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मौलाना शहाबुद्दीन का बयान: सरकारी योजनाओं में धर्म नहीं, पात्रता है आधार

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मौलाना शहाबुद्दीन का बयान: सरकारी योजनाओं में धर्म नहीं, पात्रता है आधार

सारांश

बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन ने साफ कहा — सरकारी योजनाओं में हिंदू-मुस्लिम नहीं देखा जाता, केवल पात्रता देखी जाती है। राशन, आवास, आयुष्मान — सबमें जरूरतमंद को लाभ। यह बयान उन आरोपों के सीधे जवाब में है जो मुसलमानों को योजनाओं से बाहर बताते हैं।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन ने 7 अक्टूबर 2026 को बरेली में कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ धर्म नहीं, पात्रता के आधार पर मिलता है।
आयुष्मान भारत कार्ड , प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना में विभिन्न समुदायों के पात्र लाभार्थी शामिल हैं।
मौलाना ने राशन वितरण का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ केवल गरीबी और पात्रता देखी जाती है, धर्म नहीं।
उन्होंने इस आरोप को गलत बताया कि मुसलमानों को सरकारी योजनाओं से बाहर रखा जा रहा है।
यह बयान PM मोदी के 25 वर्षीय सार्वजनिक कार्यकाल की चर्चा के संदर्भ में आया।

बरेली के著名 धर्मगुरु मौलाना शहाबुद्दीन ने 7 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि भारत सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि पात्रता और आर्थिक स्थिति के आधार पर सभी नागरिकों को समान रूप से मिल रहा है। यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षीय सार्वजनिक कार्यकाल की चर्चा के संदर्भ में आया।

मुख्य बयान और तर्क

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि आयुष्मान भारत कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना सहित तमाम सरकारी कार्यक्रमों का लाभ विभिन्न समुदायों के पात्र लोगों तक पहुँच रहा है। उन्होंने राशन वितरण का उदाहरण देते हुए कहा कि 'राशन लेने के लिए हिंदू और मुसलमान दोनों एक ही पंक्ति में खड़े होते हैं और वहाँ धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होता — वहाँ केवल यह देखा जाता है कि व्यक्ति गरीब है या नहीं और योजना के लिए पात्र है या नहीं।'

आरोपों को गलत बताया

मौलाना ने उन दावों को जमीनी हकीकत के विपरीत करार दिया, जिनमें आरोप लगाया जाता है कि मुसलमानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। उनका कहना था कि जहाँ भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास बने, वहाँ पात्र गरीब मुसलमानों को भी इसका लाभ मिला है।

किसानों को दी जाने वाली सरकारी सहायता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें भी धर्म नहीं, बल्कि किसान की आर्थिक स्थिति और पात्रता को आधार बनाया जाता है। उनके अनुसार, 'योजनाओं में न हिंदू देखा जाता है और न मुसलमान, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को ध्यान में रखा जाता है।'

सरकार की जिम्मेदारी पर जोर

मौलाना शहाबुद्दीन ने आगे कहा कि किसी भी सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनकी आर्थिक तंगी दूर करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दायित्व को योजनाओं के माध्यम से निभा रहे हैं।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि सरकारी योजनाओं में सांप्रदायिक भेदभाव का मुद्दा भारतीय राजनीति में समय-समय पर उठता रहा है। बरेली जैसे मिश्रित आबादी वाले शहर से किसी प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु का यह बयान सामाजिक सौहार्द के नजरिए से उल्लेखनीय है। यह ऐसे समय में आया है जब कल्याणकारी योजनाओं की पहुँच और समावेशिता पर सार्वजनिक बहस जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीनी स्तर पर योजनाओं की पहुँच के आँकड़े इस दावे की पुष्टि किस हद तक करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे सत्यापन की जरूरत है — व्यक्तिगत अनुभव और जमीनी दावे, नीतिगत आँकड़ों का विकल्प नहीं हैं। योजनाओं की सांप्रदायिक पहुँच पर सरकारी डेटा — जिला-वार और धर्म-वार लाभार्थी सूचियाँ — सार्वजनिक नहीं है, जो इस बहस को एकतरफा बनाती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब धर्म और कल्याण का मुद्दा चुनावी राजनीति में गर्म है। असली जवाबदेही तब होगी जब डेटा यह बताए कि योजनाओं का लाभ आबादी के अनुपात में सभी समुदायों तक पहुँचा या नहीं।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन ने सरकारी योजनाओं के बारे में क्या कहा?
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि पात्रता और आर्थिक स्थिति के आधार पर सभी नागरिकों को मिल रहा है। उन्होंने इसे जमीनी हकीकत बताया।
क्या सरकारी योजनाओं में मुसलमानों के साथ भेदभाव होता है?
मौलाना शहाबुद्दीन ने इस आरोप को गलत बताया और कहा कि जहाँ भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास बने, वहाँ पात्र गरीब मुसलमानों को भी लाभ मिला है। उनके अनुसार, योजनाओं में केवल जरूरतमंद व्यक्ति को देखा जाता है, उसका धर्म नहीं।
यह बयान किस संदर्भ में आया?
यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षीय सार्वजनिक कार्यकाल की चर्चा के दौरान 7 अक्टूबर 2026 को बरेली में सामने आया। मौलाना ने मोदी सरकार की कल्याणकारी पहलों की सराहना करते हुए यह बात कही।
मौलाना ने राशन वितरण का उदाहरण क्यों दिया?
राशन वितरण का उदाहरण देकर मौलाना शहाबुद्दीन ने यह समझाया कि सरकारी लाभ वितरण में व्यावहारिक स्तर पर किसी भी धर्म के लोगों के बीच कोई अंतर नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान एक ही पंक्ति में खड़े होते हैं और पात्रता के आधार पर राशन मिलता है।
मौलाना शहाबुद्दीन कौन हैं?
मौलाना शहाबुद्दीन बरेली स्थित एक धर्मगुरु हैं। बरेली उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख शहर है, जो मिश्रित जनसांख्यिकी और इस्लामी शिक्षा के केंद्र के रूप में जाना जाता है। उनके बयान सामाजिक और धार्मिक मसलों पर चर्चा में महत्व रखते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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