राष्ट्रीय एकता दिवस: सरदार पटेल ने निजी काम पर सरकारी गाड़ी लेने से किया था इनकार, रिश्तेदार ने सुनाया ऐतिहासिक किस्सा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय एकता दिवस पर 31 अक्टूबर 2026 को सरदार वल्लभभाई पटेल के रिश्तेदार भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने एक ऐसा प्रसंग साझा किया जो लौह पुरुष की ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में उनके अटल सिद्धांतों को जीवंत कर देता है। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल ने निजी कार्य के लिए सरकारी वाहन का उपयोग करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था, यह मानते हुए कि जनता का धन केवल जनहित में व्यय होना चाहिए।
बारडोली सत्याग्रह के साथी से मुलाकात का प्रसंग
भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने 'मोदी स्टोरी' पर जारी एक वीडियो में यह किस्सा विस्तार से सुनाया। उन्होंने बताया कि बारडोली सत्याग्रह के दौरान एक व्यक्ति सरदार पटेल के करीबी सहयोगी रहे थे। एक बार जब सरदार पटेल नई दिल्ली में अपनी सरकारी गाड़ी से किसी काम से जा रहे थे, तो रास्ते में उन्हें वही परिचित व्यक्ति दिखे। उन्होंने तत्काल ड्राइवर को गाड़ी रोकने का निर्देश दिया और उस व्यक्ति को अपने पास बुलाया।
सरदार पटेल ने पूछा कि वह दिल्ली कैसे आए हैं। जवाब मिला कि वह भ्रमण के लिए आए हैं। इस पर सरदार पटेल उन्हें अपने आवास ले गए और दो दिनों तक दिल्ली के विभिन्न स्थलों की सैर कराई। गौरतलब है कि यह उनकी अपनी सरकारी गाड़ी से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से कराई गई सैर थी।
टैक्सी क्यों — जब गाड़ी पास में थी?
जब वह व्यक्ति वापस जाने को तैयार हुए, तो सरदार पटेल ने उनके लिए एक निजी टैक्सी का इंतज़ाम कराया। इस पर उस व्यक्ति ने स्वाभाविक जिज्ञासा से पूछा कि जब सरकारी गाड़ी उपलब्ध है, तो टैक्सी क्यों बुलाई जा रही है।
भूपेंद्र पटेल के अनुसार, सरदार पटेल ने उत्तर दिया कि उनके पास जो वाहन है वह सरकार की संपत्ति है और उसका उपयोग केवल सरकारी कार्यों के लिए ही किया जा सकता है। उन्होंने निजी प्रयोजन के लिए सरकारी वाहन लेने से साफ मना कर दिया। भूपेंद्र पटेल ने जोर देकर बताया कि सरदार पटेल ने जीवनभर सार्वजनिक धन का एक पैसा भी निजी काम पर नहीं लगाया।
प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ा अनुभव
भूपेंद्र पटेल ने इसी वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी मुलाकात का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पटेल परिवार को मिलने के लिए बुलाया, जबकि परिवार को इसकी कोई उम्मीद नहीं थी। भूपेंद्र पटेल ने कहा, "सच पूछिए तो हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि नरेंद्र भाई हमको याद करेंगे। लेकिन उन्होंने हम सबको बुलाया। छोटी छोटी बातों का भी नरेंद्र भाई ने ख्याल रखा।"
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सरदार पटेल की दूरदृष्टि और कार्यशैली से गहरे प्रभावित हैं और सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग को लेकर उनकी सोच भी सरदार पटेल की भावना के अनुरूप ही है।
सरदार पटेल का विरासत में मिला संदेश
राष्ट्रीय एकता दिवस — जो 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती पर मनाया जाता है — के अवसर पर यह प्रसंग विशेष प्रासंगिकता रखता है। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा सरकारी संसाधनों के उपयोग की जवाबदेही को लेकर राष्ट्रीय विमर्श जारी है। भूपेंद्र पटेल ने कहा कि सरदार पटेल को आज तक इतना बड़ा सम्मान किसी ने नहीं दिया जितना मिलना चाहिए था। यह किस्सा भावी पीढ़ियों के लिए सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा का जीवंत उदाहरण बना रहेगा।