शिरडी में 115वां श्रीरामनवमी उत्सव धूमधाम से, 'साईराम' के जयघोष से गूंजता मंदिर
सारांश
Key Takeaways
- उत्सव २५ से २७ मार्च तक मनाया जाएगा।
- हजारों श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लिया।
- मंदिर परिसर को भव्य तरीके से सजाया गया है।
- सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- राम नवमी का दिन भगवान राम के जन्म का प्रतीक है।
शिरडी, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट (शिरडी) द्वारा 115वां श्रीरामनवमी उत्सव विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह उत्सव बुधवार से आरंभ हो रहा है और शुक्रवार (२७ मार्च) तक चलेगा। इस अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में साई भक्त शिरडी पहुंच रहे हैं।
उत्सव के पहले दिन, बुधवार को सुबह ५:१५ बजे श्री साईबाबा की काकड़ आरती संपन्न हुई। इस पावन आरती में हजारों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भक्तिभाव से भाग लिया। इसके बाद सुबह ५:४५ बजे श्री की पोथी और प्रतिमा की पारंपरिक शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। ढोल-ताशों की गूंज, ताल-मृदंग के साथ 'साईराम' के जयघोष ने मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया।
मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है, जिससे उत्सव की भव्यता और बढ़ गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए संस्थान द्वारा कई व्यवस्थाएं की गई हैं, जिसमें दर्शन के लिए सुचारु योजना, कड़ी सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस उत्सव को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए संस्थान की तदर्थ समिति के अध्यक्ष और प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिवाजीराव कचरे, समिति सदस्य एवं जिलाधिकारी पंकज आशिया, मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गाडीलकर और उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी भिमराज दराडे के मार्गदर्शन में सभी प्रशासनिक अधिकारी, सुरक्षा विभाग और विभिन्न विभागों के प्रमुख निरंतर प्रयासरत हैं।
इस दौरान पूरे शिरडी नगर में श्रद्धामय और उत्साहपूर्ण वातावरण का अनुभव किया जा रहा है। 'साईराम' के नामस्मरण से पूरा क्षेत्र गूंज रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था, उत्साह और भक्ति के कारण श्रीरामनवमी उत्सव को विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व प्राप्त हुआ है।
चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को रामनवमी भी कहा जाता है, जो कि भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। राम नवमी के दिन मध्याह्न काल का विशेष महत्व होता है क्योंकि मान्यता है कि भगवान राम का जन्म दोपहर के समय हुआ था।