सरदार सरोवर बांध 2017 के बाद सातवीं बार पूर्ण स्तर 138.68 मीटर पर, गुजरात को मिला विशाल जलभंडार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात का सरदार सरोवर नर्मदा बांध बुधवार, 30 सितंबर 2026 को अपने पूर्ण जलाशय स्तर 138.68 मीटर (455 फीट) तक पहुँच गया। 2017 के बाद यह सातवीं बार है जब जलाशय अधिकतम क्षमता पर भरा है, जिससे आगामी गर्मी के मौसम से पहले गुजरात के पास पानी का बड़ा भंडार सुरक्षित हो गया है।
जल पूजन और आधिकारिक उपस्थिति
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस अवसर पर एकता नगर स्थित बांध का दौरा किया। जलाशय के पूर्ण स्तर तक पहुँचने पर उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच नर्मदा जल का जल पूजन किया। यह लगातार तीसरे वर्ष है जब मुख्यमंत्री पटेल ने सरदार सरोवर बांध पर जल पूजन कर पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर जलापूर्ति राज्य मंत्री ईश्वरसिंह पटेल, मुख्य सचिव एम.के. दास, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजीव कुमार, लोकसभा सांसद मनसुख वसावा, राज्यसभा सदस्य मुकेश राठवा, सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मुकेश पुरी, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के सीईओ अमित अरोड़ा और वरिष्ठ जिला अधिकारी भी मौजूद रहे।
भंडारण क्षमता और जलापूर्ति का विस्तार
138.68 मीटर के पूर्ण स्तर पर बांध की कुल जल भंडारण क्षमता 9,460 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) है। सरदार सरोवर परियोजना वर्तमान में गुजरात के 10,453 गाँवों, 191 शहरों और 7 नगर निगमों में 4 करोड़ से अधिक लोगों को पेयजल उपलब्ध करा रही है।
मुख्यमंत्री पटेल ने बताया कि इस वर्ष नर्मदा बेसिन में मिले कुल पानी के आधार पर गुजरात के पास फिलहाल करीब 7.9 मिलियन एकड़-फीट पानी उपलब्ध है, जबकि सामान्य वर्ष में राज्य का आवंटन 9 मिलियन एकड़-फीट है। उन्होंने उपलब्ध जल का सोच-समझकर और योजनाबद्ध तरीके से उपयोग करने पर विशेष ज़ोर दिया।
सुजलाम-सुफलाम और सौनी योजना का प्रदर्शन
राज्य सरकार के अनुसार, मौजूदा मानसून के दौरान सुजलाम-सुफलाम और सौनी योजना के ज़रिये उत्तर गुजरात के साथ-साथ सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्रों में भी जल पहुँचाया गया।
सुजलाम-सुफलाम योजना के अंतर्गत मौजूदा जल वर्ष में 201 एमसीएम (7,118 मिलियन क्यूबिक फीट) पानी की आपूर्ति हुई, जिससे गुजरात के 1,028 तालाब भरे गए। वहीं, सौनी योजना के तहत 288 एमसीएम (10,189 मिलियन एकड़-फीट) पानी की आपूर्ति की गई, जिसके ज़रिये 167 तालाब, 1,014 चेक डैम और 45 बांध भरे गए।
परियोजना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2017 को सरदार सरोवर बांध को राष्ट्र को समर्पित किया था। राज्य सरकार ने यह भी उल्लेख किया कि मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के 17 दिनों के भीतर ही नर्मदा बांध के शेष कार्य को पूरा करने और गेट लगाने की मंजूरी दी थी।
इसके बाद बांध 2019, 2020, 2022, 2023, 2024, 2025 और अब 2026 में अधिकतम जलस्तर तक पहुँच चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन की वजह से मानसून की अनिश्चितता बढ़ रही है और पश्चिमी भारत के जलाशयों के भराव पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहती हैं।
मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि पानी का किफ़ायती उपयोग और हर बूंद का अधिकतम सदुपयोग सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। अगले हफ्तों में जल वितरण योजना और रबी सीज़न की सिंचाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य प्रशासन जलस्तर प्रबंधन पर नज़र रखेगा।