31 अक्टूबर 2026
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गोमाता पर इजरायली धर्मगुरु की टिप्पणी से भड़के अयोध्या के संत, परमहंस आचार्य बोले — माफी माँगे या हो कड़ी कार्रवाई

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गोमाता पर इजरायली धर्मगुरु की टिप्पणी से भड़के अयोध्या के संत, परमहंस आचार्य बोले — माफी माँगे या हो कड़ी कार्रवाई

सारांश

अयोध्या धाम के संतों ने एकजुट होकर इजरायली धर्मगुरु की गोमाता पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। परमहंस आचार्य ने श्रीराम की जन्मभूमि से इजरायल के प्रधानमंत्री को सीधा संदेश दिया — माफी माँगो या कार्रवाई हो।

मुख्य बातें

जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने 31 अक्टूबर 2026 को अयोध्या से एक इजरायली धर्मगुरु की गोमाता पर टिप्पणी की कड़ी निंदा की।
परमहंस आचार्य ने इजरायल के प्रधानमंत्री से माँग की कि संबंधित धर्मगुरु सार्वजनिक माफी माँगे अथवा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो।
महंत सीताराम दास जी महाराज , महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज और महंत योगानंद गिरी महाराज सहित कई संतों ने एकजुट होकर आपत्ति दर्ज की।
परमहंस आचार्य ने याद दिलाया कि हाल के संघर्ष में भारतीय पायलटों ने जान जोखिम में डालकर इजरायली नागरिकों को बचाया था।
संबंधित इजरायली धर्मगुरु की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अयोध्या धाम के तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने 31 अक्टूबर 2026 को एक इजरायली धर्मगुरु द्वारा गोमाता पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की कड़ी निंदा की और इजरायल के प्रधानमंत्री से माँग की कि संबंधित व्यक्ति या तो सार्वजनिक रूप से क्षमा माँगे अथवा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। परमहंस आचार्य ने यह बात भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या से कही, जिसे उन्होंने इस माँग के लिए प्रतीकात्मक रूप से चुना।

संतों की तीखी प्रतिक्रिया

महंत सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि इजरायली धर्मगुरु की यह टिप्पणी 'अज्ञानता, मूर्खता और बेवकूफी से भरी हुई' है। उन्होंने कहा, 'ऐसे लोग सनातन संस्कृति को क्या जानेंगे? 'गावो विश्वस्य मातरः' — गाय संपूर्ण विश्व की माता है।' उन्होंने यह भी कहा कि गोमूत्र स्वास्थ्यवर्धक है और जन-जन को निरोगी बनाने में सहायक है।

महंत सीताराम दास ने इजरायल में हुई हालिया घटनाओं का भी हवाला देते हुए कहा कि सनातनियों ने हमेशा इजरायल को भारत का मित्र माना, लेकिन ऐसी टिप्पणी करने वाले व्यक्ति की मानसिकता उनके अनुसार 'देशद्रोही और नक्सलवादी सोच' की परिचायक है।

महामंडलेश्वर और अन्य संतों का आक्रोश

महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने कहा कि जिस धर्मगुरु ने गोमाता का मज़ाक उड़ाया, वह किसी भी धर्म को नहीं मानता। उन्होंने कहा कि गोमूत्र और गोबर औषधीय गुणों से युक्त हैं और पवित्र माने जाते हैं। उनके अनुसार ऐसी मानसिकता 'आतंकवाद जैसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने वाली' है।

अष्ट कौशल महंत योगानंद गिरी महाराज ने कहा कि इस टिप्पणी ने 'बेशर्मी की पराकाष्ठा को पार' किया है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा किसी के जन्म लेने से पहले से अस्तित्व में है और उस पर इस प्रकार की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है।

परमहंस आचार्य की अपील — इजरायली PM से माँग

जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने कहा कि यदि इजरायल में कोई धर्मगुरु इस प्रकार की टिप्पणी करता है, तो वह निश्चित रूप से वहाँ की मूल संस्कृति का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। उन्होंने याद दिलाया कि हाल के संघर्ष के दौरान भारतीय पायलटों ने अपनी जान जोखिम में डालकर इजरायली नागरिकों को सुरक्षित बचाया था।

उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि संबंधित धर्मगुरु को या तो सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए या उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। परमहंस आचार्य ने यह भी कहा कि भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम' की संस्कृति विश्वगुरु की भूमिका निभाती रही है और आगे भी निभाती रहेगी।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह प्रतिक्रिया अयोध्या के वरिष्ठ संतों की सामूहिक आवाज़ के रूप में सामने आई है। संतों की इस माँग के बाद यह देखना होगा कि भारत-इजरायल के धार्मिक-कूटनीतिक संबंधों पर इसका कोई असर पड़ता है या नहीं। फ़िलहाल इजरायली धर्मगुरु की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इजरायली धर्मगुरु का पूरा संदर्भ और उनकी टिप्पणी की सटीक प्रकृति अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है, जो इस पूरे प्रकरण को और जटिल बनाती है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इजरायली धर्मगुरु ने गोमाता पर क्या टिप्पणी की थी?
स्रोत के अनुसार एक इजरायली धर्मगुरु ने गोमाता को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक बयान दिया, जिसे अयोध्या के संतों ने 'सनातन संस्कृति का अपमान' बताया। टिप्पणी का सटीक शब्दांकन अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं हुआ है।
परमहंस आचार्य ने इजरायल के PM से क्या माँग की?
जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज ने अयोध्या धाम से इजरायल के प्रधानमंत्री से माँग की कि संबंधित धर्मगुरु या तो सार्वजनिक रूप से क्षमा माँगे, अथवा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
भारतीय पायलटों का इस विवाद से क्या संबंध है?
परमहंस आचार्य ने यह याद दिलाया कि हाल के इजरायली संघर्ष के दौरान भारतीय पायलटों ने अपनी जान जोखिम में डालकर इजरायली नागरिकों को बचाया था। उन्होंने इसे इस टिप्पणी के संदर्भ में भारत के प्रति इजरायल की कृतज्ञता की याद दिलाने के रूप में प्रस्तुत किया।
इस विवाद में अयोध्या के कितने और कौन-से संत शामिल हुए?
इस प्रतिक्रिया में अयोध्या धाम के कई प्रमुख संत शामिल हुए — जगद्गुरु परमहंस आचार्य जी महाराज, महंत सीताराम दास जी महाराज, महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज और अष्ट कौशल महंत योगानंद गिरी महाराज। सभी ने एकजुट होकर निंदा की।
क्या इजरायली धर्मगुरु ने अब तक कोई प्रतिक्रिया दी है?
31 अक्टूबर 2026 तक संबंधित इजरायली धर्मगुरु की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या खंडन सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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