11 जुलाई 2026
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राम मंदिर पर बोलने का हक सिर्फ हिंदुओं को: आचार्य प्रमोद कृष्णम का विपक्ष पर तीखा हमला

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राम मंदिर पर बोलने का हक सिर्फ हिंदुओं को: आचार्य प्रमोद कृष्णम का विपक्ष पर तीखा हमला

सारांश

आचार्य प्रमोद कृष्णम का दो-टूक बयान — राम मंदिर पर बोलने का हक सिर्फ हिंदुओं को। विपक्ष पर आरोप: 2027 के यूपी चुनाव जीतने के लिए हिंदुओं को बाँटने की कोशिश। योगी के बयान का समर्थन, अखिलेश के 'सनातन-समाजवाद' दावे को खारिज किया।

मुख्य बातें

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 11 जुलाई को मुरादाबाद में कहा कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर पर बोलने का अधिकार केवल हिंदुओं को है।
उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले राम मंदिर के मुद्दे के राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'पिछली सरकारें मंदिरों पर हमले की योजना बनाती थीं' वाले बयान का समर्थन किया।
अखिलेश यादव के 'सनातन धर्म और समाजवाद एक हैं' के दावे को खारिज करते हुए उनकी तुलना राहुल गांधी से की।
'वंदे मातरम' को स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बताते हुए गृह मंत्रालय की कथित गाइडलाइंस का स्वागत किया।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों की भागीदारी को संवैधानिक अधिकार बताया।

आध्यात्मिक गुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम ने शनिवार, 11 जुलाई को मुरादाबाद में स्पष्ट शब्दों में कहा कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर और भगवान श्री राम के विषय में बोलने का नैतिक अधिकार केवल हिंदुओं को है। उनका तर्क था कि जिन दलों ने कभी राम मंदिर निर्माण का समर्थन नहीं किया, वे अब इस मुद्दे पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं।

विपक्ष पर सीधा प्रहार

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, 'श्री राम जन्मभूमि मंदिर और भगवान श्री राम के बारे में बात करने का अधिकार सिर्फ हिंदुओं को है। विपक्ष को इस मंदिर पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि उन्होंने कभी भी राम मंदिर के निर्माण का समर्थन नहीं किया।' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और समूचा विपक्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ के लिए राम मंदिर के मुद्दे का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विपक्ष की रणनीति हिंदुओं को गुमराह करके और उन्हें आपस में बाँटकर 2027 का चुनाव जीतने की है। उनके अनुसार, विपक्ष यह मानता है कि यदि हिंदू एकजुट रहे, तो उनके लिए चुनाव जीतना संभव नहीं होगा।

योगी के बयान पर समर्थन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछली सरकारें मंदिरों पर हमले की योजना बनाती थीं — आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पूर्ण समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे प्रदेश में चुनाव निकट आ रहे हैं, समाजवादी पार्टी को लगता है कि वह हिंदुओं को बाँटकर सत्ता हासिल कर सकती है। उनके शब्दों में, 'मंदिरों पर हमला करना समाजवादी पार्टी की पुरानी आदत रही है, इसलिए मुख्यमंत्री ने जो कहा, वह सही है।'

अखिलेश यादव और सनातन धर्म पर टिप्पणी

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस दावे पर कि सनातन धर्म और समाजवाद एक ही हैं, आचार्य प्रमोद कृष्णम ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का समाजवाद के वास्तविक आदर्शों से कोई संबंध नहीं है। उनके अनुसार, राम मनोहर लोहिया और अखिलेश यादव के बीच वही रिश्ता है, जो महात्मा गांधी और राहुल गांधी के बीच है।

वंदे मातरम और वक्फ बोर्ड पर रुख

केंद्रीय गृह मंत्रालय की कथित 'वंदे मातरम' गाइडलाइंस पर बोलते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस नारे को भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बताया। उन्होंने कहा, 'वंदे मातरम भारत की आत्मा की आवाज है — जो भी भारत का है और भारत में विश्वास रखता है, वह इसे अवश्य कहेगा।' उनके अनुसार, गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस देश को मजबूत करेंगी।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष साजिद रशीदी की विवादित टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इस्लाम महिलाओं के सम्मान की शिक्षा देता है और रशीदी को पहले इस्लाम की सच्ची शिक्षाओं को समझना चाहिए। वक्फ कमेटियों में गैर-मुसलमानों को शामिल करने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के तहत गठित किसी भी बोर्ड में हर भारतीय नागरिक को सेवा करने का अधिकार है।

यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो रही है और राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्पष्ट करता है कि राम मंदिर का मुद्दा राजनीतिक रूप से अभी भी उतना ही संवेदनशील है जितना 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले था। गौरतलब है कि राम मंदिर के उद्घाटन के बाद भाजपा को अयोध्या की सीट पर ही हार का सामना करना पड़ा था — यह तथ्य बताता है कि धार्मिक प्रतीकों को राजनीतिक हथियार बनाना हमेशा अपेक्षित परिणाम नहीं देता। विपक्ष पर 'हिंदुओं को बाँटने' का आरोप और योगी के विवादित बयान का समर्थन — दोनों मिलकर एक ऐसी राजनीतिक भाषा गढ़ते हैं जो ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ऐसे बयानों को अलग-थलग रिपोर्ट करती है, जबकि इनका संचयी प्रभाव चुनावी विमर्श को आकार देता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राम मंदिर पर क्या कहा?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 11 जुलाई को मुरादाबाद में कहा कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर और भगवान श्री राम के बारे में बोलने का अधिकार सिर्फ हिंदुओं को है। उनका तर्क था कि जिन दलों ने राम मंदिर निर्माण का कभी समर्थन नहीं किया, उन्हें इस पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार नहीं है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि वे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ के लिए राम मंदिर के मुद्दे का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके अनुसार, विपक्ष की रणनीति हिंदुओं को गुमराह करके और उन्हें बाँटकर चुनाव जीतने की है।
अखिलेश यादव के 'सनातन और समाजवाद एक हैं' के दावे पर उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस दावे को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का समाजवाद के वास्तविक आदर्शों से कोई संबंध नहीं है और राम मनोहर लोहिया व अखिलेश यादव के बीच वही रिश्ता है जो महात्मा गांधी और राहुल गांधी के बीच है।
'वंदे मातरम' गाइडलाइंस पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का क्या रुख है?
उन्होंने 'वंदे मातरम' को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक और देश की आत्मा की आवाज बताया। उनके अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय की कथित गाइडलाइंस देश को मजबूत करेंगी और भारतीयता की भावना को बढ़ाएंगी।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों की भागीदारी पर उनका क्या मत है?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि भारतीय संविधान के तहत गठित किसी भी बोर्ड में हर भारतीय नागरिक को सेवा करने का अधिकार है। उनके अनुसार, वक्फ बोर्ड भी इसका अपवाद नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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