31 अक्टूबर 2026
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जबरन धर्मांतरण इस्लाम और कानून दोनों में अपराध: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, यूसीसी पर भी जताया विरोध

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जबरन धर्मांतरण इस्लाम और कानून दोनों में अपराध: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, यूसीसी पर भी जताया विरोध

सारांश

बरेली के著名 इस्लामी विद्वान मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने जबरन धर्मांतरण को इस्लाम और भारतीय कानून दोनों के विरुद्ध बताया और लखनऊ मेडिकल कॉलेज मामले में दोषियों पर कार्रवाई माँगी। साथ ही यूसीसी पर सभी समुदायों से परामर्श की शर्त रखी।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 31 अक्टूबर 2026 को कहा कि जबरन धर्मांतरण इस्लाम और भारतीय कानून दोनों में अपराध है।
लखनऊ मेडिकल कॉलेज धर्मांतरण मामले में जाँच के बाद दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की माँग।
हरिद्वार में 'मोहम्मद दीपक' विवाद पर मौलाना ने दीपक के साहस की सराहना की, किंतु शरीयत के अनुसार गैर-मुस्लिम द्वारा 'मोहम्मद' नाम के उपयोग पर आपत्ति जताई।
यूसीसी पर मौलाना ने कहा कि लागू करने से पहले सभी समुदायों की सहमति अनिवार्य; शरीयत में हस्तक्षेप करने वाला कानून मुसलमानों को मंजूर नहीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'बंटोगे तो कटोगे' बयान का समर्थन करते हुए हिंदू-मुस्लिम एकता और राष्ट्रीय अखंडता का आह्वान।

बरेली के著名 इस्लामी विद्वान मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 31 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट कहा कि किसी भी व्यक्ति को जबरदस्ती, दबाव या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराना न केवल भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध है, बल्कि इस्लाम की शिक्षाओं के भी सर्वथा विरुद्ध है। लखनऊ मेडिकल कॉलेज से जुड़े कथित धर्मांतरण प्रकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने जाँच पूरी होने के बाद दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की।

जबरन धर्मांतरण पर इस्लामी और कानूनी दृष्टिकोण

मौलाना रजवी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं और उनके जीवन का यही संदेश है कि धर्म-परिवर्तन पूरी तरह स्वैच्छिक, हार्दिक सहमति से होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म बदलता है तो यह उसका निजी निर्णय है और उसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन किसी पर दबाव बनाना या लालच देना इस्लाम की नजर में भी गुनाह है और कानून की नजर में भी अपराध।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के कई मामले सुर्खियों में हैं।

लखनऊ मेडिकल कॉलेज धर्मांतरण मामला

लखनऊ मेडिकल कॉलेज से जुड़े कथित जबरन धर्मांतरण प्रकरण पर मौलाना ने कहा कि यह मामला काफी समय से चर्चा में है और जाँच जारी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास यह साबित करने वाले तथ्य हैं कि किसी का धर्म परिवर्तन दबाव या प्रलोभन से कराया गया, तो ऐसा करने वाले व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई अनिवार्य है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत जबरन धर्मांतरण पहले से दंडनीय है।

हरिद्वार की घटना और 'मोहम्मद दीपक' विवाद

हरिद्वार में हुई एक घटना को लेकर उठे विवाद पर मौलाना ने बताया कि कुछ शरारती तत्वों ने एक मुस्लिम बुजुर्ग के साथ बदतमीजी और मारपीट की। उस समय वहाँ मौजूद उनके पड़ोसी दीपक ने आगे आकर बुजुर्ग का बचाव किया और हमलावरों से कहा कि वे बुजुर्ग की बजाय उनसे मुकाबला करें। जब नाम पूछा गया तो दीपक ने अपना नाम 'मोहम्मद दीपक' बताया। मौलाना ने दीपक के इस साहसिक कदम की सराहना की, परंतु धार्मिक दृष्टिकोण से आपत्ति जताते हुए कहा कि शरीयत के अनुसार किसी गैर-मुस्लिम को 'मोहम्मद' नाम का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पैगंबर-ए-इस्लाम का नाम है और मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र है।

