महाराष्ट्र: स्कूलों के 500 मीटर दायरे में हाई एनर्जी ड्रिंक्स पर बैन, FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की राज्यव्यापी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 3 जुलाई 2026 को राज्य विधानसभा में घोषणा की कि पूरे राज्य में स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में 'स्टिंग' जैसे हाई एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) मंत्री नरहरी जिरवाल ने यह आश्वासन दिया कि यह प्रतिबंध नशीले पदार्थों के साथ-साथ कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक्स पर भी लागू होगा, और उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में कैसे उठा मुद्दा
भाजपा विधायक विक्रम पचपुते ने सदन में यह मामला उठाते हुए कहा कि हाई एनर्जी ड्रिंक्स की बोतलों पर स्वयं चेतावनी अंकित होती है कि ये उत्पाद बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इसके बावजूद इन्हें स्कूल परिसरों के ठीक बाहर खुलेआम बेचा जा रहा है।
पचपुते ने तर्क दिया कि यद्यपि ये पेय तकनीकी रूप से कुछ विनिर्माण मानकों का पालन करते हैं, फिर भी स्कूली बच्चों में इनकी लत तेज़ी से बढ़ रही है। उनके अनुसार, दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों के मामले में ये ड्रिंक्स शराब से भी अधिक हानिकारक साबित हो सकते हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक निर्देश
मंत्री नरहरी जिरवाल ने स्वीकार किया कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास बड़े पैमाने पर इन पेयों की बिक्री हो रही है। उन्होंने विधानसभा को बताया कि 3 अक्टूबर 2024 और 17 सितंबर 2025 को जारी प्रशासनिक परिपत्रों के अनुसार, अधिकारियों को निम्नलिखित निर्देश दिए जा चुके हैं — शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे में विक्रेताओं का निरीक्षण करना, प्रयोगशाला विश्लेषण के लिए खाद्य नमूने एकत्र करना और भ्रामक विज्ञापनों के विरुद्ध कार्रवाई करना।
प्रशासन ने लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि भले ही 'एनर्जी ड्रिंक्स' शब्द को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है, किंतु इन उत्पादों को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (फूड प्रोडक्ट्स स्टैंडर्ड्स एंड फूड एडिटिव्स) रेगुलेशंस, 2011 के अंतर्गत 'नॉन-अल्कोहलिक कैफिनेटेड बेवरेजेज' के रूप में विनियमित किया जाता है।
बहस का विस्तार: नशे और मिलावट पर भी चिंता
भाजपा विधायक राहुल कुल ने इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए स्कूलों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री और खाद्य पदार्थों में मिलावट की व्यापक जाँच की माँग की। उन्होंने बताया कि फ्लेवर्ड पान के पत्तों की आड़ में नशीले पदार्थ बेचे जाते हैं। साथ ही, उन्होंने अत्यधिक चीनी और कृत्रिम रासायनिक एडिटिव्स वाले फ्लेवर्ड दूध उत्पादों पर भी चिंता जताई।
मंत्री जिरवाल ने पुष्टि की कि FDA की देखरेख में इन उत्पादों की उच्चस्तरीय आंतरिक जाँच पहले से ही जारी है।
FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की राज्यव्यापी मुहिम
यह विधायी चर्चा उस दिन हुई जब FDA के नवनियुक्त कमिश्नर तुकाराम मुंडे विधान भवन पहुँचे। मुंडे ने 25 मई को FDA का कार्यभार संभाला था और उन्हें जीरो-टॉलरेंस नीति के लिए जाना जाता है।
उनके नेतृत्व में FDA ने प्रतिबंधित गुटखा, पान मसाला और अस्वच्छ खाद्य प्रतिष्ठानों के विरुद्ध पूरे राज्य में एक बड़ा अभियान छेड़ा है। इस अभियान के तहत मुंबई के छह प्रमुख होटलों, रेस्टोरेंट, बेकरी और क्लबों के फूड सेफ्टी लाइसेंस खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के कारण निलंबित किए जा चुके हैं।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में बच्चों के बीच हाई-कैफीन पेयों की बढ़ती खपत को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। 500 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र को व्यावहारिक रूप से लागू करना और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करना FDA के लिए अगली बड़ी परीक्षा होगी। राज्य के अन्य ज़िलों में भी इस अभियान के विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।