इंदौर: एरोड्रम थाने में कथित मारपीट के बाद थाना प्रभारी समेत 6 पुलिसकर्मी निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के इंदौर में एरोड्रम थाने में दो व्यक्तियों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाहा सहित 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। 10 अक्टूबर 2026 को हुई इस कार्रवाई से पहले शुक्रवार रात स्थानीय विधायक गोलू शुक्ला के समर्थकों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब पंडित जयदीप दुबे का अपने पड़ोसियों से विवाद हो गया। इस पर उन्होंने स्थानीय विधायक गोलू शुक्ला से सहायता मांगी। विधायक ने एरोड्रम थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाहा को फोन किया, जिन्होंने कथित तौर पर दुबे को थाने बुलाकर मामला सुलझाने का आश्वासन दिया।
इसके बाद जयदीप दुबे BJP कार्यकर्ता पंकज चौबे के साथ एरोड्रम थाने पहुँचे। वहाँ किसी विषय पर बहस बढ़ने के बाद पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर दोनों के साथ मारपीट की और उन्हें थाने के अंदर बैठा दिया। आरोपों की पुष्टि अभी जाँच के अधीन है।
भाजपा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
घटना की जानकारी फैलते ही शुक्रवार रात करीब 11 बजे सैकड़ों BJP कार्यकर्ता और विधायक गोलू शुक्ला के समर्थक एरोड्रम थाने के बाहर एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए कथित मारपीट में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ BJP और स्थानीय प्रशासन के बीच संबंधों पर नज़र रखी जा रही है। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस थानों पर दबाव डालने की घटनाएँ देश के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर सामने आती रही हैं।
पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया
थाने के बाहर बनी तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। प्रारंभिक जाँच के बाद अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त सुमित केरकट्टा ने 6 पुलिसकर्मियों के निलंबन की घोषणा की। निलंबित कर्मियों में थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाहा, एक उपनिरीक्षक और चार अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं।
विभागीय जाँच जारी
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना के पूरे क्रम और सभी संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जाँच के लिए विभागीय प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जाँच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यह मामला पुलिस की जवाबदेही और राजनीतिक दबाव में की गई प्रशासनिक कार्रवाई के व्यापक सवाल को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में विभागीय जाँच की रिपोर्ट यह तय करेगी कि निलंबित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध औपचारिक अनुशासनात्मक या आपराधिक कार्रवाई होती है या नहीं।