाओं को हौसला मिलेगा कि भारतीय मूल का एक व्यक्ति फ्रैंकफर्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर में पहला एशियाई सिटी पार्लियामेंट सदस्य बन सकता है। उनके शब्दों में — 'हर भारतीय मूल के व्यक्ति में भारत माता की भावना है और इसे महसूस करना होगा।'

गौरतलब है कि भारतीय डायस्पोरा की दूसरी और तीसरी पीढ़ी के लिए सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना एक दीर्घकालीन चुनौती रही है। एचएसएस जैसे संगठन इस सेतु की भूमिका निभाते हैं, जो दीपावली और होली जैसे त्योहारों के माध्यम से युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हैं।

फ्रैंकफर्ट डिप्टी हेड के रूप में नई भूमिका

राहुल कुमार ने बताया कि हाल ही में उन्हें फ्रैंकफर्ट शहर के डिप्टी हेड के रूप में नामित किया गया है। उन्होंने इसे एक बड़े अवसर के रूप में देखा — न केवल प्रशासनिक दायित्व के रूप में, बल्कि विभिन्न समुदायों को जोड़ने और स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए भी।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत-जर्मनी संबंध मित्रतापूर्ण हैं — हेसेन राज्य के मुख्यमंत्री हाल ही में महाराष्ट्र के दौरे पर थे और राज्य स्तरीय समझौते किए गए। राहुल कुमार स्वयं भी जर्मन प्रतिनिधिमंडल के साथ उत्तराखंड और हरियाणा में एलओआई (LOI) पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।

आरएसएस के 100 वर्ष और राष्ट्र निर्माण में योगदान

आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर राहुल कुमार ने कहा कि यह सफर आसान नहीं था — संगठन ने मानवता, सेवा और संस्कृति के एक ही मार्ग पर चलते हुए कई चुनौतियों का सामना किया। उनके अनुसार, '100 साल पूरे करना पूरे समुदाय के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।'

भारत की वैश्विक छवि पर राहुल कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यूरोप में भारत का अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है और एआई, स्टार्टअप्स तथा युवा प्रतिभा के मामले में भारत पहले से ही शीर्ष देशों में शुमार है। आने वाले समय में वे दुनिया भर के युवा भारतीय प्रवासियों को और अधिक जोड़ने पर ध्यान केंद्रित करने की योजना रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए उनके विचार पूरी तरह तटस्थ नहीं माने जा सकते। मुख्यधारा की कवरेज प्रायः इस बात को छोड़ देती है कि डायस्पोरा संगठनों की भूमिका 'सांस्कृतिक पुल' से आगे बढ़कर राजनीतिक पूँजी बनाने में भी होती है — और फ्रैंकफर्ट जैसे बहुसांस्कृतिक शहर में एक भारतीय मूल के नेता का उभार इस परिदृश्य को नई परतें देता है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल कुमार कौन हैं और फ्रैंकफर्ट में उनकी क्या भूमिका है?
राहुल कुमार भारतीय मूल के पहले एशियाई सिटी पार्लियामेंट सदस्य हैं, जो जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर का प्रतिनिधित्व करते हैं। हाल ही में उन्हें फ्रैंकफर्ट के डिप्टी हेड के रूप में भी नामित किया गया है।
'हंड्रेड ईयर्स यंग: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' किताब किस बारे में है?
यह पुस्तक आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रकाशित की गई है और संगठन के 100 वर्षों के सफर, राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान तथा युवाओं में नेतृत्व गुण विकसित करने की उसकी भूमिका पर केंद्रित है।
जर्मनी में आरएसएस की जगह कौन सा संगठन काम करता है?
जर्मनी और यूरोप में हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS) कार्यरत है, जो आरएसएस की तर्ज पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और युवा परियोजनाएँ चलाता है। राहुल कुमार के अनुसार, एचएसएस प्रवासी भारतीय युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ने का प्रमुख माध्यम है।
राहुल कुमार ने भारत-जर्मनी संबंधों के बारे में क्या कहा?
राहुल कुमार ने कहा कि भारत-जर्मनी संबंध मित्रतापूर्ण हैं और दोनों पक्षों से प्रतिनिधिमंडलों का आना-जाना लगातार होता है। हेसेन राज्य के मुख्यमंत्री हाल ही में महाराष्ट्र में थे और उत्तराखंड व हरियाणा के साथ राज्य-स्तरीय एलओआई पर हस्ताक्षर हुए हैं।
आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर राहुल कुमार ने क्या कहा?
राहुल कुमार ने कहा कि मानवता, सेवा और संस्कृति के एक ही मार्ग पर चलते हुए 100 वर्ष पूरे करना आसान नहीं था और यह पूरे समुदाय के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने संगठन की दीर्घकालीन प्रतिबद्धता को सराहनीय बताया।
राष्ट्र प्रेस
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