राजस्थान में मानसिक स्वास्थ्य की वैज्ञानिक पहचान के लिए GMHAT वेब टूल लॉन्च, तीन मेडिकल कॉलेजों से शुरुआत
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान सरकार ने 31 जुलाई 2026 को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए ग्लोबल मेंटल हेल्थ असेसमेंट टूल (GMHAT) — एक वेब-बेस्ड डिजिटल असेसमेंट प्लेटफॉर्म — को लॉन्च किया है। यह टूल मानसिक बीमारियों की समय पर, सबूत-आधारित पहचान सुनिश्चित करेगा और टेलीमेडिसिन के ज़रिए दूरदराज़ के मरीज़ों को मनोरोग विशेषज्ञों से जोड़ेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बजट घोषणा के तहत 'मेंटल हेल्थ फॉर ऑल' पहल के अंतर्गत शुरू किए गए इस कार्यक्रम का नाम 'राज ममता' रखा गया है।
GMHAT क्या है और कैसे काम करता है
GMHAT एक व्यवस्थित वेब-बेस्ड असेसमेंट प्लेटफॉर्म है जो पूर्व-निर्धारित प्रश्नों के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों को मरीज़ का मानकीकृत साक्षात्कार लेने में सहायता करता है। असेसमेंट पूरी होते ही सिस्टम स्वचालित रूप से एक विस्तृत डायग्नोस्टिक रिपोर्ट तैयार करता है, जिससे चिकित्सक संभावित मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर इलाज की सबसे उपयुक्त दिशा तय कर सकते हैं।
राजस्थान चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि इस टूल को पहले चरण में जयपुर मेडिकल कॉलेज, जोधपुर मेडिकल कॉलेज और एम्स जोधपुर में लागू किया जाएगा। इसके बाद इसे राजस्थान के सभी जिलों तक विस्तारित किया जाएगा।
राज ममता कार्यक्रम की पृष्ठभूमि
चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिंवसर ने कहा कि राज्य सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जल्द पता लगाने और उनके इलाज के लिए एक वैज्ञानिक, तकनीक-आधारित प्रणाली शुरू की है। 'राज ममता' कार्यक्रम का उद्देश्य डिप्रेशन, एंग्जायटी और आत्महत्या की रोकथाम करना है।
गायत्री राठौड़ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान अब सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक बढ़ती हुई प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि एक मानकीकृत असेसमेंट टूल के अभाव में अब तक पहचान में देरी होती थी, जिससे समय पर इलाज संभव नहीं हो पाता था।
टेलीमेडिसिन से ग्रामीण मरीज़ों को राहत
जिन मरीज़ों को विशेषज्ञ देखभाल की आवश्यकता होगी, वे टेलीमेडिसिन के ज़रिए तत्काल मनोरोग विशेषज्ञों (साइकियाट्रिस्ट) से परामर्श ले सकेंगे। इससे दूरदराज़ और ग्रामीण इलाकों के लोग बिना लंबी यात्रा किए विशेषज्ञ मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्राप्त कर सकेंगे — जो भारत जैसे विशाल देश में स्वास्थ्य समानता की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और मानव संसाधन की भारी कमी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
डेटा-आधारित निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
राठौड़ के अनुसार, यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पूरे राज्य में मानसिक स्वास्थ्य के रुझानों की डेटा-आधारित निगरानी में भी सहायक होगा। इससे मानसिक बीमारियों के प्रसार, गंभीरता और भौगोलिक वितरण का आकलन किया जा सकेगा, जिससे राज्य सरकार स्थानीय ज़रूरतों के आधार पर सेवाओं की योजना बना सकेगी।
इस पहल को लागू करने पर चर्चा के लिए चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ और मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मैनचेस्टर विश्वविद्यालय से कैथरीन रॉबिन्सन और विमल शर्मा, यूनिसेफ राजस्थान के स्वास्थ्य विशेषज्ञ अनिल अग्रवाल, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) के राज्य नोडल अधिकारी एस.एम. स्वामी तथा चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (DRME) से रश्मि गुप्ता और मोनिका सिंह शामिल थे।
आगे की राह
GMHAT को चरणबद्ध तरीके से पूरे राजस्थान में लागू किया जाएगा। तीन प्रमुख मेडिकल संस्थानों में पायलट के बाद मिले अनुभव के आधार पर इसे राज्य के सभी जिलों तक पहुँचाने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस चरणबद्ध क्रियान्वयन से मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ अधिक सुलभ, कुशल और प्रमाण-आधारित बन सकेंगी।