यूसीसी पर विरोध और सभी समुदायों की सहमति की माँग

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के संकेत पर मौलाना रजवी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि यूसीसी लागू करने से पहले राज्य के सभी समुदायों और वर्गों से विधिवत परामर्श लिया जाना संवैधानिक बाध्यता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन राज्यों में यूसीसी लागू किया गया है, वहाँ मुसलमानों से उचित परामर्श नहीं हुआ और अनुसूचित जनजातियों तथा कुछ समुदायों को इससे अलग रखा गया, जो 'एक देश एक कानून' की अवधारणा पर ही प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कानून शरीयत के सिद्धांतों में दखल देगा, वह मुसलमानों को स्वीकार्य नहीं होगा।

हिंदू-मुस्लिम एकता और राष्ट्रीय अखंडता का आह्वान

मौलाना रजवी ने राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बहुचर्चित वाक्य 'बंटोगे तो कटोगे' का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस संदेश का सार यही है कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध — सभी को मिलकर रहना चाहिए। उन्होंने चेताया कि यदि देश का हर नागरिक कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहे तो कोई विदेशी ताकत भारत को तोड़ने में सफल नहीं हो सकती। यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता की चर्चा राजनीतिक विमर्श के केंद्र में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर यूसीसी को सामुदायिक वीटो की शर्त पर टिकाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या धार्मिक नेताओं के ऐसे बयान जमीनी स्तर पर सामाजिक व्यवहार बदल पाते हैं, या ये केवल राजनीतिक तनाव के बीच संतुलन साधने की कोशिश बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने जबरन धर्मांतरण पर क्या कहा?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि दबाव, जबरदस्ती या लालच देकर किसी का धर्म परिवर्तन कराना इस्लाम की शिक्षाओं और भारतीय कानून दोनों के तहत अपराध है। उनके अनुसार, पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाएँ यही कहती हैं कि धर्म-परिवर्तन पूरी तरह स्वैच्छिक और हार्दिक सहमति से होना चाहिए।
लखनऊ मेडिकल कॉलेज धर्मांतरण मामला क्या है?
लखनऊ मेडिकल कॉलेज से जुड़ा एक कथित जबरन धर्मांतरण प्रकरण काफी समय से चर्चा में है और जाँच जारी है। मौलाना रजवी ने माँग की है कि जाँच में दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों या संस्था के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
मौलाना रजवी ने उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू करने पर क्या रुख अपनाया?
मौलाना रजवी ने यूसीसी का विरोध करते हुए कहा कि इसे लागू करने से पहले राज्य के सभी समुदायों और वर्गों से सहमति लेना संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने यह भी कहा कि जो कानून शरीयत के सिद्धांतों में दखल देगा, वह मुसलमानों को कभी स्वीकार्य नहीं होगा।
हरिद्वार में 'मोहम्मद दीपक' विवाद क्या था?
हरिद्वार में कुछ शरारती तत्वों ने एक मुस्लिम बुजुर्ग के साथ मारपीट की, जिसका पड़ोसी दीपक ने बचाव किया। नाम पूछने पर उन्होंने खुद को 'मोहम्मद दीपक' बताया। मौलाना रजवी ने दीपक के साहस की सराहना की, लेकिन धार्मिक आधार पर कहा कि शरीयत के अनुसार किसी गैर-मुस्लिम को 'मोहम्मद' नाम का उपयोग नहीं करना चाहिए।
मौलाना रजवी ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर क्या संदेश दिया?
मौलाना रजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'बंटोगे तो कटोगे' वाक्य का समर्थन करते हुए कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी समुदायों को एकजुट होकर रहना चाहिए। उनका मानना है कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता से ही विदेशी ताकतों के भारत को तोड़ने के मंसूबों को नाकाम किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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