13 अक्टूबर 2026
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कुचिपुड़ी नृत्यांगना शोभा नायडू की पुण्यतिथि: 'सत्यभामा' किरदार से बनी थीं अमर, पद्म श्री से थीं सम्मानित

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कुचिपुड़ी नृत्यांगना शोभा नायडू की पुण्यतिथि: 'सत्यभामा' किरदार से बनी थीं अमर, पद्म श्री से थीं सम्मानित

सारांश

कुचिपुड़ी को विश्व मंच पर ले जाने वाली शोभा नायडू की आज पुण्यतिथि है। 'सत्यभामा' के किरदार से अमर हुईं इस महान नृत्यांगना ने हज़ारों छात्रों को प्रशिक्षित किया और पद्म श्री से सम्मानित हुईं। उनकी विरासत आज भी कुचिपुड़ी की हर प्रस्तुति में जीवित है।

मुख्य बातें

शोभा नायडू की 13 अक्टूबर को पुण्यतिथि मनाई जा रही है; उनका निधन 4 अक्टूबर 2020 को हैदराबाद में 64 वर्ष की आयु में हुआ था।
जन्म 1956 में आंध्र प्रदेश के अनकापल्ले में; कुचिपुड़ी गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम की प्रमुख शिष्या थीं।
सांस्कृतिक नृत्य-नाटकों में 'सत्यभामा' के किरदार के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध।
भारत सरकार ने 1991 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2001 में पद्म श्री से सम्मानित किया।
हैदराबाद की श्रीनिवास कुचिपुड़ी आर्ट एकेडमी की प्राचार्य रहीं और हज़ारों छात्रों को प्रशिक्षित किया।

कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य की दिग्गज नृत्यांगना शोभा नायडू की 13 अक्टूबर को पुण्यतिथि मनाई जा रही है। 4 अक्टूबर 2020 को हैदराबाद में 64 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह गईं शोभा नायडू ने अपने जीवनकाल में कुचिपुड़ी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान दिलाई। सांस्कृतिक नृत्य-नाटकों में 'सत्यभामा' का किरदार इस तरह निभाया कि यह भूमिका उनकी स्थायी पहचान बन गई।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

शोभा नायडू का जन्म 1956 में आंध्र प्रदेश के अनकापल्ले में हुआ था। उनके पिता के.वी. नायडू प्रारंभ में उनके नृत्य के प्रति रुझान के विरुद्ध थे और उन्हें चिकित्सक बनाना चाहते थे। हालाँकि माँ सरोजिनी देवी ने हमेशा उनकी कलात्मक अभिलाषा का समर्थन किया।

उन्होंने राजमुंदरी में पी.एल. रेड्डी की देखरेख में नृत्य की बुनियादी शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद मद्रास (अब चेन्नई) पहुँचकर उन्होंने कुचिपुड़ी के सुविख्यात गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से विधिवत प्रशिक्षण लिया। उन्होंने चेन्नई के क्वीन मैरी कॉलेज से स्नातक की उपाधि भी प्राप्त की।

कुचिपुड़ी में अमिट योगदान

गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम की प्रमुख शिष्याओं में शुमार शोभा नायडू ने कुचिपुड़ी की परंपरा को समृद्ध करते हुए इसे विश्व पटल पर स्थापित किया। वे हैदराबाद स्थित श्रीनिवास कुचिपुड़ी आर्ट एकेडमी की प्राचार्य के रूप में वर्षों तक कार्यरत रहीं।

अपने सुदीर्घ करियर में उन्होंने हजारों छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित किया और अनेक नृत्य-नाटकों की कोरियोग्राफी की। यह ऐसे समय में आया जब शास्त्रीय नृत्य को पेशेवर करियर के रूप में अपनाना समाज में सामान्य नहीं माना जाता था — और शोभा ने इस धारणा को बदलने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पुरस्कार और सम्मान

शास्त्रीय नृत्य में अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने 1991 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2001 में पद्म श्री से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश सरकार ने भी उन्हें कई पुरस्कारों व सम्मानों से नवाज़ा।

गौरतलब है कि पद्म श्री तक का यह सफ़र उस परिवार की बेटी का था जिसे शुरुआत में नृत्य को करियर बनाने की अनुमति देने में संकोच था — यह स्वयं में एक प्रेरक कहानी है।

व्यक्तिगत जीवन

शोभा नायडू के पति अर्जुन राव सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं। उनकी एकमात्र पुत्री का नाम साई शिवरंजनी है। 4 अक्टूबर 2020 को हैदराबाद में उनका निधन हुआ।

विरासत और आगे की राह

शोभा नायडू केवल एक नृत्यांगना नहीं थीं — वे एक पीढ़ी को प्रेरित करने वाली शिक्षिका और कोरियोग्राफर भी थीं। उनकी शिष्याएँ आज देश-विदेश में कुचिपुड़ी की ज्योति जलाए हुए हैं। उनकी पुण्यतिथि पर यह स्मरण आवश्यक है कि उन्होंने एक शास्त्रीय कला को जन-जन तक पहुँचाने में जो भूमिका निभाई, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनकी बेटी ने पद्म श्री जीतकर एक अलग तरह की 'उपचार-कला' को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। आज जब शास्त्रीय नृत्य संस्थाओं में छात्रों की संख्या घट रही है, तब शोभा जैसी गुरुओं की याद एक ज़रूरी प्रश्न उठाती है — क्या हम उनके द्वारा निर्मित संस्थागत ढाँचे को आगे ले जाने के लिए पर्याप्त प्रयास कर रहे हैं?
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शोभा नायडू का निधन कब और कहाँ हुआ?
शोभा नायडू का निधन 4 अक्टूबर 2020 को हैदराबाद में 64 वर्ष की आयु में हुआ। उनकी पुण्यतिथि 13 अक्टूबर को मनाई जाती है।
शोभा नायडू को कौन-कौन से प्रमुख पुरस्कार मिले?
भारत सरकार ने उन्हें 1991 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2001 में पद्म श्री से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश सरकार ने भी उन्हें अनेक पुरस्कारों व सम्मानों से नवाज़ा।
शोभा नायडू ने कुचिपुड़ी की शिक्षा कहाँ से ली?
उन्होंने राजमुंदरी में पी.एल. रेड्डी के मार्गदर्शन में नृत्य की बुनियादी शिक्षा प्राप्त की और बाद में चेन्नई में कुचिपुड़ी के मशहूर गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से विधिवत प्रशिक्षण लिया। उन्होंने चेन्नई के क्वीन मैरी कॉलेज से स्नातक की उपाधि भी प्राप्त की।
श्रीनिवास कुचिपुड़ी आर्ट एकेडमी में शोभा नायडू की क्या भूमिका थी?
शोभा नायडू हैदराबाद स्थित श्रीनिवास कुचिपुड़ी आर्ट एकेडमी की प्राचार्य के रूप में वर्षों तक कार्यरत रहीं। इस दौरान उन्होंने हज़ारों छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित किया और कई नृत्य-नाटकों की कोरियोग्राफी भी की।
राष्ट्र प्रेस
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