20 अक्टूबर 2026
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शिरडी में साईबाबा की 108वीं पुण्यतिथि: 20 अक्टूबर को 24 घंटे खुला रहा समाधि मंदिर, उमड़े हजारों भक्त

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शिरडी में साईबाबा की 108वीं पुण्यतिथि: 20 अक्टूबर को 24 घंटे खुला रहा समाधि मंदिर, उमड़े हजारों भक्त

सारांश

शिरडी में साईबाबा की 108वीं पुण्यतिथि इस बार महज़ एक परंपरा नहीं — यह एक ऐतिहासिक संख्या का उत्सव है। हिंदू परंपरा में 108 की पवित्रता और बाबा की विजयादशमी पर महासमाधि ने इस आयोजन को अभूतपूर्व भव्यता दी, साईनगरी में हजारों भक्तों की श्रद्धा उमड़ पड़ी।

मुख्य बातें

श्री साईबाबा की 108वीं पुण्यतिथि का मुख्य दिवस 20 अक्टूबर 2026 को शिरडी में मनाया गया।
तीन दिवसीय उत्सव 19 से 21 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है; मंदिर मुख्य दिन 24 घंटे खुला रखा गया।
उत्सव के मुख्य दिन बाबा की प्रतिमा और पोथी की सवाद्य शोभायात्रा निकाली गई।
साईबाबा ने 15 अक्टूबर 1918 को विजयादशमी के दिन महासमाधि ली थी, इसीलिए दशहरे का विशेष महत्व है।
हिंदू परंपरा में 108 की संख्या पवित्रता और पूर्णता की प्रतीक मानी जाती है, जिससे इस वर्ष का उत्सव और विशेष बना।

महाराष्ट्र के पवित्र तीर्थस्थल शिरडी में श्री साईबाबा की समाधि की 108वीं पुण्यतिथि का मुख्य दिवस मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को श्रद्धा, भक्ति और अपार उत्साह के बीच मनाया गया। देश-विदेश से उमड़े हजारों श्रद्धालुओं के साई नाम के जयघोष से पूरी साईनगरी भक्तिमय हो उठी। इस ऐतिहासिक अवसर पर श्री साईबाबा समाधि मंदिर पूरे 24 घंटे खुला रखा गया, ताकि देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर सकें।

तीन दिवसीय उत्सव का मुख्य क्रम

19 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस पुण्यतिथि उत्सव के मुख्य दिन शिरडी में श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ देखी गई। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र श्रद्धालुओं की चहल-पहल से जीवंत हो उठे। भक्त बाबा की समाधि के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते दिखे।

उत्सव के मुख्य दिन प्रातःकाल श्री साईबाबा समाधि मंदिर से बाबा की प्रतिमा और पोथी की सवाद्य शोभायात्रा निकाली गई। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और भक्ति गीतों के बीच निकली इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में साईभक्त शामिल हुए। साई नाम का अखंड जयघोष पूरे मंदिर परिसर में गूंजता रहा।

साईबाबा की महासमाधि का ऐतिहासिक संदर्भ

श्री साईबाबा ने 15 अक्टूबर 1918 को विजयादशमी के दिन महासमाधि ली थी। यही कारण है कि दशहरे का पर्व साईभक्तों के लिए विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है। गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष इस अवसर पर शिरडी में लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं और बाबा की समाधि पर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।

यह 108वीं पुण्यतिथि इस अर्थ में और भी विशेष है क्योंकि हिंदू परंपरा में 108 की संख्या अत्यंत पवित्र मानी जाती है — इसे पूर्णता और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष के उत्सव में श्रद्धालुओं की उपस्थिति सामान्य वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक बताई जा रही है।

धार्मिक कार्यक्रमों की विस्तृत श्रृंखला

पुण्यतिथि उत्सव के दौरान पूजा-अर्चना, भजन, कीर्तन, पालकी और शोभायात्रा सहित अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से साईबाबा की शिक्षाओं — मानवता, सेवा, प्रेम और श्रद्धा — के संदेश को स्मरण किया गया। भक्त इन अनुष्ठानों में शामिल होकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते दिखे।

श्रद्धालुओं की सुविधा के इंतज़ाम

उत्सव के मुख्य दिन श्री साईबाबा समाधि मंदिर को 20 अक्टूबर को 24 घंटे खुला रखने का निर्णय लिया गया था, जिससे दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु भी बिना किसी बाधा के दर्शन कर सकें। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन भक्तों के लिए राहतदायक रही जो रात्रि या देर शाम तक शिरडी पहुँचे।

बाबा के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति इस वर्ष के उत्सव में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। शिरडी में भक्तों के पहुँचने का सिलसिला 21 अक्टूबर तक जारी रहेगा, जब उत्सव का समापन होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि 108 की संख्या हिंदू और बौद्ध दोनों परंपराओं में दिव्यता का प्रतीक है — यह संयोग इस आयोजन को दशकों में एक बार आने वाला बनाता है। शिरडी की अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर इस उत्सव का प्रभाव भी उल्लेखनीय है, जो अक्सर मुख्यधारा की कवरेज में छूट जाता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि साईबाबा की शिक्षाएँ — सर्वधर्म समभाव और मानव सेवा — आज के विभाजनकारी सामाजिक परिवेश में और भी प्रासंगिक हो उठती हैं।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साईबाबा की 108वीं पुण्यतिथि 2026 कब और कहाँ मनाई जा रही है?
साईबाबा की 108वीं पुण्यतिथि महाराष्ट्र के शिरडी में 19 से 21 अक्टूबर 2026 तक मनाई जा रही है। मुख्य दिवस 20 अक्टूबर को था, जब श्री साईबाबा समाधि मंदिर 24 घंटे खुला रखा गया।
साईबाबा ने महासमाधि कब ली थी?
श्री साईबाबा ने 15 अक्टूबर 1918 को विजयादशमी (दशहरे) के दिन महासमाधि ली थी। इसी कारण दशहरे का पर्व साईभक्तों के लिए गहरा धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है।
108वीं पुण्यतिथि इतनी विशेष क्यों मानी जा रही है?
हिंदू परंपरा में 108 की संख्या पवित्रता और पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है। यह दुर्लभ संयोग इस वर्ष के उत्सव को सामान्य पुण्यतिथि समारोहों से अलग और विशेष बनाता है, जिसके चलते इस बार श्रद्धालुओं की उपस्थिति अधिक बताई जा रही है।
पुण्यतिथि उत्सव में कौन-कौन से धार्मिक कार्यक्रम होते हैं?
उत्सव में पूजा-अर्चना, भजन, कीर्तन, पालकी, शोभायात्रा और साईबाबा की प्रतिमा व पोथी की सवाद्य यात्रा शामिल हैं। इन कार्यक्रमों के ज़रिये बाबा की मानवता, सेवा और प्रेम की शिक्षाओं को याद किया जाता है।
शिरडी में दर्शन के लिए मंदिर कब तक खुला रहा?
उत्सव के मुख्य दिन 20 अक्टूबर 2026 को श्री साईबाबा समाधि मंदिर पूरे 24 घंटे खुला रखा गया। यह व्यवस्था दूरदराज और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को निर्बाध दर्शन का अवसर देने के लिए की गई।
राष्ट्र प्रेस
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