31 अक्टूबर 2026
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केजीएमयू धर्मांतरण मामला: एसटीएफ रिपोर्ट में प्रोफेसर-कर्मचारियों के नाम, यूपी सरकार ने कार्रवाई का आदेश दिया

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केजीएमयू धर्मांतरण मामला: एसटीएफ रिपोर्ट में प्रोफेसर-कर्मचारियों के नाम, यूपी सरकार ने कार्रवाई का आदेश दिया

सारांश

केजीएमयू में महिला डॉक्टरों के कथित धर्मांतरण और उत्पीड़न की जांच अब संस्थागत जवाबदेही तक पहुँच गई है — एसटीएफ की रिपोर्ट में प्रोफेसरों और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम हैं, और यूपी सरकार ने औपचारिक कार्रवाई का आदेश दे दिया है।

मुख्य बातें

यूपी सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को केजीएमयू को एसटीएफ रिपोर्ट में चिह्नित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई का औपचारिक निर्देश दिया।
एसटीएफ रिपोर्ट में पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी विभागों और गांधी वार्ड के कर्मचारियों की संलिप्तता के आरोप हैं।
सजीन को 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था; विशाखा समिति ने भी उन्हें दोषी पाया था।
जांच दिसंबर 2025 में दर्ज दो एफआईआर पर आधारित है — एक चौक थाने में, दूसरी कैसरबाग थाने में।
केजीएमयू कार्यकारी परिषद छह सदस्यीय जांच समिति गठित करेगी।
रिपोर्ट में 'इस्लामिक मेडिकोस' नामक कथित नेटवर्क और उससे जुड़े मेडिकल छात्रों का उल्लेख है।

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में महिला डॉक्टरों के कथित धर्मांतरण और उत्पीड़न की जांच में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की रिपोर्ट ने कई प्रोफेसरों, डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को जांच के दायरे में ला दिया है। 30 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार के संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी ने केजीएमयू रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर रिपोर्ट में चिह्नित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। यह मामला दो अलग-अलग एफआईआर से उपजा है, जो दिसंबर 2025 में लखनऊ के अलग-अलग थानों में दर्ज की गई थीं।

जांच का दायरा और एसटीएफ के निष्कर्ष

एसटीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, केजीएमयू के पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी विभागों और गांधी वार्ड में कार्यरत कर्मचारियों की संलिप्तता के आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट में कथित तौर पर लोगों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने, महिला डॉक्टरों को ब्लैकमेल करने, शिकायतकर्ताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और आरोपियों के खिलाफ शिकायतों को दबाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

रिपोर्ट में डॉ. सजीन पर कई महिला डॉक्टरों के साथ संबंध बनाकर उन पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप है। आरोपों से प्रभावित डॉक्टरों में डॉ. देवार्ती मित्रा, डॉ. मानसी सक्सेना, डॉ. कृतिका पांडे और डॉ. मुस्कान के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. सजीन को 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था।

नामित अधिकारी और फैकल्टी सदस्य

पैथोलॉजी विभाग में एसटीएफ ने विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश बाबू और एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुमैरा कय्यूम की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में आरोप है कि उन्होंने पीड़ित डॉक्टरों की शिकायतों को दबाया, आरोपियों का समर्थन किया और शिकायतकर्ताओं को प्रताड़ित किया।

इसके अतिरिक्त रिपोर्ट में वाइस-चांसलर के निजी सचिव एसएस अब्बास, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अब्बास अली मेहदी, प्रोफेसर उस्मान कौसर और बायोकेमिस्ट्री विभाग के कुछ फैकल्टी सदस्यों के आचरण पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन लोगों ने आरोपियों को बचाने और विभागीय फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की।

रेडियोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रिजवान पर महिला डॉक्टरों को ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पीड़ित महिलाओं को शिकायत दर्ज करने पर परीक्षाओं में फेल करने और करियर बर्बाद करने की धमकियाँ दी गई थीं।

माइक्रोबायोलॉजी और गांधी वार्ड के मामले

माइक्रोबायोलॉजी विभाग की संविदा कर्मचारी ज्योति राव के मामले में रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कर्मचारी शफात अली खान के खिलाफ छेड़छाड़, पीछा करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने की शिकायत दी थी। कथित तौर पर शिकायत के बावजूद खान के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई और उलटे ज्योति राव की ही संविदा सेवा समाप्त कर दी गई।

गांधी वार्ड के नर्सिंग स्टाफ से जुड़े आरोपों में नफीस पर ज्योति सिंह को और फुरकान पर जागृति गुप्ता को धर्म परिवर्तन कर निकाह करने के लिए दबाव डालने का आरोप है।

