क्या सरदार पटेल मेरे जीवन की प्रेरणा हैं: मनसुख मांडविया?

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क्या सरदार पटेल मेरे जीवन की प्रेरणा हैं: मनसुख मांडविया?

सारांश

गुजरात की पदयात्रा ने वडोदरा में अपने पांचवे दिन में कई गतिविधियों का आयोजन किया। सरदार पटेल की प्रेरणा से जनभागीदारी बढ़ी। जानिए इस पदयात्रा में क्या हुआ खास और किस तरह यह सरदार पटेल के मूल्यों को जीवित रख रही है।

Key Takeaways

  • पदयात्रा ने 72 किलोमीटर की दूरी तय की।
  • वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान में जनभागीदारी।
  • सरदार पटेल के मूल्यों को जीवित रखने का प्रयास।
  • कई प्रमुख नेताओं की उपस्थिति।
  • आत्मनिर्भरता और एकता का संदेश।

वडोदरा, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात में पदयात्रा ने रविवार को अपने पांचवे दिन में कदम रखा। यह पदयात्रा वडोदरा शहर पहुँची, जहाँ वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सरदार गाथा और ग्राम सभा जैसी अनेक गतिविधियों में उत्साही जनभागीदारी देखी गई। अब तक यह पदयात्रा सामूहिक रूप से 72 किलोमीटर की दूरी तय कर चुकी है और सरदार पटेल के राष्ट्रीय एकता तथा नागरिक उत्तरदायित्व के संदेश को फैलाने का कार्य जारी है।

दिन की शुरुआत अरबिंदो आश्रम में योगाभ्यास से हुई, इसके बाद केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर की अगुवाई में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधारोपण किया गया। इस अभियान में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनने वाली व्यापक भागीदारी देखी गई।

पांचवे दिन का मार्ग अरबिंदो आश्रम से नवलखी ग्राउंड, खंडेराव मार्केट क्रॉस रोड, कीर्ति स्तंभ, प्रतिमा पुष्पाजलि (एफटीई कॉलेज), वडोदरा शहर का विस्तार, भारतीय विद्या भवन, मकरपुरा बस प्वाइंट, जंबुवा (आइडियल स्कूल), आलमगीर (हनुमान मंदिर), और बाबरिया कॉलेज (केपीजीयू) से होते हुए अंत में त्रिमंदिर, वर्नामा में समाप्त हुआ।

जम्बुवा, आइडियल स्कूल में आयोजित सरदार गाथा का विषय था "सरदार गाथा- आधुनिक भारत के निर्माता।" इस दौरान विशेष प्रदर्शनी, "सरदार और मजदूर संघ-मजदूरों की आवाज," ने श्रमिक अधिकारों को सुदृढ़ करने, श्रमिक आंदोलनों को एकजुट करने और भारत के आधुनिक प्रशासनिक ढांचे के लिए किए गए संगठनात्मक सुधारों में सरदार पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित किया।

कार्यक्रम में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और सांसद हेमांग जोशी सहित अन्य प्रमुख नेता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने राष्ट्रव्यापी समारोहों पर अपने विचार साझा किए और इस बात पर जोर दिया कि पदयात्राएं आत्मनिर्भर भारत और एक भारत श्रेष्ठ भारत की प्रेरक भावना को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने नागरिकों को सरदार पटेल के आत्मनिर्भरता, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के संदेश की याद दिलाई।

उन्होंने यह भी कहा कि सरदार पटेल मेरे जीवन की प्रेरणा हैं और जन सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का स्थायी प्रभाव भारत के लौह पुरुष के रूप में उजागर करता है।

वेंकैया नायडू ने पदयात्रा के आयोजन में सरकार के प्रयासों की सराहना की और कहा कि भारत का उत्थान एकता, सहयोग और दूरदर्शी नेतृत्व से प्रेरित है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत आज अमेरिका और चीन जैसी वैश्विक शक्तियों के बीच आत्मविश्वास से खड़ा है। नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने भारत की सांस्कृतिक सद्भावना की भावना को दोहराया, कहा, "अलग भाषा, अलग वेश, फिर भी अपना एक देश।"

Point of View

यह स्पष्ट है कि सरदार पटेल की विरासत और उनके सिद्धांत आज भी हमारे समाज में गूंजते हैं। पदयात्रा जैसे आयोजनों से न केवल नागरिकों को जागरूक किया जाता है, बल्कि एकता और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा दिया जाता है।
NationPress
30/11/2025

Frequently Asked Questions

पदयात्रा का उद्देश्य क्या है?
इस पदयात्रा का उद्देश्य सरदार पटेल के संदेश को फैलाना और नागरिकों को एकजुट करना है।
इस पदयात्रा में कौन-कौन से कार्यक्रम हुए?
इसमें वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, और सरदार गाथा शामिल हैं।
कौन-कौन से नेता इस कार्यक्रम में शामिल हुए?
इसमें वेंकैया नायडू, डॉ. मनसुख मंडाविया, अन्नपूर्णा देवी और अन्य प्रमुख नेता शामिल थे।
क्या यह पदयात्रा पर्यावरण संरक्षण पर जोर देती है?
हां, इस पदयात्रा में वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं।
सरदार पटेल का संदेश क्या है?
सरदार पटेल का संदेश राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और आत्मनिर्भरता है।
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