31 अक्टूबर 2026
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सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे: बाज़ार की पहुँच और निवेशक सुरक्षा हमारी दोहरी प्राथमिकता

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सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे: बाज़ार की पहुँच और निवेशक सुरक्षा हमारी दोहरी प्राथमिकता

सारांश

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कोलकाता में स्पष्ट किया कि नियामक बाज़ार पहुँच और निवेशक सुरक्षा — दोनों को एक साथ आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। पश्चिम बंगाल में निवेशक संख्या 12 लाख से 90 लाख पार और एसएमई आईपीओ से ₹1,400 करोड़ की पूंजी — यह बताता है कि बाज़ार अब सिर्फ महानगरों की कहानी नहीं रही।

मुख्य बातें

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 31 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में 'भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स इन्वेस्टर्स फोरम' को संबोधित किया।
पिछले एक दशक में कंपनियों ने प्रतिवर्ष औसतन ₹10 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी इक्विटी और डेट के ज़रिए जुटाई।
पश्चिम बंगाल में प्रतिभूति बाज़ार के निवेशक 12 लाख से बढ़कर 90 लाख से अधिक हो गए; 36% निवेशक 30 वर्ष से कम आयु के।
राज्य की 40 से अधिक MSME कंपनियों ने SME IPO के ज़रिए ₹1,400 करोड़ से अधिक जुटाए।
सेबी ने IPO सरलीकरण, ESOP अनुमति, राइट्स इश्यू की कम समय सीमा और कम फेस वैल्यू डेट सिक्योरिटीज़ जैसे कई सुधार लागू किए।
पांडे ने कहा — असली पैमाना बाज़ार का आकार नहीं, बल्कि बचत को उत्पादक निवेश से जोड़ने की क्षमता है।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 31 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में स्पष्ट किया कि पूंजी बाज़ार नियामक भारत के वित्तीय बाज़ारों को अधिक सुलभ, कुशल और लचीला बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि पूंजी निर्माण को सहज बनाना, कारोबारी सुगमता सुधारना और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना — ये तीनों लक्ष्य साथ साथ चल रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

'भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स इन्वेस्टर्स फोरम' में बोलते हुए पांडे ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत का बाज़ार पूंजीकरण (market capitalisation) उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। इस अवधि में कंपनियों ने इक्विटी और डेट जारी करके प्रतिवर्ष औसतन ₹10 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी जुटाई है।

पांडे ने कहा, "विश्व स्तरीय बाज़ारों को न केवल सामान्य परिस्थितियों में कुशल होना चाहिए, बल्कि तनाव के दौर में भी मज़बूत बने रहना चाहिए।" उन्होंने जोर दिया कि जागरूक निवेशक ही सुरक्षा की पहली पंक्ति होते हैं, इसलिए वित्तीय शिक्षा सेबी की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।

पश्चिम बंगाल में बाज़ार भागीदारी का विस्तार

पांडे ने पूंजी बाज़ारों में पश्चिम बंगाल की बढ़ती सहभागिता को रेखांकित किया। उनके अनुसार राज्य में प्रतिभूति बाज़ार के निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2015 के लगभग 12 लाख से बढ़कर अब 90 लाख से अधिक हो गई है। इनमें से लगभग 36 प्रतिशत निवेशक 30 वर्ष से कम आयु के युवा हैं — यह संकेत देता है कि नई पीढ़ी बाज़ार में भरोसा जता रही है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 379 सूचीबद्ध कंपनियों के पंजीकृत कार्यालय हैं, और राज्य की 40 से अधिक एमएसएमई (MSME) कंपनियों ने एसएमई आईपीओ (SME IPO) के ज़रिए ₹1,400 करोड़ से अधिक की पूंजी जुटाई है।

सेबी के सुधार उपाय

सेबी प्रमुख ने बताया कि नियामक ने फंड जुटाने की प्रक्रिया को सरल और किफ़ायती बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें शामिल हैं:

— आईपीओ (IPO) प्रक्रियाओं का सरलीकरण; — राइट्स इश्यू की समय सीमा में कटौती; — बड़ी कंपनियों के लिए लिस्टिंग शर्तों का युक्तिसंगतकरण; — लिस्टिंग के बाद कुछ शर्तों के साथ ईएसओपी (ESOP) देने की अनुमति; — पब्लिक इश्यू की लिस्टिंग समय सीमा में कमी; — कम फेस वैल्यू वाली डेट सिक्योरिटीज़ जारी करने की सुविधा; और — पात्र कंपनियों के प्राइवेट प्लेसमेंट के लिए अनिवार्य मर्चेंट बैंकिंग शर्तों में छूट।

यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू खुदरा निवेशकों की पूंजी बाज़ार में सक्रियता तेज़ी से बढ़ रही है और सेबी पर नियामकीय संतुलन बनाए रखने का दबाव भी उतना ही बढ़ा है।

विश्व स्तरीय बाज़ार का असली पैमाना

पांडे ने अपने संबोधन के अंत में कहा, "विश्व स्तरीय पूंजी बाज़ार बनाने का अर्थ केवल अधिक बाज़ार पूंजीकरण, बड़ा ट्रेडिंग वॉल्यूम या तेज़ लेनदेन हासिल करना नहीं है। असली पैमाना यह है कि बाज़ार कितनी प्रभावी ढंग से बचत को उत्पादक निवेश से जोड़ते हैं, व्यवसायों को पूंजी जुटाने में मदद करते हैं, और निवेशकों को आर्थिक विकास में भागीदार बनने का अवसर देते हैं।"

आने वाले समय में सेबी की नीतियाँ इस दृष्टिकोण को कितनी व्यावहारिक रूप दे पाती हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा — विशेष रूप से उन छोटे और मध्यम निवेशकों के लिए जो पहली बार बाज़ार में कदम रख रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे नियामकीय प्राथमिकता के रूप में सार्वजनिक मंच से कहना संकेत देता है कि सेबी अपनी भूमिका केवल बाज़ार निगरानी तक सीमित नहीं मानता। हालाँकि, पश्चिम बंगाल में 90 लाख से अधिक निवेशकों की संख्या और उनमें 36% युवाओं की भागीदारी उत्साहजनक है, लेकिन खुदरा निवेशकों की शिकायतों का निपटान और F&O बाज़ार में छोटे निवेशकों के नुकसान जैसे मुद्दे अभी भी सेबी के लिए असली परीक्षा बने हुए हैं। एसएमई आईपीओ में बढ़ती गतिविधि स्वागत योग्य है, पर नियामकीय निगरानी की पर्याप्तता पर सवाल भी उतने ही ज़रूरी हैं।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कोलकाता में क्या कहा?
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 31 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में 'भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स इन्वेस्टर्स फोरम' में कहा कि सेबी बाज़ार की पहुँच बढ़ाने, कुशल पूंजी निर्माण सुनिश्चित करने और निवेशक सुरक्षा को मज़बूत करने पर एक साथ काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व स्तरीय बाज़ार का असली पैमाना बचत को उत्पादक निवेश से जोड़ने की क्षमता है।
पिछले एक दशक में भारत में कितनी पूंजी जुटाई गई?
सेबी चेयरमैन के अनुसार पिछले एक दशक में कंपनियों ने इक्विटी और डेट जारी करके प्रतिवर्ष औसतन ₹10 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी जुटाई है। यह आँकड़ा भारत के पूंजी बाज़ार की बढ़ती परिपक्वता और गहराई को दर्शाता है।
पश्चिम बंगाल में निवेशकों की संख्या कितनी बढ़ी है?
पांडे के अनुसार पश्चिम बंगाल में प्रतिभूति बाज़ार के निवेशक वित्त वर्ष 2015 के लगभग 12 लाख से बढ़कर अब 90 लाख से अधिक हो गए हैं। इनमें से लगभग 36 प्रतिशत निवेशक 30 वर्ष से कम आयु के युवा हैं, जो बाज़ार में युवा पीढ़ी की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
सेबी ने पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए क्या सुधार किए हैं?
सेबी ने आईपीओ प्रक्रियाओं का सरलीकरण, राइट्स इश्यू की समय सीमा में कटौती, लिस्टिंग के बाद ESOP देने की अनुमति, कम फेस वैल्यू वाली डेट सिक्योरिटीज़ की सुविधा और पात्र कंपनियों के प्राइवेट प्लेसमेंट में मर्चेंट बैंकिंग की अनिवार्य शर्तों में छूट जैसे कदम उठाए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य अनावश्यक अनुपालन बोझ कम करना और कारोबारी दक्षता बढ़ाना है।
पश्चिम बंगाल की MSME कंपनियों ने SME IPO से कितनी पूंजी जुटाई?
पश्चिम बंगाल की 40 से अधिक MSME कंपनियों ने SME IPO के माध्यम से ₹1,400 करोड़ से अधिक की पूंजी जुटाई है। साथ ही राज्य में 379 सूचीबद्ध कंपनियों के पंजीकृत कार्यालय हैं, जो पूंजी बाज़ार में पश्चिम बंगाल की महत्वपूर्ण उपस्थिति को रेखांकित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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