अयोध्या संत समाज का विपक्ष पर पलटवार: 'PM मोदी को हटाने की विदेशी साजिश', चंपत राय की बहाली की माँग
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में 23 जुलाई को संत समाज की बैठक के बाद राघवेश दास वेदांती और महंत सीताराम दास ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। संतों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाने के लिए एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है, जिसके पीछे विदेशी ताकतें सक्रिय हैं। बैठक में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की धार्मिक व्यवस्था, चंपत राय के इस्तीफे और नई धार्मिक समिति के गठन पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
षड्यंत्र का आरोप और विपक्ष पर निशाना
डॉ. राम विलास वेदांती जी महाराज के उत्तराधिकारी राघवेश दास वेदांती ने कहा कि देश में चल रहे आंदोलनों के पीछे विदेशी ताकतें हैं और इनसे कुछ हासिल नहीं होगा। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हटाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने कार्यकाल में देश के लिए वह काम किए हैं जो कांग्रेस 70 वर्षों में नहीं कर सकी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उन्होंने इस कथित षड्यंत्र का हिस्सा बताया।
यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई विपक्षी दलों के नेतृत्व में प्रदर्शन और आंदोलन जारी हैं। संतों का यह बयान अयोध्या की धार्मिक-राजनीतिक धुरी से निकला एक सीधा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
चंपत राय की बहाली की माँग
बैठक में सर्वसम्मति से राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के त्याग, तपस्या और निष्ठा की सराहना की गई। राघवेश दास वेदांती ने बताया कि संत समाज ने उन पर लगाए गए आरोपों की निंदा की है और उन्हें निर्दोष मानता है। संतों की माँग है कि एसआईटी की जाँच पूरी होने और क्लीन चिट मिलने पर चंपत राय को पुनः ट्रस्ट में महासचिव के पद पर बहाल किया जाए।
गौरतलब है कि संतों ने पहले भी उनका इस्तीफा स्वीकार न करने का आग्रह किया था, लेकिन प्रक्रिया के तहत इस्तीफा स्वीकार हो गया। अब संत समाज एक बार फिर ट्रस्ट से अनुरोध करेगा।
नई धार्मिक समिति का स्वागत
राघवेश दास वेदांती ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा अयोध्या के पाँच संतों को शामिल कर धार्मिक समिति गठित किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस समिति के माध्यम से रामानंदी वैष्णव परंपरा के अनुसार रामलला की पूजा-अर्चना, उत्सव और अन्य धार्मिक गतिविधियों का संचालन होगा।
समिति में राम वल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास, रामकुंज के डॉ. रामकमल दास, मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी कमलनयन दास और मिथिलेश नंदिनी शरण सहित अन्य संतों को स्थान दिया गया है। राघवेश दास वेदांती के अनुसार, इससे अयोध्या ही नहीं बल्कि पूरे देश का संत समाज प्रसन्न है और धार्मिक वातावरण और अधिक सकारात्मक होगा।
महंत सीताराम दास की तीखी प्रतिक्रिया
महंत सीताराम दास ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में सेंध लगाने का प्रयास किया, जिसे उन्होंने अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय बताया। उनके अनुसार, कुछ विपक्षी दल राम, सनातन और राष्ट्र विरोधी मानसिकता से प्रेरित हैं तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर से आर्थिक सहायता मिल रही है।
महंत ने कहा कि विदेशी फंडिंग के बल पर देश में अराजकता फैलाने और समाज को विभाजित करने की साजिश रची जा रही है। प्रशासन और पत्रकारों पर हमलों को भी उन्होंने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
सनातन धर्म और आगे की राह
महंत सीताराम दास ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य भगवान राम के प्रति भक्ति भावना को जन-जन तक पहुँचाना और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को मजबूत करना था। संत समाज उन लोगों से आहत है जिन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए या रामभक्तों के विरुद्ध हिंसा का समर्थन किया। संतों ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिश करने वालों को समय आने पर उचित जवाब मिलेगा। एसआईटी जाँच के नतीजे और ट्रस्ट का अगला कदम इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेंगे।