संजय राउत का बड़ा दावा: केंद्र सरकार 'ईस्ट इंडिया कंपनी' जैसी व्यवस्था लागू करने की कोशिश में
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि देश में एक बार फिर 'ईस्ट इंडिया कंपनी' जैसी व्यवस्था लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह सरकार सत्ता में बनी रही तो अराजकता अवश्यंभावी है।
राउत की चेतावनी और सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा
राउत ने कहा, 'मैंने पहले भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि अराजकता फैलेगी — मैं आज फिर कह रहा हूँ, हाँ, अराजकता फैलेगी। यदि यह सरकार सत्ता में बनी रहती है तो यह तय है।' उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में संज्ञान लेने की माँग की और कहा कि उनकी पार्टी ने न्यायपालिका में पूरा भरोसा जताया है, क्योंकि उनके अनुसार यही एकमात्र संस्था है जो देश को बचाने में सक्षम है।
तिरंगे पर विवाद और 'ईस्ट इंडिया कंपनी' का आरोप
राउत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तिरंगा फहराने का विरोध करती है, जो उनके अनुसार यह दर्शाता है कि यह सरकार 'राष्ट्रवादियों या देशभक्तों' की नहीं है। उन्होंने कहा, 'अगर हम अपने ही देश में तिरंगा नहीं फहरा सकते तो हमें किसका झंडा फहराना चाहिए?' राउत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी इसी तरह की प्रवृत्ति अपनाने का आरोप लगाया।
अमित शाह के ड्रग्स बयान पर तंज
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ड्रग्स संबंधी बयान पर राउत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह एक बड़ा विरोधाभास है — जिनके शासनकाल में कथित तौर पर ड्रग तस्करी सबसे अधिक बढ़ी, वे ही इस तरह के बयान दे रहे हैं। गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने पिछले कुछ वर्षों में ड्रग तस्करी के आँकड़ों का हवाला देते हुए सरकार को कई बार घेरा है।
आरएसएस प्रमुख के बयान पर राउत की व्याख्या
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान को राउत ने अपने राजनीतिक अभियान से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि भागवत के मन में भी सत्ता परिवर्तन की इच्छा है और उनके बयान इसी ओर संकेत करते हैं। राउत के अनुसार, 'आप भी मानते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार बेहतर थी।' हालाँकि, आरएसएस की ओर से इस व्याख्या पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं थी।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी गठबंधन केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश कर रहा है। राउत के बयान शिवसेना (यूबीटी) की आक्रामक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं, जो आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए जनमत तैयार करने पर केंद्रित है। सर्वोच्च न्यायालय में पार्टी की याचिका और आंदोलन की दिशा अगले कुछ हफ्तों में राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है।