पराली प्रबंधन पर शिवराज सिंह चौहान का अल्टीमेटम: युद्ध स्तर पर कार्रवाई करो, समय नहीं बचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 13 अक्टूबर 2026 को कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित अंतर-मंत्रालयी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पराली जलाने की रोकथाम के लिए अब फाइलों से बाहर निकलकर जमीन पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा। धान कटाई और रबी बुवाई के बीच समय बहुत कम बचा है, इसलिए जिलाधिकारियों की तत्काल बैठकें बुलाकर सख्त निगरानी और व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित किए जाएँ।
बैठक का मुख्य घटनाक्रम
इस बैठक की सह-अध्यक्षता केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने संयुक्त रूप से की। इसमें केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के कृषि मंत्रीगण, केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा तथा केंद्रीय पर्यावरण सचिव नरेंद्र भूषण सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
चौहान ने बैठक में कहा कि किसान को केवल 'पराली मत जलाओ' कहना पर्याप्त नहीं है — उसे आसान, सुलभ और सस्ता विकल्प देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि पराली खेत में मिलाई जाए तो जैविक खाद बनती है, और खेत से बाहर जाए तो बायो-सीएनजी, बायो-इथेनॉल, बिजली और चारे के रूप में किसान की अतिरिक्त आमदनी का स्रोत बनती है।
राज्यवार आँकड़े — कहाँ सुधार, कहाँ चिंता
बैठक में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 की अवधि में पिछले वर्ष की तुलना में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में 53.3 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में लगभग 32 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी आई है। पंजाब में भी कुछ गिरावट दर्ज हुई है।
हालाँकि, मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामले 55 से बढ़कर 277 (452 प्रतिशत की वृद्धि) और राजस्थान में 20 से बढ़कर 60 (200 प्रतिशत की वृद्धि) होना गंभीर चिंता का विषय बताया गया। चौहान ने इन दोनों राज्यों को आगाह किया कि प्रभावित जिलों और गाँवों की पहचान कर तत्काल विशेष कार्ययोजना लागू की जाए।
मशीनों की स्थिति और केंद्र का हस्तक्षेप
केंद्र सरकार द्वारा अब तक राज्यों को 3.54 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 26,109 नई मशीनें भी वितरित की गई हैं।
बावजूद इसके, केंद्रीय सर्वेक्षण में यह चिंताजनक तथ्य सामने आया कि पंजाब में लगभग 40 प्रतिशत और हरियाणा में 48 प्रतिशत पुरानी मशीनें बंद या गैर-कार्यशील पाई गई हैं। चौहान ने निर्देश दिए कि नई मशीनें बाँटने के साथ-साथ बंद पड़ी पुरानी मशीनों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। कस्टम हायरिंग सेंटर्स (सीएचसी) को सक्रिय करते हुए छोटे और सीमांत किसानों को सस्ती दरों पर मशीनें सुलभ कराना अनिवार्य बताया गया।
फंड आवंटन और उपयोगिता की स्थिति
फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना के तहत वर्ष 2018-19 से 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को कुल ₹4,266.47 करोड़ जारी किए हैं — जिसमें पंजाब को ₹2,056.50 करोड़, हरियाणा को ₹1,171.71 करोड़, उत्तर प्रदेश को ₹868.67 करोड़ और मध्य प्रदेश को ₹59 करोड़ शामिल हैं।
चालू वर्ष 2026-27 में ₹592.57 करोड़ का आवंटन तय किया गया है, जिसमें से ₹430.87 करोड़ जारी हो चुके हैं। चौहान ने आवंटित राशि के धीमे उपयोग पर चिंता जताते हुए विशेष रूप से पंजाब सरकार से आग्रह किया कि वह पूर्व में जारी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र तत्काल केंद्र को भेजे, ताकि अगली किस्त बिना रुकावट जारी हो सके।
वैकल्पिक उपाय और आगे की राह
चौहान ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पराली को चारे के रूप में संग्रहित कर मवेशियों तक पहुँचाने, थर्मल पावर प्लांट्स में पराली पेलेट्स की को-फायरिंग, कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) और 2जी बायो-इथेनॉल संयंत्रों से किसानों की सीधी आपूर्ति शृंखला जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही, अधिक समय लेने वाली पूसा-44 जैसी किस्मों के स्थान पर पूसा 2090 और पीआर126 जैसी कम अवधि वाली उन्नत किस्मों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सक्रिय हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि उपग्रह निगरानी में दोपहर 3 बजे के बाद के अंतराल में ग्राउंड पेट्रोलिंग और फ्लाइंग स्क्वॉड के माध्यम से सख्त निगरानी जारी रखी जाए। चौहान ने समापन में कहा कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक हर मोर्चे पर राज्यों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है — और यह मिशन एक साझा राष्ट्रीय संकल्प है।