सावरकुंडला में 'पीले पतंगिया शरदोत्सव': हजारों लोगों ने किया रास-गरबा, पशुसेवा का भी संदेश
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के अमरेली जिले के सावरकुंडला में 25 अक्टूबर 2026 को भव्य 'पीले पतंगिया शरदोत्सव' का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक प्रेमियों ने पारंपरिक रास-गरबा में बढ़-चढ़कर भाग लिया। विधायक महेश कसवाला के मार्गदर्शन में आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ बीमार गायों के उपचार के लिए जनजागरण करना भी था।
महोत्सव की मुख्य विशेषताएँ
परंपरा और आधुनिक तकनीक के अनूठे संगम से सजे इस आयोजन में ड्यूल टॉप और ड्यूल बेस लाइन वाली थ्री-वे साउंड सिस्टम पहली बार लगाई गई। इसके अलावा 500 फीट की विशाल एलईडी स्क्रीन और वी.जे. ऑपरेटर की व्यवस्था ने आयोजन को अभूतपूर्व भव्यता प्रदान की। आधुनिक प्रस्तुति के बावजूद पारंपरिक रास-गरबा की आत्मा पूरे कार्यक्रम में जीवंत रही।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में गुजरात सरकार के ऊर्जा मंत्री कौशिक वेकरिया, अमरेली के सांसद भरत सुतरिया, लाठी के विधायक जनक तलाविया और अमरेली जिला भाजपा अध्यक्ष अतुल कानाणी विशेष रूप से मौजूद रहे। ऊर्जा मंत्री कौशिक वेकरिया स्वयं प्रतिभागियों के साथ गरबा में शामिल हुए, जिससे उपस्थित जनसमूह का उत्साह और बढ़ गया।
पशुसेवा और जीवदया का संदेश
इस महोत्सव की एक विशेष पहचान यह रही कि इसे बीमार गायों के उपचार में सहयोग जुटाने के उद्देश्य से भी आयोजित किया गया। सांस्कृतिक उत्सव को सामाजिक सरोकार से जोड़ने की इस पहल ने आयोजन को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर एक व्यापक सामाजिक संदेश का माध्यम बनाया। गौरतलब है कि गुजरात में गौसेवा परंपरागत रूप से धार्मिक और सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है।
नेताओं और आयोजकों की प्रतिक्रिया
ऊर्जा मंत्री कौशिक वेकरिया ने महोत्सव की सराहना करते हुए कहा, 'टीम सावरकुंडला' ने शहर में सुंदर और भव्य कार्यक्रम आयोजित किया है और शरदोत्सव मनाना गुजरात की समृद्ध परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अपनी संस्कृति और विरासत को सहेजना सभी का कर्तव्य है। वेकरिया ने विधायक महेश कसवाला की सराहना करते हुए कहा कि वे सावरकुंडला क्षेत्र में सांस्कृतिक, सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार लोगों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
विधायक महेश कसवाला ने बताया कि शरदोत्सव में बच्चों और युवाओं ने विशेष उत्साह के साथ भाग लिया। उन्होंने कहा कि पीले पतंगिया का मैदान प्रतिभागियों के उत्साह से भरा हुआ था और लोग गरबा के माध्यम से माँ जगदंबा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे थे।
नई पीढ़ी और सांस्कृतिक विरासत
आयोजन का एक प्रमुख लक्ष्य नई पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना था। पारंपरिक रास-गरबा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से युवाओं के लिए आकर्षक बनाने की यह कोशिश सावरकुंडला में एक नई परंपरा की नींव रख सकती है। यह आयोजन ऐसे समय में आया है जब गुजरात में नवरात्रि उत्सव की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान तेज़ी से बढ़ रही है और UNESCO की मान्यता के बाद गरबा को वैश्विक मंच मिल चुका है।