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सर्दियों में घुटनों के दर्द में वृद्धि क्यों होती है? जानिए इसके पीछे के कारण और आयुर्वेदिक उपचार

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सर्दियों में घुटनों के दर्द में वृद्धि क्यों होती है? जानिए इसके पीछे के कारण और आयुर्वेदिक उपचार

सारांश

क्या आपको सर्दियों में घुटनों के दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है? यह लेख आपको इसके कारणों और प्रभावी आयुर्वेदिक उपचारों के बारे में जानकारी देगा। जानें कैसे आप इस दर्द से राहत पा सकते हैं।

मुख्य बातें

सर्दियों में घुटनों का दर्द बढ़ने के कई कारण हैं।
वायुमंडलीय दबाव और ब्लड सर्कुलेशन में कमी इसके मुख्य कारण हैं।
आयुर्वेदिक उपचार जैसे तेल मालिश और घरेलू उपाय फायदेमंद हो सकते हैं।
गुनगुना पानी और धूप लेना भी महत्वपूर्ण है।
अगर समस्या बढ़ती है, तो चिकित्सक से सलाह लें।

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सर्दियों में कई लोगों को घुटनों में दर्द और जोड़ों की जकड़न का सामना करना पड़ता है, विशेषकर बुजुर्गों, आर्थराइटिस के मरीजों और उन लोगों को जो पहले से ही जोड़ों की समस्याओं से पीड़ित हैं। जैसे ही ठंड आती है, ऐसा महसूस होता है जैसे घुटनों में जंग लग गई हो, जिससे उठना-बैठना और चलना-फिरना कठिन हो जाता है। इसका मुख्य कारण केवल ठंड नहीं है, बल्कि शरीर में होने वाले कई महत्वपूर्ण बदलाव भी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में वायुमंडलीय दबाव या बैरोमेट्रिक प्रेशर घट जाता है। इससे जोड़ों के आसपास के टिश्यू में सूजन बढ़ सकती है, जिससे दर्द और अकड़न होती है। इसके साथ, ठंड के कारण ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है। घुटनों में मौजूद सायनोवियल फ्लूइड, जो जोड़ों को चिकनाई प्रदान करता है, ठंड में गाढ़ा हो जाता है। नतीजतन, जोड़ों की गति कम हो जाती है और दर्द बढ़ जाता है। सर्दियों में धूप की कमी के कारण विटामिन-डी की कमी भी होती है, जिससे हड्डियों और जोड़ों की ताकत कम होती है।

आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में वात दोष का बढ़ना इस समस्या का एक कारण हो सकता है। ठंड और सूखे मौसम में वात दोष बढ़ता है, जिससे जोड़ों में रूखापन, दर्द और जकड़न आ जाती है। शरीर में मौजूद श्लेषक कफ, जो जोड़ों को प्राकृतिक रूप से चिकनाई देता है, वात के बढ़ने से सूख जाता है। यही कारण है कि सर्दियों में घुटनों की समस्या और भी बढ़ जाती है।

आयुर्वेदिक उपचार और घरेलू उपाय इस दर्द से राहत दिलाने में प्रभावी हो सकते हैं। सबसे आसान और प्रभावी उपाय है तेल मालिश। रोजाना तिल के तेल या महानारायण तेल से घुटनों की हल्की मालिश करने से जोड़ों में गर्माहट आती है और जकड़न कम होती है। सुबह खाली पेट भिगोए हुए मेथी दाने का सेवन भी फायदेमंद होता है, क्योंकि मेथी की तासीर गर्म होती है और सूजन को कम करती है। हल्दी और अदरक का काढ़ा पीने से अंदरूनी सूजन कम होती है और जोड़ों की ताकत बढ़ती है।

सर्दियों में गुनगुना पानी पीना, धूप में कुछ समय बिताना और हल्की-फुल्की व्यायाम करना भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, ठंडी फर्श पर बैठने, नंगे पैर चलने और ठंडे खाने से बचना चाहिए। अगर दर्द बहुत ज्यादा हो या लंबे समय तक बना रहे, तो आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना उचित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल बुजुर्गों बल्कि युवा लोगों को भी प्रभावित कर सकती है। यह आवश्यक है कि हम इस समस्या को गंभीरता से लें और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से इसका समाधान खोजें। देशभर में इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्दियों में घुटनों का दर्द क्यों बढ़ता है?
सर्दियों में ठंड के कारण वायुमंडलीय दबाव कम होता है, जिससे जोड़ों में सूजन और दर्द होता है।
आयुर्वेद में घुटनों के दर्द का क्या इलाज है?
आयुर्वेद में वात दोष को संतुलित करने के लिए तेल मालिश, मेथी का सेवन और हल्दी-अदरक का काढ़ा फायदेमंद होता है।
क्या ठंड से बचना चाहिए?
हां, ठंडी फर्श पर बैठने और ठंडे खाने से बचना चाहिए।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर दर्द अधिक हो या लंबे समय तक बना रहे, तो आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।
सर्दियों में जोड़ों का दर्द कम करने के लिए क्या करना चाहिए?
गुनगुना पानी पीना, धूप में बैठना और हल्की एक्सरसाइज करने से मदद मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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