25 अगस्त 2026
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राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: स्कूल कैंटीन और 50 मीटर दायरे में जंक फूड पर पूर्ण प्रतिबंध

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राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: स्कूल कैंटीन और 50 मीटर दायरे में जंक फूड पर पूर्ण प्रतिबंध

सारांश

राजस्थान हाई कोर्ट ने स्कूल कैंटीन और गेट के 50 मीटर दायरे में जंक फूड पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया। 2020 की गाइडलाइंस के छह साल बाद भी अनुपालन न होने पर कोर्ट सख्त हुआ — अब 4 हफ्ते में न्यूट्रिशन कमेटी और 8 हफ्ते में मेन्यू बोर्ड अनिवार्य है।

मुख्य बातें

राजस्थान हाई कोर्ट ने 25 अगस्त 2026 को स्कूल कैंटीन और स्कूल गेट के 50 मीटर दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने HFSAS (उच्च वसा, शर्करा, नमक) उत्पादों — कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चिप्स, ट्रांस फैट बेकरी — पर रोक के निर्देश दिए।
प्रत्येक स्कूल को 4 सप्ताह में 'स्कूल फूड सेफ्टी एंड न्यूट्रिशन कमेटी' और 8 सप्ताह में पोषण-विवरण सहित मेन्यू बोर्ड लगाना होगा।
जिला मजिस्ट्रेट और ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर हर महीने निरीक्षण करेंगे; सभी जिला कलेक्टर 8 हफ्ते में अनुपालन रिपोर्ट देंगे।
कोर्ट ने 2020 की स्कूल फूड गाइडलाइंस के 6 वर्षों से लागू न होने पर कड़ी नाराज़गी जताई।
ग्रामीण स्कूलों में खाली शिक्षण पद , स्मार्ट क्लासरूम , पेयजल और खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के भी निर्देश दिए गए।

राजस्थान हाई कोर्ट ने 25 अगस्त 2026 को राज्य के सभी स्कूलों की कैंटीन और स्कूल गेट के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास को केंद्र में रखते हुए जारी किया। यह निर्देश राज्यभर के सरकारी और निजी दोनों स्कूलों पर लागू होगा।

प्रतिबंध के दायरे में क्या आता है

कोर्ट ने उच्च वसा, शर्करा और नमक (HFSAS) युक्त खाद्य पदार्थों की बिक्री पर सख्त रोक लगाई है। इनमें कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चिप्स, ट्रांस फैट युक्त बेकरी उत्पाद और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शामिल हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूल परिसर के भीतर और उसके आसपास इस तरह के उत्पादों की उपलब्धता बच्चों की पोषण संबंधी आदतों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।

अनुपालन के लिए समयसीमा और तंत्र

प्रत्येक स्कूल को चार सप्ताह के भीतर 'स्कूल फूड सेफ्टी एंड न्यूट्रिशन कमेटी' गठित करनी होगी। इसके अलावा, आठ सप्ताह के अंदर कैंटीन में एक मेन्यू बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा, जिसमें प्रत्येक खाद्य पदार्थ की कैलोरी, सामग्री और पोषण संबंधी विवरण अंकित हो। नियमों के पालन की निगरानी के लिए जिला मजिस्ट्रेट और ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर को हर महीने स्कूलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है।

2020 की गाइडलाइंस पर कोर्ट की चिंता

पीठ ने इस बात पर गहरी नाराज़गी जताई कि स्कूलों में सुरक्षित और संतुलित भोजन के लिए 2020 में बनाई गई गाइडलाइंस के छह वर्ष से अधिक बीतने के बाद भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बच्चों में मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। कोर्ट ने मिड-डे मील और अन्य पोषण योजनाओं में भी निर्धारित संतुलित आहार मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

तकनीक और बुनियादी शिक्षा पर निर्देश

कोर्ट ने शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक के सीमित और संतुलित उपयोग पर जोर दिया, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि ये उपकरण हाथ से लिखने, किताबें पढ़ने, नोट्स बनाने और लिखित परीक्षाओं जैसी बुनियादी शिक्षण पद्धतियों का स्थान नहीं ले सकते। बच्चों के स्क्रीन टाइम में हो रही अनियंत्रित वृद्धि पर भी पीठ ने चिंता व्यक्त की।

ग्रामीण स्कूलों के लिए विशेष निर्देश

ग्रामीण सरकारी स्कूलों में खाली पड़े शिक्षण पदों को भरने, स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य जाँच, शौचालय, पेयजल और खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश भी जारी किए गए। सभी जिला कलेक्टरों को ग्रामीण स्कूलों का औचक निरीक्षण करने और आठ सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपने का आदेश दिया गया है। गौरतलब है कि यह आदेश राजस्थान के लाखों स्कूली बच्चों के दैनिक खान-पान और शैक्षणिक माहौल को सीधे प्रभावित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी सवाल उठाता है कि कार्यपालिका इतने वर्षों तक निष्क्रिय क्यों रही। मासिक निरीक्षण और समयबद्ध अनुपालन रिपोर्ट की व्यवस्था सराहनीय है, परंतु राजस्थान के हज़ारों ग्रामीण स्कूलों में जहाँ बुनियादी ढाँचा ही अधूरा है, वहाँ न्यूट्रिशन कमेटी गठन की व्यावहारिकता पर विचार ज़रूरी है। असली परीक्षा यह होगी कि जिला कलेक्टरों की रिपोर्टें केवल औपचारिकता न बनें — अन्यथा यह आदेश भी 2020 की गाइडलाइंस की तरह अनुपालन की प्रतीक्षा में धूल खाता रहेगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान हाई कोर्ट ने स्कूलों में जंक फूड पर क्या प्रतिबंध लगाया है?
कोर्ट ने राज्य के सभी स्कूलों की कैंटीन और स्कूल गेट के 50 मीटर दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। इसमें कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चिप्स, ट्रांस फैट युक्त बेकरी उत्पाद और उच्च वसा-शर्करा-नमक (HFSAS) वाले सभी खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
स्कूलों को इस आदेश का पालन कब तक करना होगा?
प्रत्येक स्कूल को 4 सप्ताह के भीतर 'स्कूल फूड सेफ्टी एंड न्यूट्रिशन कमेटी' बनानी होगी और 8 सप्ताह के अंदर पोषण-विवरण सहित मेन्यू बोर्ड लगाना होगा। जिला कलेक्टरों को भी 8 हफ्तों में अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपनी है।
इस आदेश की निगरानी कौन करेगा?
जिला मजिस्ट्रेट और ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर को हर महीने स्कूलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। सभी जिला कलेक्टरों को ग्रामीण स्कूलों का औचक निरीक्षण कर 8 सप्ताह में रिपोर्ट देनी होगी।
कोर्ट ने 2020 की गाइडलाइंस का ज़िक्र क्यों किया?
स्कूलों में सुरक्षित और संतुलित भोजन के लिए 2020 में गाइडलाइंस बनाई गई थीं, लेकिन 6 वर्ष से अधिक समय बाद भी उनका प्रभावी पालन नहीं हो रहा था। कोर्ट ने इसी निष्क्रियता पर नाराज़गी जताते हुए अब बाध्यकारी समयसीमा के साथ नए निर्देश जारी किए।
क्या इस आदेश में ग्रामीण स्कूलों के लिए भी कोई निर्देश हैं?
हाँ, कोर्ट ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों में खाली शिक्षण पदों को भरने, स्मार्ट क्लासरूम, इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य जाँच, शौचालय, पेयजल और खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के भी निर्देश दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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