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शरजील इमाम की जमानत शर्त उल्लंघन पर कड़कड़डूमा कोर्ट का फैसला: बेल रद्द करने का औचित्य नहीं

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शरजील इमाम की जमानत शर्त उल्लंघन पर कड़कड़डूमा कोर्ट का फैसला: बेल रद्द करने का औचित्य नहीं

सारांश

कड़कड़डूमा अदालत ने माना कि शरजील इमाम ने मीडिया-संवाद प्रतिबंध तोड़ा, फिर भी जमानत रद्द करने से इनकार किया — कारण: सात दिन की अंतरिम अवधि उसी दिन खत्म। UAPA के तहत उन्हें नियमित जमानत सुप्रीम कोर्ट भी दे चुका है इनकार।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा अदालत ने 10 अक्टूबर 2026 को शरजील इमाम की अंतरिम जमानत रद्द करने से इनकार किया।
अदालत ने माना कि इमाम ने मीडिया से बात न करने की जमानत शर्त का उल्लंघन किया।
जमानत रद्द नहीं हुई क्योंकि 7 दिन की अंतरिम जमानत अवधि उसी दिन समाप्त हो रही थी।
इमाम को 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक चचेरे भाई की शादी के लिए जमानत मिली थी।
सर्वोच्च न्यायालय इस वर्ष इमाम और सह-आरोपी उमर खालिद को नियमित जमानत देने से पहले ही इनकार कर चुका है।
नियमित जमानत याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

कड़कड़डूमा अदालत ने 10 अक्टूबर 2026 को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले के आरोपी शरजील इमाम की अंतरिम जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट माना कि इमाम ने मीडिया से बात नहीं करने की शर्त का उल्लंघन किया, परंतु चूँकि सात दिन की अंतरिम जमानत की अवधि उसी दिन समाप्त हो रही थी और इमाम को वैसे भी सरेंडर करना था, इसलिए जमानत रद्द करने का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं पाया गया।

जमानत शर्त का उल्लंघन और अदालत का तर्क

शरजील इमाम को 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी। जमानत देते समय अदालत ने कई शर्तें निर्धारित की थीं, जिनमें मीडिया से किसी भी प्रकार की बातचीत न करना शामिल था।

अदालत ने पाया कि इमाम ने इस शर्त का उल्लंघन करते हुए मीडिया से बातचीत की। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अंतरिम राहत की अवधि पहले ही समाप्ति के करीब थी और व्यावहारिक दृष्टि से जमानत रद्द करने का आदेश देना निरर्थक होता।

मामले की पृष्ठभूमि

शरजील इमाम पर फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है। वह लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले सितंबर में भी अदालत ने उन्हें पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी। उनकी नियमित जमानत याचिका ट्रायल कोर्ट से पहले ही खारिज हो चुकी है।

उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का रुख

दिल्ली उच्च न्यायालय में भी शरजील इमाम ने नियमित जमानत नहीं मिलने के विरुद्ध याचिका दायर की हुई है। वहीं, दिल्ली पुलिस लगातार उनकी जमानत का विरोध करती रही है और उन्हें कथित साजिश का प्रमुख आरोपी बताती है।

यह ऐसे समय में आया है जब इस वर्ष सर्वोच्च न्यायालय भी शरजील इमाम और सह-आरोपी उमर खालिद को नियमित जमानत देने से इनकार कर चुका है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष के प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर प्रथमदृष्टया UAPA की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर कानूनी रोक लागू होती है।

व्यापक साजिश मामले का संदर्भ

यह मामला फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश की जाँच से जुड़ा है, जिसमें कई आरोपियों के खिलाफ UAPA और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है। दिल्ली पुलिस के अनुसार यह एक सुनियोजित षड्यंत्र था, जबकि बचाव पक्ष इन आरोपों को निराधार बताता रहा है।

अदालत का यह फैसला UAPA मामलों में जमानत की जटिलता और न्यायिक विवेकाधिकार की सीमाओं को एक बार फिर रेखांकित करता है। इमाम की नियमित जमानत याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक असहज प्रश्न छोड़ जाता है — जब अदालत स्वयं शर्त उल्लंघन मानती है, तो भविष्य में अंतरिम जमानत देते समय मीडिया-प्रतिबंध जैसी शर्तों की प्रवर्तनीयता का क्या अर्थ रह जाता है? UAPA मामलों में जमानत पहले ही दुर्लभ है, और जब अल्पकालिक अंतरिम राहत में भी शर्तें टूटती हैं तो बिना परिणाम के, यह अभियोजन और बचाव दोनों के लिए एक खोखला नज़ीर बन सकता है। दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित नियमित जमानत याचिका पर यह घटनाक्रम असर डाल सकता है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शरजील इमाम की अंतरिम जमानत रद्द क्यों नहीं हुई?
कड़कड़डूमा अदालत ने माना कि जमानत की अवधि 10 अक्टूबर को वैसे भी समाप्त हो रही थी और शरजील इमाम को उसी दिन सरेंडर करना था, इसलिए जमानत रद्द करने का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं था।
शरजील इमाम ने जमानत की कौन सी शर्त तोड़ी?
अदालत ने जमानत देते समय मीडिया से बातचीत न करने की शर्त लगाई थी। अदालत ने अपने आदेश में माना कि शरजील इमाम ने इस शर्त का उल्लंघन करते हुए मीडिया से बात की।
शरजील इमाम को यह अंतरिम जमानत क्यों दी गई थी?
शरजील इमाम को अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक सात दिन की अंतरिम जमानत दी गई थी।
शरजील इमाम को नियमित जमानत क्यों नहीं मिल रही?
सर्वोच्च न्यायालय ने इस वर्ष कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों के आधार पर प्रथमदृष्टया UAPA की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर कानूनी रोक लागू होती है। ट्रायल कोर्ट भी नियमित जमानत याचिका खारिज कर चुका है, और दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका विचाराधीन है।
शरजील इमाम पर कौन से आरोप हैं?
शरजील इमाम पर फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम) और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है। दिल्ली पुलिस उन्हें इस कथित साजिश का प्रमुख आरोपी बताती है।
राष्ट्र प्रेस
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