राजस्थान में 3 से 16 अक्टूबर तक 'सही खान-पान, स्वस्थ राजस्थान' अभियान, स्कूलों से अस्पतालों तक जागरूकता
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान में खाद्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य जागरूकता को नई गति देते हुए 3 से 16 अक्टूबर 2026 तक 'सही खान-पान, स्वस्थ राजस्थान' अभियान आयोजित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य प्रदेशवासियों को सुरक्षित, पौष्टिक और संतुलित खान-पान की आदतों के प्रति सजग बनाना है। अभियान जयपुर सहित राजस्थान भर में स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर चलाया जाएगा।
अभियान की पृष्ठभूमि और नेतृत्व
यह अभियान राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ के निर्देश पर आयोजित किया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त अविचल चतुर्वेदी ने अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा की है। गौरतलब है कि खाद्य मिलावट और अनियमित खान-पान की आदतें राज्य में जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, और यह पहल उसी संदर्भ में अहमियत रखती है।
दिन-वार कार्यक्रम की रूपरेखा
3 और 5 अक्टूबर को स्कूलों में 'ईट राइट डे' के अंतर्गत गतिविधियाँ होंगी, जिनमें विद्यार्थियों को हेल्दी टिफिन, श्री अन्न (मोटे अनाज), हाथ धोने के महत्व और खाद्य पदार्थों के लेबल पढ़ने की जानकारी दी जाएगी। 6 और 7 अक्टूबर को मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के माध्यम से लोगों को खाद्य पदार्थों में मिलावट पहचानने के सरल तरीके बताए जाएंगे और मौके पर ही नमूनों की जाँच की जाएगी।
8 और 9 अक्टूबर को 'स्वस्थ राजस्थान-स्वस्थ थाली दिवस' के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें नमक, चीनी और तेल का सेवन कम करने तथा स्थानीय एवं पौष्टिक आहार अपनाने पर ज़ोर दिया जाएगा। 11 और 12 अक्टूबर को पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के लेबल पढ़ने और समझने से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे।
13 और 14 अक्टूबर को कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अस्पतालों में 'ईट राइट कैंपस' से संबंधित गतिविधियाँ होंगी। अभियान का समापन 15 और 16 अक्टूबर को 'फूड वेस्ट-सेव फूड डे' के साथ होगा, जिसमें भोजन की बर्बादी रोकने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
आम जनता से अपेक्षाएँ और शपथ
आयुक्त चतुर्वेदी के अनुसार, अभियान के दौरान लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की शपथ भी दिलाई जाएगी। इस शपथ में पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का लेबल पढ़ना, भोजन में नमक, तेल और चीनी की मात्रा घटाना, सप्ताह में कम से कम तीन दिन साबुत अनाज खाना, प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योग या शारीरिक व्यायाम करना और भोजन बर्बाद न करना जैसी आदतें शामिल हैं।
क्यों मायने रखता है यह अभियान
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब भारत में जंक फूड की खपत और खाद्य मिलावट की घटनाएँ सार्वजनिक स्वास्थ्य विमर्श के केंद्र में हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और मोबाइल लैब की सक्रिय भागीदारी इसे महज़ जागरूकता कार्यक्रम से आगे ले जाती है — यह एक व्यावहारिक हस्तक्षेप भी है। राज्य सरकार के इस कदम से स्कूली बच्चों से लेकर विश्वविद्यालय के छात्रों और आम नागरिकों तक एक व्यापक वर्ग प्रभावित होगा।
आगे देखें तो अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पखवाड़े भर की इन गतिविधियों को दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन में कैसे बदला जाता है।