सीएक्यूएम टीम ने पंजाब के 3 जिलों में पराली प्रबंधन की समीक्षा की, किसानों से लिया भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की उच्च-स्तरीय टीम ने 1 नवंबर 2026 को पंजाब के संगरूर, पटियाला और मलेरकोटला जिलों में धान की पराली प्रबंधन की स्थिति का गहन जायजा लिया। टीम ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि पराली जलाने की घटनाओं पर सख्त निगरानी रखी जाए और इन्हें रोकने के लिए समन्वित प्रयास जारी रखे जाएँ।
समीक्षा बैठक में क्या हुआ
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सीएक्यूएम टीम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे अपनी कार्ययोजनाओं में किए गए वादों के अनुरूप धान की पराली का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करें। जमीनी स्तर पर की जा रही कार्रवाई को निर्धारित लक्ष्यों के अनुकूल रखा जाना चाहिए।
बैठक में जिला प्रशासन ने पराली प्रबंधन की तैयारियों और पराली जलाने की घटनाओं को नियंत्रित करने के उपायों का विवरण प्रस्तुत किया।
एक्स-सिटू उपयोग केंद्र का दौरा
टीम ने मलेरकोटला के धुरी रोड पर स्थित एक्स-सिटू पराली उपयोग केंद्र का निरीक्षण किया। यह एक डुप्लेक्स बोर्ड और पेपर बनाने वाली इकाई है, जो अपने 20 टीपीएफ क्षमता वाले बॉयलर में ईंधन के रूप में धान की पराली का उपयोग करती है। उद्योग प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि इस बॉयलर फर्नेस में सालाना लगभग 17,000 मीट्रिक टन धान की पराली का उपयोग किया जाएगा।
इन-सिटू प्रबंधन और किसानों से संवाद
टीम ने मलेरकोटला जिले के अहमदबाद गाँव में इन-सिटू पराली प्रबंधन मशीनों को कार्य करते हुए देखा। कृषि विभाग ने सुपर सीडर मशीन की कार्यप्रणाली का प्रदर्शन भी किया। इस दौरान स्थानीय किसानों ने टीम को आश्वासन दिया कि वे पराली नहीं जलाएँगे और इन-सिटू मशीनों के माध्यम से उसका प्रबंधन करेंगे।
टीम ने संगरूर जिले की भवानीगढ़ तहसील के विभिन्न गाँवों का भी दौरा किया। विशेष रूप से 'हॉटस्पॉट' के रूप में चिह्नित गाँव घराचों के किसानों से बातचीत की गई, जहाँ पराली जलाने की घटनाएँ अधिक रही हैं।
मशीनरी उपलब्धता और किसानों की दिक्कतें
टीम को जिला प्रशासन की तैयारियों और किसानों को क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (सीआरएम) मशीनरी उपलब्ध कराने की व्यवस्थाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। गौरतलब है कि किसानों ने मशीनरी के उपयोग में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों से भी अवगत कराया, जो इस पूरी प्रक्रिया में एक चुनौती बनी हुई है।
आगे की राह
यह समीक्षा ऐसे समय में हुई है जब उत्तर भारत में कटाई का मौसम चल रहा है और दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका बनी रहती है। सीएक्यूएम की इस सक्रिय निगरानी से उम्मीद की जा रही है कि इस बार पराली जलाने की घटनाओं में कमी आएगी और वायु गुणवत्ता पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव कम होगा।