एफआईआर और प्रारंभिक शिकायतें

यह जांच दो एफआईआर पर आधारित है। पहली एफआईआर 23 दिसंबर 2025 को चौक पुलिस स्टेशन में पैथोलॉजी की रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. देवार्ती मित्रा की शिकायत पर डॉ. रमीज मलिक के खिलाफ दर्ज की गई थी। दूसरी एफआईआर 29 दिसंबर 2025 को कैसरबाग पुलिस स्टेशन में नर्सिंग स्टाफ की सदस्य माविया की शिकायत पर मोहम्मद आदिल के खिलाफ दर्ज हुई।

केजीएमयू के प्रवक्ता के.के. सिंह ने कहा, 'दो मामले सामने आए हैं। एक रमीज से जुड़ा था और दूसरा नर्सिंग स्टाफ के एक सदस्य और एक बहुरूपिये से जुड़ा था। रमीज वाले मामले में शुरुआत में एक-दो दिन की थोड़ी देरी हुई थी, हालांकि बाकी दो मामलों का पता हमने खुद लगाया। यूनिवर्सिटी ने इनका पर्दाफाश किया और हमारी पहल पर ही इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।'

सरकार की कार्रवाई और आगे की जांच

एसटीएफ की रिपोर्ट में 'इस्लामिक मेडिकोस' नामक एक कथित नेटवर्क का भी उल्लेख है, जिसमें एसएमएससीआई आगरा और केजीएमयू से जुड़े कुछ पूर्व एवं वर्तमान मेडिकल छात्रों के सक्रिय होने का दावा किया गया है।

केजीएमयू की कार्यकारी परिषद एक छह सदस्यीय जांच समिति गठित करेगी, जिसमें एक कुलपति, एक रजिस्ट्रार, एससी वर्ग के एक शिक्षक, ओबीसी वर्ग के एक शिक्षक और कार्यकारी परिषद द्वारा नामित दो सदस्य शामिल होंगे। रिपोर्ट में केजीएमयू की विशाखा समिति की जांच का हवाला भी दिया गया है, जिसने डॉ. सजीन को संबंधित आरोपों में दोषी पाया था। एसटीएफ ने उनके साथियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की है।

यह मामला उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में कार्यस्थल शिकायत-प्रबंधन तंत्र की व्यापक परीक्षा का रूप लेता जा रहा है, और आने वाले हफ्तों में जांच समिति की रिपोर्ट से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

केवल व्यक्तिगत नहीं। विशाखा समिति के अस्तित्व के बावजूद शिकायतें दबाई गईं — यह सवाल उठाता है कि क्या देश के अन्य केंद्रीय चिकित्सा संस्थानों में भी ऐसी ही संरचनागत चूक है। छह सदस्यीय जांच समिति की विश्वसनीयता इस पर निर्भर करेगी कि उसकी रिपोर्ट स्वतंत्र रूप से सार्वजनिक की जाती है या फिर यह मामला भी प्रशासनिक लीपापोती में दब जाता है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केजीएमयू धर्मांतरण मामला क्या है?
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों द्वारा कुछ सहकर्मियों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने, ब्लैकमेल करने और उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। यह मामला दिसंबर 2025 में दर्ज दो एफआईआर से शुरू हुआ और अब एसटीएफ जांच के बाद कई प्रोफेसरों और अधिकारियों तक फैल गया है।
एसटीएफ की रिपोर्ट में किन-किन लोगों के नाम हैं?
रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश बाबू, एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुमैरा कय्यूम, रेडियोलॉजी के रेजिडेंट डॉ. रिजवान, वीसी के निजी सचिव एसएस अब्बास, डॉ. अब्बास अली मेहदी और प्रोफेसर उस्मान कौसर सहित कई अन्य नाम हैं। डॉ. सजीन को मुख्य आरोपी के रूप में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
यूपी सरकार ने क्या कार्रवाई की है?
30 अक्टूबर 2026 को संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी ने केजीएमयू रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर एसटीएफ रिपोर्ट में चिह्नित डॉक्टरों, प्रोफेसरों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है। केजीएमयू कार्यकारी परिषद एक छह सदस्यीय जांच समिति भी गठित करेगी।
ज्योति राव का मामला इस जांच में क्यों महत्वपूर्ण है?
माइक्रोबायोलॉजी विभाग की संविदा कर्मचारी ज्योति राव ने कर्मचारी शफात अली खान के खिलाफ छेड़छाड़ और धर्म परिवर्तन के दबाव की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कथित तौर पर खान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और ज्योति राव की ही संविदा सेवा समाप्त कर दी गई। यह मामला संस्थागत शिकायत-दमन का उदाहरण बनकर सामने आया है।
'इस्लामिक मेडिकोस' नेटवर्क क्या है?
एसटीएफ रिपोर्ट में 'इस्लामिक मेडिकोस' नामक एक कथित समूह का उल्लेख है, जिसमें एसएमएससीआई आगरा और केजीएमयू से जुड़े कुछ पूर्व और वर्तमान मेडिकल छात्रों का नेटवर्क बताया गया है। हालांकि रिपोर्ट इसे एक दावे के रूप में प्रस्तुत करती है और आगे की जांच इसकी पुष्टि करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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