मार्को रुबियो मुंबई में बोले — भारत अमेरिका साझेदारी तय करेगी 21वीं सदी का भविष्य
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित 'फ्रीडम 250' कार्यक्रम में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच की रणनीतिक साझेदारी ही यह निर्धारित करेगी कि 21वीं सदी किस दिशा में जाएगी। यह कार्यक्रम अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
रुबियो का मुख्य संदेश
रुबियो ने कहा, "अगर आप 21वीं सदी की कहानी और इतिहास के बारे में सोचें, तो यह इसी क्षेत्र में लिखा जा रहा है और अभी इसी वक्त लिखा जा रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि एक दिन कोई 21वीं सदी के इतिहास पर किताब लिखेगा, और उसमें यह क्षेत्र केंद्रीय अध्याय होगा।
उन्होंने जोड़ा, "मेरा दृढ़ विश्वास है कि अमेरिका और भारत के बीच के संबंध, कई सकारात्मक मायनों में, यह तय करेंगे कि 21वीं सदी कैसी होगी।"
तकनीक और हिंद प्रशांत पर साझा सहमति
रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि सुपरइंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए होना चाहिए और उनके संभावित नुकसानों को कम किया जाना चाहिए। इसके अलावा, दोनों देश एक मुक्त और सुरक्षित हिंद प्रशांत क्षेत्र (इंडो पैसिफिक) की ज़रूरत पर भी एकमत हैं, जहाँ कोई भी देश अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अपना एकाधिकार न जमा सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मुक्त व्यापार खुले समुद्री मार्गों पर निर्भर है। उन्होंने कहा, "इस मुद्दे पर हमारी सोच शत प्रतिशत एक जैसी है।"
असहमति को भी स्वीकारा, लेकिन तालमेल पर ज़ोर
रुबियो ने यह भी माना कि दुनिया के किसी भी दो देश हर मुद्दे पर पूरी तरह एकमत नहीं हो सकते। उन्होंने कहा, "जाहिर है कुछ बातों पर असहमति भी होगी, लेकिन भारत और अमेरिका के राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुख्य मुद्दों पर हमारे दोनों देशों के बीच असाधारण तालमेल है — खासकर इतने बड़े आकार वाले दो देशों के मामले में।"
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत अमेरिका व्यापार वार्ता और क्वाड गठबंधन की प्रासंगिकता पर दोनों देशों में सक्रिय चर्चा चल रही है।
हर तीन महीने में भारत दौरे का संकेत
रुबियो ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से कहा, "मैं आपसे तीन महीने में फिर मिलूंगा, क्योंकि अब मैं हर तीन महीने में यहाँ आऊंगा।" यह बात इस ओर संकेत करती है कि अमेरिका भारत के साथ कूटनीतिक संपर्क को और अधिक नियमित व संस्थागत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब अमेरिका, चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत को एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच और उच्च स्तरीय कूटनीतिक गतिविधियाँ देखने को मिल सकती हैं।