सचिन पायलट का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला — विपक्षी सांसदों की हिरासत को बताया तानाशाही
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने 7 अक्टूबर 2026 को जयपुर में कहा कि चुनाव आयोग से जुड़े हालिया घटनाक्रम और दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों के साथ हुए व्यवहार ने देश में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके आरोपों के केंद्र में चुनाव आयोग की कथित जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति और वोटर सूचियों से लाखों नाम हटाए जाने का खतरा था।
विपक्षी सांसदों की हिरासत पर सवाल
पायलट ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से मिलने की कोशिश कर रहे विपक्षी नेताओं — जिनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल थे — को हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को एक संवैधानिक संस्था के समक्ष अपनी बात रखने से क्यों रोका गया।
पायलट ने इन घटनाओं को सीधे तौर पर 'तानाशाही' करार देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को संवाद और जवाबदेही के लिए हमेशा खुला रहना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।
'वोटबंदी' — वोटिंग अधिकार पर मंडरता खतरा
वोटर सूची संशोधन प्रक्रिया का हवाला देते हुए पायलट ने आरोप लगाया कि लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का खतरा है। उन्होंने इसे संविधान प्रदत्त मताधिकार के लिए सीधा खतरा बताया।
पायलट ने इस स्थिति को रेखांकित करने के लिए 'वोटबंदी' शब्द गढ़ा और इसकी तुलना नोटबंदी से करते हुए कहा कि जिस तरह नोटबंदी ने आम नागरिकों की आर्थिक ताकत छीनी, उसी तरह वोटर सूची से छेड़छाड़ लोकतांत्रिक अधिकार छीनने की कोशिश है। उन्होंने माँग की कि इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान दिया जाए।
राजस्थान नगर निकाय चुनाव — 'हार में भी जीत'
हाल ही में संपन्न राजस्थान नगर निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए पायलट ने दावा किया कि कांग्रेस का प्रदर्शन सीट संख्या से कहीं अधिक रहा क्योंकि पार्टी को अधिक वोट शेयर मिला।
उन्होंने कहा, 'मुझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि भाजपा जीत के बावजूद हार गई, जबकि हम हार के बावजूद जीत गए क्योंकि हमें ज्यादा वोट मिले।' पायलट ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कई जिलों से प्रशासनिक हस्तक्षेप और अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं।
डीएपी खाद संकट और जनता के मुद्दे
पायलट ने राजस्थान में डीएपी खाद की भारी कमी का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि खाद को पुलिस सुरक्षा में वितरित करना पड़ रहा है, फिर भी राज्य सरकार इस संकट के प्रति बेपरवाह बनी हुई है। उन्होंने बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और कल्याणकारी योजनाओं के अपूर्ण क्रियान्वयन को भी कांग्रेस के आगामी अभियान का केंद्र बताया।
पंचायत चुनाव और 2028 की तैयारी
पायलट ने घोषणा की कि कांग्रेस दो महीने का राज्यव्यापी जन-संपर्क अभियान चलाएगी, जिसमें पूरे राजस्थान के गाँवों और मंडलों को कवर किया जाएगा। उन्होंने आगामी पंचायती राज चुनावों में भारी बहुमत का दावा करते हुए कहा कि यह जीत 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनावों की नींव रखेगी।
पायलट ने स्पष्ट किया कि पार्टी चुनावी एजेंडे के साथ-साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा को भी अपने अभियान का अहम हिस्सा बनाएगी। गौरतलब है कि 2028 विधानसभा चुनावों से पहले यह कांग्रेस की ज़मीनी तैयारी का पहला बड़ा संकेत है।